भोपाल समाचार, 26 जून 2026: मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला शिक्षा अधिकारी दमोह (DEO) ने e-attendance में गड़बड़ी के कारण शासकीय प्राथमिक शाला बिजौरा (Govt Primary School Bijoura) की प्रभारी प्रधानाध्यापक को सस्पेंड कर दिया।
मामला 24 जून 2026 का है, एक पत्रकार ने अपनी न्यूज़ में दावा किया कि, सुबह 10:30 बजे विद्यालय में ताला लटका हुआ था। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा खबर की सत्यता की जांच के लिए जनशिक्षक आनंद नेमा और कमलेश कोष्टा को मौके पर भेजा गया, जिन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में पुष्टि की कि विद्यालय का निर्धारित समय सुबह 7:00 से दोपहर 12:00 बजे तक है, लेकिन महिला शिक्षक वहां उपस्थित नहीं थीं।
Hamare Shikshak app tracking system exposed fake attendance in Madhya Pradesh
अधिकारियों का कहना है कि, जांच में सबसे गंभीर खुलासा 'हमारे शिक्षक' ऐप (Hamare Shikshak App) के माध्यम से हुआ। विभाग द्वारा लागू किए गए इस ऐप के डेटा से पता चला कि प्रभारी प्रधानाध्यापक श्रीमती प्रियंका बड़गैया ने स्कूल से लगभग 20 किलोमीटर दूर रहते हुए सुबह 10:38 बजे लॉग इन और शाम 5:14 बजे लॉग आउट किया था। Hamare Shikshak app tracking system Madhya Pradesh ने यह स्पष्ट कर दिया कि महिला शिक्षक विद्यालय परिसर से दूर थीं और तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास कर रही थीं, जिसे घोर अनुशासनहीनता माना गया है।
Disciplinary action under MP Civil Services Conduct Rules 1965
जिला शिक्षा अधिकारी, दमोह ने इसे लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और पदीय दायित्वों के निर्वहन में अक्षमता माना है। यह कृत्य म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियमों के विपरीत पाया गया। परिणामस्वरूप, म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत महिला शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
Ensuring school timings and attendance monitoring in MP schools
इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा निर्धारित school timings and attendance monitoring in MP को लेकर विभाग अब बेहद सख्त हो गया है। डिजिटल माध्यमों से शिक्षकों की लोकेशन ट्रैक की जा रही है। इधर शिक्षकों में इस कार्रवाई को लेकर असंतोष है। शिक्षकों का कहना है कि यदि डिजिटल उपस्थिति में कोई गड़बड़ी हो रही है तो, कर्मचारियों को अनुपस्थित माना जाना चाहिए। कारण बताओं नोटिस जारी कर सकते हैं लेकिन इस प्रकार सस्पेंड नहीं कर सकते। इस तरह की कठोर कार्रवाई, डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। यह शिक्षकों पर प्रेशर क्रिएट करने का नया तरीका है।

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