जबलपुर, 14 मई 2026: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मामले में फाइनल डिबेट शुरू होने ही वाली थी लेकिन युवाओं के एक दल ने हाई वोल्टेज ड्रामा कर डाला। इस बात से नाराज होकर हाईकोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया और गर्मी की छुट्टी के बाद की तारीख लगा दी।
MP OBC Reservation Case Stalled Again, High Court Upset Over High-Voltage Drama
यहां उल्लेख करना होगा कि, युवाओं ने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया लेकिन उनके कारण एक तनाव की स्थिति बन गई थी। इसलिए हाईकोर्ट ने सुनवाई की तारीख निर्धारित करते समय इस घटना का उल्लेख नहीं किया। युवाओं ने अपने अधिकार का उपयोग किया था और हाईकोर्ट ने अपने अधिकार का उपयोग कर लिया।
MP OBC Reservation Case Stuck Again
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर के चीफ जस्टिस श्री संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा आज 14 मई को ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों की 3:30 से 4:30 तक सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई 16 जून 2026 को नियत की गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि खंडपीठ द्वारा उक्त प्रकरणों की सुनवाई 13,14 एवं 15 मई नियत की गई थी, लेकिन कुछ विशेष प्रकरणों की सुनवाई को दृष्टिगत रखते हुए ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों की सुनवाई 15 मई को नहीं होगी।
कमलनाथ सरकार ने विधायक में यह गड़बड़ी कर दी है, इसलिए ओबीसी आरक्षण अटक गया
आज दिनांक 14 MAY 26 को माननीय मुख्य न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा एवं जस्टिस विनय सराफ द्वारा सामान्य वर्ग की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी के तर्क सुने गए, जिन्होंने ओबीसी आरक्षण के निर्धारण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ सहित एम नागराज के प्रकरणों के मार्गदर्शी सिद्धांतों से कोर्ट को अवगत कराया गया कि इंदिरा साहनी में स्पष्ट किया गया है कि अपवादिक स्थिति में कुल आरक्षण की सीमा 50% से अधिक हो सकती है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार (कमलनाथ सरकार) द्वारा 27% आरक्षण का कानून बनाते समय विधेयक में ओबीसी वर्ग की प्रदेश में कुल आबादी 27% का उल्लेख किया गया है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने अपने जवाब में ओबीसी की कुल आबादी 51% का शपथ पत्र दिया है। आरक्षण की 50% सीमा बढ़ाने के लिए "विशेष परिस्थितियों" का उल्लेख मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नहीं किया गया है। ना ही तत्संबंध में कोई उत्तर आदि पेश किए गए हैं। इसलिए ओबीसी का 27% आरक्षण स्थिर रखे जाने योग्य नहीं है।
हाई कोर्ट द्वारा ओबीसी वर्ग के अधिवक्ताओं का निवेदन ना मंजूर
बहस के दौरान ओबीसी वर्ग के अधिवक्ताओं द्वारा कोर्ट से अनुरोध किया गया कि विगत 6 वर्षों से ओबीसी वर्ग तथा सामान्य वर्ग के हजारों अभ्यर्थी के नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, इसलिए इस प्रकरण को ग्रीष्मकालीन अवकाश में विशेष बेंच गठित कर सुनवाई की जाए, चीफ जस्टिस ने उक्त तर्क को बल नहीं दिया तथा उक्त समस्त प्रकरणों की आगामी सुनवाई ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद दिनांक 16. 6.2026 को नियत की गई है।
ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर, शशांक रत्नू, पुष्पेंद्र शाह, राम भजन लोधी, राजमणि सिंगरौल, परमानंद साहू, उदय कुमार साहू, काजल विश्वकर्मा, जीएस उद्दे एवं शिवांशु कोल उपस्थित थे। सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी, आदित्य संगी, अंशुल तिवारी, शासन की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल श्वेता यादव उपस्थित हुए।

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