भोपाल समाचार, 19 जुलाई 2026: चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों पर एफिडेविट फाइल करने की शर्त इसलिए लगाई थी ताकि जनता को उनके बारे में सब कुछ पता चल जाए लेकिन चुनाव आयोग अपनी वेबसाइट पर एफिडेविट को ऐसे अपलोड करता है कि, आम आदमी कुछ समझ ही नहीं पता। इसलिए हम एक-एक पॉइंट पर दोनों प्रत्याशियों के बीच तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं। आज हम आपको दोनों के बारे में वह बातें बताएंगे, जो आपको पता तो है लेकिन आपने ध्यान नहीं दिया:-
आशुतोष तिवारी: भाजपा के Gen Z?
1. आशुतोष तिवारी (BJP) के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है। इन्होंने शपथ पत्र में घोषित किया है कि उन्हें किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है।
इसका मतलब हुआ कि, श्री आशुतोष तिवारी बड़ी ही चतुराई के साथ पॉलिटिक्स करते हैं। रिकॉर्ड खराब ना हो जाए इस बात का काफी ख्याल रखते हैं। वैसे एक सवाल भी बनता है। जीवन में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ मतलब 2003 के पहले दिग्विजय सिंह का कभी कोई विरोध नहीं किया। मध्य प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही सक्रिय हुए हैं। एक तरह से भाजपा के Gen Z हैं। जिनको पता ही नहीं की सत्ता तक पहुंचाने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा था।
घनश्याम सिंह: 2020 से राजा साहब का खौफ खत्म
घनश्याम सिंह (INC) के विरुद्ध कुल 3 आपराधिक मामले लंबित हैं।
मामला 1 (FIR 453/2020): इसमें मारपीट, गाली-गलौज और 15-20 साथियों के साथ मिलकर फरियादी पर हमले के आरोप (धारा 323, 294, 506 आदि) हैं।
मामला 2 (FIR 378/2020): यह मामला कोविड-19 महामारी के दौरान राजनीतिक रैली निकालकर नियमों के उल्लंघन से संबंधित है।
मामला 3: यह एक गैर-पंजीकृत प्रकरण है जो उपरोक्त FIR से संबंधित बताया गया है।
मतलब 2020 से दतिया में राजा साहब के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत की जाने लगी। क्योंकि यह स्वीकार करना मुश्किल लेकर 2020 के पहले राजा साहब ने प्रशासन के नियमों को नहीं तोड़ा था अथवा लोगों के साथ मारपीट, गाली-गलौज नहीं की होगी। ग्वालियर चंबल, बुंदेलखंड और खास तौर पर दतिया में मारपीट, गाली-गलौज तो सामान्य बात है। बड़ी बात यह है कि किसी ने जाकर मुकदमा दर्ज करवा दिया। मतलब राजा साहब का खौफ कम हुआ।
आशुतोष तिवारी: लग्जरी लाइफ के शौकीन
शपथ पत्र के अनुसार आशुतोष तिवारी पर कुल ₹11,83,443 का ऋण है। यह मुख्य रूप से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से लिया गया एक कार लोन है। जो इनकी कुल चल संपत्ति ₹49,15,137 के मुकाबले एक महत्वपूर्ण देनदारी है।
इसका मतलब हुआ कि श्री आशुतोष तिवारी को शो ऑफ (लग्जरी लाइफ) की काफी आदत है। टाटा हैरियर (कीमत ₹28.53 लाख) खरीदने के लिए लगभग 12 लाख रुपए का लोन ले लिया जबकि आय का कोई मजबूत साधन नहीं था। जनता को सोचना चाहिए कि जो व्यक्ति चुनाव से पहले कर्जा लेकर लग्जरी कार चला रहा था, यदि चुनाव जीत गया तो क्या करेगा। अब खेती से इतनी कमाई तो होती नहीं है की लग्जरी लाइफ के शौक पूरे हो जाएं।
घनश्याम सिंह के कुर्ते की जेब फट गई
श्री घनश्याम सिंह पर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का कुल ₹5,63,244 का ऋण है, जिसमें LIC पॉलिसी पर लिया गया लोन और PNB का व्यक्तिगत लोन शामिल है। सबसे बड़ी वित्तीय नकारात्मक बात यह है कि इन पर ₹1,24,29,920 (लगभग 1.24 करोड़ रुपये) की सरकारी देनदारियां हैं जो विवादित हैं। यह विवाद दतिया किला मार्केट के संपत्ति कर, प्रीमियम और भू-भाटक से जुड़ा है, जिसके मामले माननीय उच्च न्यायालय और कलेक्टर न्यायालय में लंबित हैं।
इसका मतलब हुआ कि यदि श्री घनश्याम सिंह चुनाव जीत गए तो विधायक बनते हैं उनका सबसे पहले एजेंडा, अपने सिर पर लटक रही सवा करोड़ की सरकारी तलवार से मुक्ति होगा। या तो सरकार माफ करें या फिर सरकारी खजाने से जनता के हित में जो काम होने हैं, और 2 साल की विधायक निधि। इसके अलावा लगभग ₹600000 का पर्सनल लोन, यह भी बताता है कि राजा साहब के कुर्ते की जेब फट गई है। वरना LIC की पॉलिसी को गिरवी रखकर कौन ही लोन लेता है?

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