भोपाल, 21 मई 2026: भाजपा विधायक श्री चिंतामणि मालवीय और पंचायत मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल के बीच में क्या कोई निजी और व्यक्तिगत रिश्ता भी है। सवाल इसलिए उठा है क्योंकि उज्जैन के पार्षद और कांग्रेस नेता श्री राजेंद्र कुवाल द्वारा महाकाल जमीन घोटाले के बारे में मीडिया के सामने बयान देने के बाद श्री चिंतामणि मालवीय ने श्री प्रहलाद सिंह पटेल से मुलाकात की। इस दौरान श्री इकबाल सिंह गांधी उनके साथ थे जो मामले में सह-आरोपी हैं।
MP Politics: Is There a Prahlad Singh Connection to Mahakal Land Scam Accused MLA Chintamani?
20 मई को भाजपा विधायक श्री चिंतामणि मालवीय पर उज्जैन में कांग्रेस पार्टी के पार्षद द्वारा आरोप लगाया गया था और आज 21 मई श्री चिंतामणि मालवीय, इकबाल सिंह गांधी के साथ, पंचायत मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल के बंगले पर थे। श्री मालवीय रतलाम जिले की आलोट विधानसभा से विधायक हैं जबकि श्री प्रहलाद सिंह पटेल नरसिंहपुर से विधायक हैं। दोनों विधानसभाओं के बीच में कोई कनेक्शन नहीं बनता है। सड़क मार्ग से जाएंगे तो 14 घंटे लगते हैं। श्री मालवीय और श्री पटेल, किसी एक जाति समुदाय के भी नहीं है। यदि बात संगठन की करते हैं तो कायदे से श्री मालवीय को प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल के पास जाना चाहिए था। यदि सरकार की बात करते हैं तो मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पास जाना चाहिए था। फिर क्या कारण है कि वह सब को छोड़कर श्री प्रहलाद पटेल के बंगले पहुंचे।
दूसरा बड़ा सवाल यह भी है कि, किसी के पास जाने की जरूरत ही क्या है। श्री मालवीय अपने बयान में कह चुके हैं कि उन्होंने जो कुछ भी किया है नियम के अनुसार किया है। यदि बाबा महाकाल की 40000 स्क्वायर फीट जमीन के डॉक्यूमेंट के साथ कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और श्री मालवीय अपने पार्टनर श्री गांधी के साथ, पद का दुरुपयोग किए बिना, नियम के अंतर्गत फाइव स्टार होटल बना रहे हैं तो इसमें बुराई क्या है। लोकायुक्त हो या EOW, कोई भी एजेंसी जांच कर ली क्या फर्क पड़ता है। विधायक श्री चिंतामणि मालवीय पर लगाए गए आरोप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं। जिसमें बताया गया कि सरकारी जमीन को डॉक्यूमेंट में गड़बड़ी करके प्राइवेट बनाया और कमर्शियल जमीन को डॉक्यूमेंट में गड़बड़ी करके खेती की जमीन बनाया। इस प्रकार डबल घोटाला हुआ है।
वैसे एक सवाल तो यह भी बनता है कि, यदि श्री प्रहलाद सिंह पटेल का इस मामले में कोई इंटरेस्ट नहीं है तो, मीडिया हेडलाइंस बन जाने के तुरंत बाद गांधी के साथ आए श्री मालवीय से मुलाकात ही क्यों की। जबकि सब जानते हैं कि इस मुलाकात मेन मायने निकाले जाएंगे।

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