भोपाल, 27 जून 2026: मध्य प्रदेश के 55 जिलों में 11 कलेक्टर ऐसे हैं, जो आत्ममुग्ध हैं। इंटरनल रिपोर्ट में भी सब कुछ बढ़िया बता रहे हैं जबकि विभागीय समीक्षा में भोपाल-इंदौर सहित 11 जिलों की हालत खराब है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है की मुख्य सचिव को संज्ञान लेना पड़ रहा है। इसके बावजूद कलेक्टरों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
Pending Revenue Cases in MP Farmers and Land Records Issues
राजस्व विभाग की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 100 दिन से अधिक पुरानी 30,000 से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं। नामांतरण (Mutation), सीमांकन (Demarcation), खसरा संशोधन और अतिक्रमण जैसे सामान्य कार्य, जो आम नागरिक के दैनिक जीवन से जुड़े हैं, वर्षों से अटके हुए हैं। सीहोर, भोपाल, इंदौर, भिंड और खंडवा जैसे महत्वपूर्ण जिलों में राजस्व प्रकरणों (Revenue Cases) के निपटारे की रफ्तार बेहद सुस्त है। राजस्व प्रकरणों के निपटारे में देरी (Delay in settlement of revenue cases) के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के हक पर सीधा प्रहार हो रहा है, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Health Crisis in Bhopal and Singrauli High Risk Pregnancy Management
स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें तो स्थिति और भी भयावह है। भोपाल और सिंगरौली जैसे जिलों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य प्रबंधन (Health management of pregnant women) की स्थिति चिंताजनक है। इन क्षेत्रों में गंभीर एनीमिया और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी (High-Risk Pregnancy) के मामलों में प्रशासन का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है। विडंबना यह है कि एक तरफ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बात की जा रही है, तो दूसरी तरफ प्रसूति सहायता योजना (Maternity Benefit Scheme) के तहत हजारों माताएं आज भी अपने भुगतान का इंतजार कर रही हैं।
Doctor Shortage in Madhya Pradesh Health Department Issues
मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा बुनियादी संसाधनों और मानव बल की कमी से जूझ रहा है। प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी (Shortage of doctors in MP) बनी हुई है, और प्रशासनिक विफलता का आलम यह है कि चयनित मेडिकल अधिकारियों में से लगभग 100 डॉक्टरों ने अब तक अपनी जॉइनिंग तक नहीं दी है। रिक्त पदों और जॉइनिंग में इस लापरवाही के कारण आम जनता को उचित उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है, जो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है।
Public Service Guarantee Act Violations Bhind CM Helpline Complaints Shivpuri
सरकारी सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी के लिए बना कानून भी बेअसर साबित हो रहा है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम (Public Service Guarantee Act) की समय-सीमा का सबसे अधिक उल्लंघन भिंड जिले में देखा गया है। वहीं, शिवपुरी में सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) की शिकायतों का अंबार लगा हुआ है, लेकिन समाधान की स्थिति बेहद खराब है। इसके अलावा, सिंगरौली और अनूपपुर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में वनाधिकार दावों (Forest Rights Claims) के निराकरण की कछुआ चाल ने स्थानीय निवासियों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
School Admission Gap Madhya Pradesh Samagra Portal Registration Issues
शिक्षा के क्षेत्र में भी लक्ष्यों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। भोपाल, देवास, शहडोल और मुरैना में स्कूल प्रवेश का लक्ष्य अधूरा है। चौंकाने वाली बात यह है कि 4.34 लाख से अधिक बच्चों का समग्र पोर्टल (Samagra Portal) पर पंजीयन तक नहीं हो सका है। डिजिटल इंडिया और साक्षरता के दावों के बीच इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से बाहर होना भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है।
List of Madhya Pradesh districts that failed in administrative matters
मध्य प्रदेश के वे जिले जहाँ प्रशासनिक कार्यों, स्वास्थ्य या शिक्षा व्यवस्था में कमियां या "गड़बड़" पाई गई है, उनके नाम नीचे दिए गए हैं:
- सीहोर: यहाँ राजस्व प्रकरणों के निपटारे की रफ्तार बेहद धीमी पाई गई है।
- भोपाल: इस जिले में राजस्व प्रकरणों के निपटारे में सुस्ती, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य प्रबंधन में कमजोरी और स्कूल प्रवेश के लक्ष्यों का अधूरा होना जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
- इंदौर: यहाँ भी राजस्व प्रकरणों के निराकरण की गति काफी धीमी है।
- भिंड: राजस्व प्रकरणों के निपटारे में देरी के साथ-साथ यहाँ लोक सेवा गारंटी अधिनियम की समय-सीमा का सबसे अधिक उल्लंघन पाया गया है।
- खंडवा: यहाँ राजस्व विभाग के कार्यों और प्रकरणों के निपटारे में शिथिलता देखी गई है।
- सिंगरौली: यहाँ गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य प्रबंधन की स्थिति चिंताजनक है और वनाधिकार दावों के निराकरण की रफ्तार भी बेहद धीमी है।
- शिवपुरी: इस जिले में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के समाधान की स्थिति बहुत खराब पाई गई है।
- अनूपपुर: यहाँ वनाधिकार दावों के निराकरण का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है।
- देवास: यहाँ स्कूल प्रवेश का निर्धारित लक्ष्य अधूरा पाया गया है।
- शहडोल: इस जिले में भी स्कूल प्रवेश की प्रक्रिया लक्ष्य के अनुरूप पूरी नहीं हो सकी है।
- मुरैना: यहाँ भी स्कूल प्रवेश का लक्ष्य प्राप्त करने में विफलता मिली है।

