धर्म और ज्योतिष न्यूज डेस्क, 11 मई 2026: दुनिया भर में नेगेटिव एनर्जी तेजी से बढ़ रही है। उत्तर भारत में प्रचलित समस्त पंचांग में स्पष्ट उल्लेख मिलता है की अपरा एकादशी का व्रत करने से डिप्रेशन सहित सभी प्रकार की नेगेटिव एनर्जी नष्ट हो जाती है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस तिथि को अचला एकादशी, भद्रकाली एकादशी एवं एकादशी भी कहते हैं। साल 2026 में दिनांक 13 मई को अप्रैल एकादशी का व्रत करने का अवसर है।
अपरा एकादशी व्रत की संपूर्ण पूजा विधि (2026)
अपरा एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करने से पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है। शास्त्रों में यह उल्लेख भी है की अपरा एकादशी का व्रत करने वाले को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य मिलता है और पापों से मुक्ति मिल जाती है।
अपरा एकादशी के व्रत हेतु पूजा सामग्री
- पीला वस्त्र
- तुलसी दल
- पीले फूल
- धूप, दीप
- चंदन
- रोली, अक्षत
- पंचामृत
- मौसमी फल
- नारियल
- गंगाजल
- केले
- भोग के लिए मिठाई या माखन-मिश्री
विशेष
- भगवान विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप की पूजा करें।
- व्रत कथा का पाठ स्वयं करें या योग्य ब्राह्मण के माध्यम से श्रवण करें।
- तुलसी पूजन अवश्य करें।
- मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें और सात्विक विचार बनाए रखें।
भगवान श्री हरि विष्णु के त्रिविक्रम स्वरूप का चित्र
1. व्रत से एक दिन पहले क्या करें (दशमी तिथि 12 मई 2026)
एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही नियम शुरू कर दिए जाते हैं।
- शाम को सात्विक भोजन करें।
- चावल, मसूर, मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज आदि का त्याग करें।
- क्रोध, झूठ और विवाद से दूर रहेंगे।
- रात में भगवान श्री हरि विष्णु का स्मरण करते हुए निद्रा में प्रवेश करें।
2. अपरा एकादशी के दिन सुबह की तैयारी
- ब्रह्ममुहूर्त में बिस्तर त्याग दें।
- सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें।
- संभव हो तो स्नान जल में गंगाजल मिलाएं।
- साफ पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
3. पूजा स्थान तैयार करें
- एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर:
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र
- माता लक्ष्मी का चित्र
- जल से भरा कलश
- दीपक रखें।
4. व्रत संकल्प
पूर्व दिशा की ओर मुख करके हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प करें:
“मैं (अपना नाम) भगवान श्री विष्णु की कृपा प्राप्ति एवं समस्त पापों के नाश के लिए अपरा एकादशी व्रत का संकल्प करता/करती हूँ।”
संकल्प के बाद अक्षत पुष्प और जल को भूमि पर छोड़ दें।
5. भगवान विष्णु की पूजा विधि
चरण 1: गाय के घी का दीप प्रज्वलित करें।
चरण 2: भगवान का अभिषेक
जल,
पंचामृत,
और गंगाजल से अभिषेक करें।
चरण 3: पूजन
चंदन लगाएं,
अक्षत अर्पित करें,
पीले फूल चढ़ाएं,
तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
चरण 4: भोग लगाएं
माखन-मिश्री,
फल,
पंचामृत,
या सात्विक मिठाई अर्पित करें।
6. मंत्र जाप - विष्णु मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
कम से कम 108 बार जप करें।
विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे
वासुदेवाय धीमहि
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
7. अपरा एकादशी व्रत कथा
एक समय धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा -
“हे माधव! ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है और उसका क्या महत्व है?”
तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा -
“हे राजन्! यह एकादशी ‘अपरा एकादशी’ कहलाती है। इसका व्रत करने से मनुष्य के बड़े-बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत अत्यंत पुण्यदायी और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।”
भगवान श्रीकृष्ण ने आगे बताया कि प्राचीन समय में महिध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था। वह अत्यंत दयालु, सत्यवादी और भगवान विष्णु का भक्त था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज उससे ईर्ष्या करता था क्योंकि प्रजा राजा महिध्वज से बहुत प्रेम करती थी।
ईर्ष्या और द्वेष में अंधे होकर एक दिन वज्रध्वज ने अपने बड़े भाई की हत्या कर दी और उसका शव जंगल में एक पीपल के वृक्ष के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु और अधूरी इच्छाओं के कारण राजा महिध्वज की आत्मा प्रेत योनि में भटकने लगी।
वह प्रेत रात के समय आने-जाने वाले लोगों को परेशान करता था। उसी जंगल से एक दिन धौम्य ऋषि गुजर रहे थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से समझ लिया कि यह आत्मा कौन है और उसे मुक्ति क्यों नहीं मिल रही।
ऋषि ने प्रेत से उसका दुख पूछा। तब महिध्वज की आत्मा ने सारी घटना बताई और मुक्ति का उपाय पूछा।
धौम्य ऋषि ने कहा-
“तुम्हारी मुक्ति अपरा एकादशी के व्रत से संभव है।”
इसके बाद ऋषि ने विधिपूर्वक अपरा एकादशी का व्रत किया और उस व्रत का पुण्य राजा महिध्वज की आत्मा को समर्पित कर दिया।
व्रत के प्रभाव से प्रेत योनि से मुक्त होकर राजा महिध्वज दिव्य शरीर धारण कर विष्णुलोक को प्राप्त हुआ।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा-
“हे राजन्! जो मनुष्य श्रद्धा और नियमपूर्वक अपरा एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं और उसे उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है।”
अपरा एकादशी क्यों व्रत में कथा के उपरांत भगवान विष्णु की आरती (ओम जय जगदीश हरे) करें।
8. दिनभर के नियम
“ॐ नमो नारायण” का स्मरण करते रहें।
अधिक से अधिक भजन-कीर्तन करें।
जरूरतमंद को दान दें।
क्रोध, चुगली और नकारात्मक विचारों से बचें।
संभव हो तो रात्रि जागरण करें।
9. व्रत में क्या खा सकते हैं
यदि निर्जल व्रत संभव न हो तो:
फल,
दूध,
मखाना,
साबूदाना,
सिंघाड़े का आटा,
कुट्टू,
राजगिरा आदि का न्यूनतम उचित मात्रा में सेवन कर सकते हैं।
10. द्वादशी पर पारण विधि
अगले दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें और फिर व्रत खोलें।
पारण से पहले
किसी ब्राह्मण, गौ या गरीब को भोजन/दान देना शुभ माना जाता है।
तुलसी युक्त जल ग्रहण करके व्रत खोलें।
पारण मंत्र
अन्नं ब्रह्म रसो विष्णुः
भोक्ता देवो जनार्दनः।
आशीर्वचन
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से आपके जीवन में कभी अन्न, धन और सम्मान की कमी न हो।
आपके परिवार पर श्रीहरि का दिव्य आशीर्वाद सदैव बना रहे।
“नारायण कृपा से आपके जीवन के सभी संकट दूर हों और धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष - चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति हो।”
अपरा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं।
हरि ॐ तत्सत॥
प्रस्तुति: श्यामला ज्योतिष पीठ, भोपाल।


