भोपाल, 10 जून 2026: कांग्रेस कैंडिडेट मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि, इस मामले की जानकारी हमें कांग्रेस के लोगों से मिली। उल्लेखनीय है कि इस बयान से पहले ही सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल होने लगा था। इसमें श्री विजयवर्गीय, कांग्रेस के युवा नेताओं के साथ दिखाई दे रहे हैं।
MP Politics: Kailash Vijayvargiya Makes Big Claim in Meenakshi Row, Photo Goes Viral on Social Media
एक तरफ कांग्रेस पार्टी, मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त किए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है वहीं दूसरी तरफ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- ‘जिस आधार पर हमने आपत्ति लगाई, उसके दस्तावेज हमें किसने दिए? हमारे पास कहां से आए? कांग्रेस की स्थिति आप समझ सकते हैं। हमें कांग्रेस के लोगों ने ही जानकारी दी है।’ अब विजयवर्गीय के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है कि कहीं कांग्रेस के साथ 'घर का भेदी लंका ढाए' वाला मामला तो नहीं हो गया?
कैलाश विजयवर्गीय की बात में कितना दाम है
राज्यसभा की जिस सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी घोषित किया गया, इस सीट के लिए कांग्रेस पार्टी में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा की स्थिति थी। श्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा था और वह फिर से राज्यसभा में जाना चाहते थे। श्री कमलनाथ अब केवल एक विधायक हैं, इसके कारण उनका सरकारी सिस्टम में महत्व नहीं मिल पा रहा है। इसलिए वह भी इस सीट से राज्यसभा में जाना चाहते थे।
दिग्विजय सिंह: मैं नहीं तो कोई नहीं
श्री दिग्विजय सिंह के बारे में कहा जाता है कि "मैं नहीं तो कोई नहीं" वाला खेल बड़े मजे से खेलते हैं। जब कांग्रेस पार्टी में श्री दिग्विजय सिंह का विरोध हुआ और स्पष्ट हो गया कि उनको राज्यसभा का प्रत्याशी घोषित नहीं किया जाएगा, तो संभव है कि श्री दिग्विजय सिंह ने अपनी चाणक्य बुद्धि का प्रयोग कर लिया हो। सोशल मीडिया पर यह भी कहा गया था कि तेलंगाना से श्री दिग्विजय सिंह के पास एक फोन आया था। इसके बाद तेजी से घटनाक्रम बदला।
मीनाक्षी नटराजन की जीत कमलनाथ के लिए हार होती
श्री कमलनाथ ने गांधी परिवार के सामने दावा किया था कि यदि उनके अलावा किसी और कोई सीट से कैंडिडेट बनाया गया तो वह कांग्रेस पार्टी के विधायकों को मैनेज नहीं कर पाएगा और क्रॉस वोटिंग हो जाएगी। यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकल जाएगी। इसके बावजूद गांधी परिवार ने श्री कमलनाथ को प्रत्याशी घोषित नहीं किया। ऐसी स्थिति में यदि मीनाक्षी नटराजन चुनाव जीत जाती तो यह श्री कमलनाथ के दावे की हार होती। यह तो सभी जानते हैं कि, कमलनाथ की टीम में दिग्गज वकील मौजूद है।
मीनाक्षी नहीं जीतू पटवारी की जीत होती
एक एंगल यह भी है कि यदि मीनाक्षी नटराजन जीत जाती तो यह जीत मीनाक्षी नटराजन कि नहीं बल्कि जीतू पटवारी की जीत मानी जाती। ऐसी स्थिति में जीतू पटवारी का कद कांग्रेस पार्टी में बढ़ जाता। पार्टी में जीतू पटवारी के विरोधियों की संख्या पहले से ही बहुत अधिक है। जीतू पटवारी को सीएम कैंडिडेट बनने से रोकने के लिए राज्यसभा के चुनाव में पराजित करना जरूरी था। इस घटनाक्रम से यह साबित किया गया है कि, जीतू पटवारी में नेतृत्व की क्षमता नहीं है। वह एक नामांकन फार्म तक नहीं भरवा पाए।

.webp)