प्राइवेट स्कूलों के मामले में शिक्षा मंत्रालय का यू-टर्न, पेरेंट्स की भागीदारी का आदेश निरस्त

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 22 मई 2026:
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने प्राइवेट स्कूलों के मामले में यू टर्न ले लिया है। 6 तारीख को जारी किया गया आदेश 20 तारीख को वापस ले लिया गया। एक बार फिर प्राइवेट स्कूल के संचालकों को पहले की तरह मनमानी और तानाशाही का लाइसेंस दे दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया से एक नई प्रॉब्लम हो गई। प्राइवेट स्कूल संचालकों का कॉन्फिडेंस और अधिक बढ़ जाएगा, क्योंकि अब तो भारत सरकार भी उनसे नियमों का पालन नहीं करवा पाई। 

मामला विद्यालय प्रबंधन समिति का

दिनांक 6 मई को भारत सरकार की शिक्षा मंत्रालय द्वारा विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) दिशानिर्देश 2026 जारी किए थे। इसके तहत आदेशित किया गया था कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 21 के अंतर्गत सभी प्रकार के स्कूलों को विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन करना होगा। इस समिति में कम से कम 3/4 सदस्य माता-पिता/अभिभावक होने चाहिए, कमजोर वर्ग (weaker section) और वंचित वर्ग (disadvantaged group) के माता-पिता/अभिभावकों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व होना चाहिए और 50% सदस्य महिलाएं होनी चाहिए। 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 21(2) के अनुसार विद्यालय प्रबंधन समिति को नीचे दिए गए काम करने होते हैं:-
स्कूल के कामकाज की निगरानी (monitor the working of the school)।
स्कूल डेवलपमेंट प्लान (SDP) तैयार करना और सिफारिश करना।
सरकारी अनुदान या अन्य स्रोतों से मिले फंड का उपयोग निगरानी करना।
अन्य निर्धारित कार्य।

Education Ministry Takes U-Turn on Private Schools, Order on Parents’ Participation Cancelled

अब शिक्षा मंत्रालय की तरफ से एक अपडेट आया है जिसमें बताया गया है कि, शिक्षा मंत्रालय को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 21 के संदर्भ में विभिन्न प्रकार से प्रबंधित विद्यालयों पर दिशानिर्देशों की प्रयोज्यता से संबंधित समाज के कुछ वर्गों से अभ्यावेदन और चिंताएं प्राप्त हुई हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए और विचार-विमर्श के बाद, मंत्रालय ने 20 मई 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संबोधित एक पत्र द्वारा स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 2(एन)(iv) में उल्लिखित विद्यालय इन दिशानिर्देशों के अंतर्गत नहीं आएंगे, बशर्ते कि वे संचालन संबंधी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार या स्थानीय प्राधिकरण से किसी प्रकार की सहायता न लेते हों।

शिक्षा मंत्रालय अपने फैसले पर 15 दिन भी नहीं टिक पाया

भारत की सरकारी भाषा इतनी जटिल होती है कि उसको समझने के लिए अलग से एक सत्र का आयोजन करना पड़ता है। शिक्षा मंत्रालय के अपडेट का मतलब है कि, यदि कोई स्कूल सरकारी नहीं है अथवा सरकार से किसी प्रकार की सहायता नहीं ले रहा है तो उसको विद्यालय प्रबंधन समिति के गठन करने की जरूरत नहीं है। 
  • मतलब प्राइवेट स्कूलों को विद्यालय प्रबंधन समिति के गठन की जरूरत नहीं है। 
  • मतलब प्राइवेट स्कूलों पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 21 को प्रभाव शून्य कर दिया गया है। 
  • मतलब प्राइवेट स्कूलों को पहले की तरह मनमानी और तानाशाही करने की छूट दे दी गई है। 
मतलब लोगों ने प्राइवेट स्कूलों को सरकारी नियम के माध्यम से स्कूल के संचालन और विकास में योगदान देने वाले अभिभावकों के माध्यम से संचालित करने के लिए जो संघर्ष किया था, 6 तारीख का आदेश जिस संघर्ष की जीत की गवाही था। 20 तारीख की चिट्ठी से सब कुछ खत्म कर दिया गया है।

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