Bhopal Samachar karmchari bulletin - पदोन्नति विवाद, शिक्षक ट्रांसफर, निलंबन, हाई कोर्ट, पेंशनर्स और पात्रता परीक्षा

Updesh Awasthee
भोपाल, 27 जून 2026:
मध्य प्रदेश में कर्मचारियों का संबंध में पिछले 24 घंटे में कई बड़े अपडेट आए हैं। कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर सरकार के नए फार्मूले पर विवाद की स्थिति बन गई है। स्कूल शिक्षा विभाग की ट्रांसफर पॉलिसी पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। सस्पेंड किए गए कर्मचारी अधिकारी अब डायरेक्ट हाई कोर्ट नहीं जा सकेंगे। शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर भी चिंता की स्थिति है और रिटायर्ड कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन का ऐलान कर दिया है।

MP Lok Seva Padonnati Niyam 2025 Latest News and Employee Union Protest

मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने पदोन्नति नियमों के तहत 'एक्स' और 'वाय' (X and Y) के निर्धारण के लिए 29 जून को 19 विभागों की बैठक बुलाई है, जिस पर कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ और सपाक्स (SAPAKS) का कहना है कि जब पदोन्नति नियम 2025 का मामला अभी हाई कोर्ट में लंबित है और अंतिम निर्णय नहीं आया है, तब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना न्यायालय की भावना के विपरीत है। कर्मचारी नेताओं के अनुसार, यदि 'एक्स' और 'वाय' का मूल्य शून्य रखा जाता है तो पदोन्नति में आरक्षण खत्म हो जाएगा, और यदि इसे 0 और 1 के बीच रखा गया तो आरक्षण का प्रतिशत निर्धारित 36% से कम हो जाएगा, जिससे सामान्य और पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों को नुकसान होने की आशंका है। 

Madhya Pradesh Teacher Transfer Policy 2026 Online Application Status and High Court Caveat

स्कूल शिक्षा विभाग की स्वैच्छिक स्थानांतरण (Voluntary Transfer) प्रक्रिया की अंतिम तिथि समाप्त हो गई है, जिसमें प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों में से केवल साढ़े 11 हजार शिक्षकों ने ही आवेदन किया है। नई स्थानांतरण नीति के कड़े प्रावधानों और 90% से कम ई-अटेंडेंस (E-attendance) जैसी अनिवार्य शर्तों के कारण आवेदनों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम रही है। विभाग को आशंका है कि शिक्षक इन नियमों और तबादला आदेशों को न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं, इसलिए विभाग ने पहले ही हाई कोर्ट में कैविएट (Caveat) दायर कर दी है ताकि बिना विभाग का पक्ष सुने कोई स्थगन आदेश (Stay) जारी न हो सके। तबादला आदेश 28 से 30 जून के बीच जारी होने की संभावना है।

NCERT Class 9 New Social Science Textbook SIIR Chapter and CBSE 12th Revised Results

शैक्षिक सुधारों के तहत NCERT की 9वीं कक्षा की नई पाठ्यपुस्तक में अब एसआईआर (SIIR - Socially Important and Relevant) शीर्षक वाला खंड पढ़ाया जाएगा, जिसमें न्यायपालिका को नागरिक अधिकारों का रक्षक बताया गया है। इसी पुस्तक में 'मनुस्मृति' (Manusmriti) के एक श्लोक का भी उल्लेख किया गया है, जो महिलाओं के सम्मान से संबंधित है। दूसरी ओर, CBSE द्वारा पुनर्मूल्यांकन के बाद संशोधित परिणाम जारी किए जाने के बावजूद हजारों विद्यार्थी अभी भी अपने नतीजों का इंतज़ार कर रहे हैं, जिससे कॉलेजों में उनके प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, CBSE ने स्कूलों में त्रि-भाषा नीति (Three-language policy) के तहत कक्षा 6 से 8 तक तीन भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता के बीच फिलहाल राहत देते हुए दो विदेशी भाषाओं के विकल्प को जारी रखने की अनुमति दी है। 

MP Government School Infrastructure Problems and Singrauli DEO Ban on Media Inspections

प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जबलपुर के पीएमश्री स्कूल सालीवाड़ा में पुराने जर्जर पंचायत भवन के टुकड़े गिर रहे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। वहीं, सीहोर के सांदीपनि स्कूल के छात्र 1953 के पुराने भवन में पढ़ने को मजबूर हैं और एप्रोच रोड न होने के कारण नए भवन का हैंडओवर नहीं हो सका है। इसी तरह दतिया के भांडेर में भी सीएम राइज स्कूल का भवन एक साल की देरी के बाद भी अधूरा है। इस बीच, जिला शिक्षा अधिकारी सिंगरौली ने एक विवादित आदेश जारी कर बिना अनुमति के पत्रकारों और सामान्य जन द्वारा विद्यालयों के निरीक्षण पर रोक लगा दी है, जिसे लेकर नाराजगी देखी जा रही है। 

