भोपाल, 12 जून 2026: बुंदेलखंड में एक कहावत है "कोढ़ में खाज" हो जाना। मतलब एक बीमारी पहले से ही थी, उसका इलाज तो नहीं हो पाया और दूसरी ऐसी बीमारी हो गई जो पहली को ठीक नहीं होने देगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। मीनाक्षी नटराजन के मामले में विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कांग्रेस को हर जगह रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के विधायक राष्ट्रपति भवन पहुंचे लेकिन राष्ट्रपति ने मिलने से इनकार कर दिया, और हर फेल्योर के पीछे कांग्रेस की ही एक गलती सामने आ रही है। इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस पार्टी ने मुख्य रूप से पांच बड़ी गलतियां की है।
Five Major Mistakes in the Meenakshi Natarajan Episode
नंबर 1 - राज्यसभा के लिए मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी घोषित किया लेकिन उनके साथ कोई डमी कैंडिडेट घोषित नहीं किया। यदि डमी कैंडिडेट घोषित करते तो आज वह राज्यसभा का चुनाव लड़ रहा होता और कांग्रेस को संविधान की किताब उठाकर सड़क पर नहीं उतरना पड़ता।
नंबर 2 - निर्वाचन का नियम है कि सभी आपराधिक मामलों की जानकारी नामांकन फार्म में होनी चाहिए। तो फिर तेलंगाना वाले मामले की जानकारी देने में क्या परेशानी थी। मामला पुलिस थाने में दर्ज हुआ हो या नहीं, न्यायालय में तो प्रचलन में है। एक जानकारी दर्ज कर देते तो बुराई क्या थी।
नंबर 3 - रिटर्निंग ऑफिसर ने जब प्रत्याशी से पूछताछ की तो प्रत्याशी ने कोई विरोध नहीं किया। बाद में पार्टी के नेताओं ने हंगामा किया। इसका क्या मतलब है। जहां प्रत्याशी को दृढ़ता के साथ खड़ा होना चाहिए था, वहां प्रत्याशी अपनी गलती मान कर लौट आई।
नंबर 4 - कांग्रेस पार्टी के वकील, सुप्रीम कोर्ट को यह समझाने में असफल साबित हुए कि मामला तत्काल सुनवाई के योग्य है। जो लोग नहीं जानते उन्हें बताना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट में प्रत्येक 10 में से तीन याचिकाएं ऐसी होती है जिनमें तत्काल सुनवाई का निवेदन होता है। कोई भी यह नहीं कहता कि मेरी सुनवाई आराम से कर लेना।
दूसरी बात, सुप्रीम कोर्ट इस प्रकार के मामले की सुनवाई तभी कर सकता है जब हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटिशन फाइल किया गया हो और कोई भी पार्टी हाई कोर्ट के डिसीजन से संतुष्ट न हो। इस मामले में कांग्रेस, हाई कोर्ट को बाईपास करते हुए, सीधे सुप्रीम कोर्ट चली गई।
नंबर 5 - कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने मीडिया में 2 दिन तक लगातार बयान दिए कि कांग्रेस के विधायक राष्ट्रपति के सामने परेड करेंगे लेकिन राष्ट्रपति महोदय के कार्यालय को इसकी सूचना ही नहीं दी। मतलब राष्ट्रपति भवन ऐसे पहुंच गए जैसे पार्क में घूमने गए हों। स्वाभाविक है, बिना अनुमति के जाओगे तो दरवाजे से वापस कर दिया जाएगा। वही हुआ।
कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है। AICC की जिम्मेदारी थी कि वह मध्य प्रदेश के विधायकों को राष्ट्रपति महोदय से मिलने का समय दिलवाएं। यदि श्री राहुल गांधी और श्रीमती प्रियंका वाड्रा स्वयं राष्ट्रपति महोदय से मिलने जाते और इसके लिए अनुरोध करते तो पूरी संभावना थी कि मध्य प्रदेश के विधायकों को परेड करने का मौका मिल जाता। यदि भाई बहन के पास समय नहीं था तो श्री मल्लिकार्जुन खड़गे को जाना चाहिए था। राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते यह उनकी जिम्मेदारी भी थी, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में ऐसा कुछ भी नहीं किया गया।
मध्य प्रदेश कांग्रेस की कोढ़ में खाज
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस पार्टी, बिना दूल्हे की बारात नजर आई। कैंडिडेट मीनाक्षी नटराजन ने कोई ऐसा स्टैंड नहीं लिया। ना तो रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ कोई धरना दिया और ना ही स्वयं अपनी फाइल उठाकर सुप्रीम कोर्ट या राष्ट्रपति के दरवाजे पर खड़ी हुई। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और अन्य नेताओं ने जमकर प्रदर्शन किया, लेकिन वह सब कुछ मीडिया अटेंशन के लिए था। जनता को पता है कि यदि फॉर्म गलत भरते हैं तो रिजेक्ट हो जाता है। इसमें अन्याय जैसा कुछ भी नहीं है। कोढ़ में खाज इसलिए हुई क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम का लाभ तो कुछ भी नहीं हुआ उल्टा दिग्विजय सिंह और मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी श्री हरीश चौधरी का विवाद कमरे में कैद हो गया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

