भोपाल, 17 मई 2026: स्वयं को कट्टर सनातनी बताने वाले कांग्रेस नेता श्री दिग्विजय सिंह ना तो सनातन श्रद्धालुओं के हित की बात करते हैं और ना ही हाई कोर्ट का फैसला स्वीकार करते हैं। बखेड़ा खड़ा करने के लिए उनके पास अपनी दलील है। शायद श्री दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि जब धार भोजशाला में नमाज नहीं हो सकती तो फिर पूजा भी नहीं होनी चाहिए।
Dhar Bhojshala Controversy: Digvijaya Singh Backs ‘No Namaz, No Puja’ Formula
श्री दिग्विजय सिंह जानते हैं कि हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल नहीं उठाते बल्कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हैं, फिर भी उन्होंने भोजशाला मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) को 'इस जगह पर मंदिर का कोई सबूत नहीं मिला।' श्री दिग्विजय सिंह ने शनिवार को इंदौर में कहा कि ASI संरक्षित यह स्मारक ‘पूजा स्थल नहीं है।’ हाईकोर्ट का आदेश अस्पष्ट था। उन्होंने कहा कि यह स्मारक ASI के तहत संरक्षित है। ASI के नियमों के तहत, कानूनी तौर पर पूजा-पाठ का कोई प्रावधान नहीं है।
दरअसल, हाईकोर्ट ने 15 मई को भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना। हाई कोर्ट के फैसले का आधार क्या है और क्यों हाई कोर्ट ने ASI के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें मुस्लिम समाज को नमाज की अनुमति दी गई थी। हाई कोर्ट के ऑर्डर पर आधारित न्यूज़ यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं। धार भोजशाला विवाद से संबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं। निश्चित रूप से श्री दिग्विजय सिंह भी पढ़ चुके होंगे लेकिन फिर भी बखेड़ा खड़ा कर रहे हैं। मजे की बात देखिए, 7 अप्रैल 2003 को जब धार भोजशाला में नमाज के आदेश दिए गए थे, तब श्री दिग्विजय सिंह स्वयं मुख्यमंत्री थे। तब उन्होंने बिल्कुल नहीं कहा - ASI के नियमों के तहत, कानूनी तौर पर पूजा-पाठ का कोई प्रावधान नहीं है। अब जबकि नमाज बंद करके पूजा पाठ का आदेश हो गया है तो घोर सनातनी श्री दिग्विजय सिंह को ASI का नियम ध्यान आ गया।
वैसे जब कानून की बात चल रही है तो, एक विधि सलाहकार होने के नाते यह भी बताते चलें कि, ASI अथवा किसी भी संस्था द्वारा बनाए गए नियम, कानून नहीं होता। हाई कोर्ट कभी भी ऐसे नियम को शिथिल और निरस्त कर सकता है। सामान्य तौर पर हाईकोर्ट में सरकारों की इसी प्रकार के नियमों के खिलाफ याचिकाएं प्रस्तुत होती हैं। धार भोजशाला मामले में भी हाईकोर्ट ने ASI के उसी आदेश को निरस्त किया है, जिसको श्री दिग्विजय सिंह "कानून" और "प्रावधान" जैसे शब्दों का उपयोग करके मुस्लिम समाज का पक्ष लेने का अभिनय कर रहे हैं।

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