प्रोग्रेसिव पेंशनर्स एसोसिएशन ने अपनी 9 सूत्री मांगों को लेकर 30 जून को प्रदेश व्यापी आंदोलन और रैली निकालने का निर्णय लिया है। 

MP High Court Latest Decisions on Suspension 

निलंबन पर अपील अनिवार्य: ग्वालियर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी (जैसे पीएचई के सहायक यंत्री संजीव कुमार गुप्ता) को निलंबित किया जाता है, तो सीधे कोर्ट आने के बजाय पहले विभाग में वैधानिक अपील करनी चाहिए।

MP High Court Latest Decisions on Marksheet Correction

अंकसूची में जन्मतिथि सुधार: कोर्ट ने एक अन्य मामले में निर्देश दिया है कि यदि रिकॉर्ड सही है तो केवल समय-सीमा (3 साल) का हवाला देकर जन्मतिथि सुधारने के आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता। 

Teacher Eligibility Test Syllabus Update 

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का डर: शिक्षकों में आगामी पात्रता परीक्षा को लेकर डर है क्योंकि अभी तक इसका सिलेबस जारी नहीं हुआ है। नियम के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवा के 5 वर्ष से अधिक बचे हैं, उन्हें 2028 तक यह परीक्षा पास करनी होगी, अन्यथा अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।

Damoh Teacher Suspension 

समय पर स्कूल न आने और ई-अटेंडेंस न लगाने के कारण दमोह की प्रधान अध्यापक प्रियंका बड़गैया को निलंबित कर दिया गया है। 

शिक्षकों के तबादलों में सांसद-विधायकों की अनुशंसाएं दरकिनार 

इंदौर संभाग में एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है जहाँ सांसदों और विधायकों द्वारा की गई 47 शिक्षकों के तबादले की अनुशंसाओं में से एक पर भी अमल नहीं हुआ है। विभाग ने इनमें से 17 नामों को उचित मानकर भोपाल जानकारी भेजी थी, लेकिन शासन स्तर से एक भी आदेश जारी नहीं किया जा सका, जिससे स्थानीय जनप्रतिनिधियों में नाराजगी देखी जा रही है। 

पदोन्नति नियमों पर संगठनों का 'तीसरा विकल्प' 

पदोन्नति विवाद (X और Y फैक्टर) में सपाक्स (SAPAKS) ने एक नया सुझाव दिया है जिस पर सरकार ने अभी विचार नहीं किया है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों को उसी श्रेणी में पदोन्नत माना जाए, जिस श्रेणी से उनकी नियुक्ति हुई थी। उनके अनुसार, इस विकल्प से विवाद काफी हद तक समाप्त हो सकता है। इसके साथ ही, मंत्रालय सेवा संघ ने आरोप लगाया है कि यदि 'X' और 'Y' का मान 0 और 1 के बीच रखा गया तो आरक्षित वर्ग को आरक्षित पदों के साथ-साथ अनारक्षित पदों पर भी पदोन्नत किया जाएगा, जिससे सामान्य वर्ग को दीर्घकालिक नुकसान होगा। 

प्रशासनिक फेरबदल और प्रभारी अधिकारियों का दबदबा 

स्कूल शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव हुए हैं:
प्रदेश के 36 जिलों में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) नियुक्त किए गए हैं।
अकेले भोपाल में ही तीनों प्रमुख पदों (JD, DPC, DEO) पर नए अधिकारियों की पदस्थापना की गई है।
रीवा में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ सहायक संचालकों को हटाकर स्कूलों में प्राचार्य बना दिया गया है।

स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया में तकनीकी खामियां 

शिक्षक संगठनों ने पोर्टल की व्यावहारिक विसंगतियों पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कई पात्र शिक्षकों को पोर्टल पर 'अपात्र' (Ineligible) दिखाया गया और कई स्थानों पर रिक्त पदों की जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके अतिरिक्त, जनगणना ड्यूटी और निर्वाचन कार्यों में लगे हजारों शिक्षक आवेदन ही नहीं कर पाए।

पेंशनर्स की 9-सूत्रीय विशेष मांगें 

प्रोग्रेसिव पेंशनर्स एसोसिएशन के आंदोलन में कुछ विशिष्ट मांगें शामिल हैं जो पिछली रिपोर्ट में संक्षिप्त थीं:
धारा-49 की समाप्ति: मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ राज्य पुनर्गठन की धारा-49 को समाप्त करने की मांग ताकि पेंशन लाभ सुलभ हों।
पेंशन वृद्धि: 65, 70, 75 और 80 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर 5-5 प्रतिशत की अतिरिक्त पेंशन वृद्धि।
पुरानी पेंशन का लाभ: 31 दिसंबर 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन के दायरे में लाना।

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