भोपाल एयरपोर्ट पर गरम मसाले को नशीला पदार्थ बता व्यापारी को गिरफ्तार कर लिया, 57 दिन जेल में रहा

Updesh Awasthee
जबलपुर, 20 मई 2026:
भोपाल एयरपोर्ट के सिक्योरिटी सिस्टम पर कलंक लग गया है। सिक्योरिटी सिस्टम की निष्पक्षता और तकनीकी क्षमता पर सवाल उठ गया है, क्योंकि सिक्योरिटी चेकिंग के दौरान भोपाल एयरपोर्ट पर एक व्यापारी को गिरफ्तार कर लिया गया। दावा किया गया कि उसके बैग में कुछ पैकेट मिले हैं जिसमें नशीला पदार्थ है। हैदराबाद लैब की जांच में पाया गया कि वह गरम मसाला है। हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश में पीड़ित व्यापारी को 10 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। 

घटना का विवरण: A Stain on Bhopal Airport's Security System

यह मामला 7 मई 2010 का है, जब व्यवसायी अजय सिंह भोपाल से दिल्ली होते हुए मलेशिया जा रहे थे। भोपाल हवाई अड्डे पर नियमित सुरक्षा जांच के दौरान, उनके पास मौजूद ब्रांडेड अमचूर और गरम मसाला के पैकेटों को एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर (ETD) मशीन से स्कैन किया गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि मशीन ने इन पैकेटों में 1-4% हेरोइन और 10% MDEA (एक नशीला पदार्थ) होने का संकेत दिया। इसके आधार पर CISF ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया और उन पर NDPS अधिनियम की धारा 8/21 के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया।

मशीन और जांच प्रणाली की विफलता

याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि कनाडा निर्मित यह ETD मशीन भारतीय परिस्थितियों और सुगंधित मसालों के लिए कैलिब्रेटेड (Calibrated) नहीं थी। अदालत ने भी माना कि:
  • ETD मशीन के नतीजे केवल "संकेतात्मक" (Indicative) होते हैं, निर्णायक नहीं।
  • मशीन में 'फाल्स अलार्म' (गलत संकेत) की दर लगभग 2% हो सकती है।
  • बाद में अन्य ब्रांड के मसालों के परीक्षण में भी इस मशीन ने 'ड्रग्स' होने का गलत संकेत दिया था।

57 दिनों का 'काला वनवास' और फॉरेंसिक सुस्ती

अजय सिंह की लंबी हिरासत का मुख्य कारण मध्य प्रदेश का दोषपूर्ण फॉरेंसिक ढांचा रहा।
RFSL भोपाल: क्षेत्रीय प्रयोगशाला ने 10 दिनों बाद नमूने वापस कर दिए क्योंकि उनके पास MDEA की जांच की सुविधा ही नहीं थी। अदालत ने पुलिस की मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट को भी इस मामले में "बेकार" (useless) पाया।
अंततः नमूनों को CFSL हैदराबाद भेजा गया, जहाँ की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि पैकेटों में कोई प्रतिबंधित पदार्थ नहीं था। जब तक सच्चाई सामने आई, अजय सिंह 57 दिन जेल की सलाखों के पीछे गुजार चुके थे।

अदालत की सख्त टिप्पणी और निर्देश

न्यायमूर्ति दीपक खोट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य की सुस्ती और मानक प्रयोगशालाओं की कमी के कारण एक नागरिक को बिना किसी गलती के जेल भुगतनी पड़ी। अदालत ने अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के उल्लंघन को गंभीर माना।

मुख्य निर्णय:
राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि वह अजय सिंह को ₹10 लाख का मुआवजा भुगतान करें। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक कर्तव्य निभाने में विफलता के लिए राज्य 'प्रतिकारात्मक रूप से उत्तरदायी' (Vicariously Liable) है। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे एक महीने के भीतर सभी क्षेत्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं (RFSL) का निरीक्षण करें और उन्हें आधुनिक उपकरणों व योग्य विशेषज्ञों से लैस करें।

यह फैसला उन सभी एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है जो केवल तकनीकी संकेतों के आधार पर बिना पुख्ता जांच के नागरिकों की स्वतंत्रता का हनन करती हैं।
रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी,  स्रोत: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय आदेश (WP-17529-2011)

Key Highlights

Case Name: Ajay Singh v. State of Madhya Pradesh & Ors. (Writ Petition No. 17529 of 2011).
Judge: Justice Deepak Khot.
Core Issue: Illegal Incarceration due to faulty Explosive Trace Detector (ETD) machines and forensic infrastructure failure.
Legal Doctrine: Violation of Article 21 (Right to Life and Liberty) and Vicarious Liability of the State.

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