भोपाल, 14 मई 2026: सैकड़ों गाड़ियों का काफिला निकालकर वायरल होने वाले मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के नव नियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। नोटिस जारी किया गया है। संतोष जनक जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
MP CM Revokes Administrative and Financial Powers of Corporation Chairman Over Convoy Issue
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट्स और डिजिटल सोशल मीडिया माध्यमों से यह जानकारी संज्ञान में आई कि अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करते समय 200 वाहनों की विशाल रैली निकाली गई। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे शासन के दिशा-निर्देशों के प्रतिकूल बताते हुए गंभीर अनुशासनहीनता माना है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार की वाहन रैली न केवल राष्ट्रीय संसाधनों के अपव्यय को दर्शाती है, बल्कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए अपेक्षित सादगी, जवाबदेही और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना के विपरीत भी है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मामले के अंतिम निराकरण तक सौभाग्य सिंह के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह सस्पेंड
मध्य प्रदेश में निगम मंडल अध्यक्ष को सस्पेंड करने का प्रावधान नहीं है लेकिन जिस प्रकार से उनकी सारी शक्तियों को छीन लिया गया है, आम बोलचाल की भाषा में यह समझ लेना उचित होगा कि, श्री सौभाग्य सिंह को मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष पद से सस्पेंड कर दिया गया है। जांच में निर्दोष पाए जाने पर, अथवा क्षमा याचना करने पर, उनकी नियुक्ति बहाल कर दी जाएगी।
सौभाग्य सिंह, पाठ्यपुस्तक निगम के ऑफिस में घुस भी नहीं सकते
जारी आदेश के अनुसार सिंह अब मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के कार्यालय एवं परिसर में प्रवेश, निगम के वाहन, संसाधन एवं कर्मचारियों का उपयोग, निगम की बैठकों में भागीदारी अथवा अध्यक्षता, किसी भी प्रशासनिक एवं वित्तीय निर्णय में सहभागिता तथा कर्मचारियों को निर्देश जारी करने जैसे अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार सार्वजनिक जीवन में सादगी, जवाबदेही और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है तथा शासन की गरिमा के विरुद्ध किसी भी प्रकार के आचरण को गंभीरता से लिया जाएगा।

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