मध्य प्रदेश की हेडलाइंस में जंगली भैंसा क्यों है, मुख्यमंत्री को क्या पड़ी थी, सरल और सीधे शब्दों में समझना है तो पढ़िए

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 28 अप्रैल 2026:
मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का दौरा चल रहा है, किसान गेहूं उपार्जन की लाइन में लगे हुए हैं, 8 करोड़ से ज्यादा लोग, 8000 से ज्यादा समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रहे हैं और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जंगली भैंसा की पुनर्स्थापन के लिए भोपाल से बालाघाट जिले के सूपखार तक गए। जंगली भैंसा कोई वोट बैंक तो नहीं है, क्या आप बता सकते हैं कि मुख्यमंत्री को क्या पड़ी थी, उन्होंने इस कार्यक्रम को इतना महत्व क्यों दिया। ट्रोल करना आसान है लेकिन यदि कारण जानना है तो आगे पढ़िए... 

Why ‘Wild Buffalo’ Is Dominating MP Headlines; What Prompted the CM’s Move Explained Simply

कुछ सालों पहले जब मध्य प्रदेश में चीता का पुनर्स्थापन किया गया था। तब भी कुछ बेवकूफ लोगों ने बड़ा मजाक उड़ाया था। जंगली भैंसा को लेकर भी ऐसा ही कुछ किया जा सकता है लेकिन समझने की जरूरत है कि मध्य प्रदेश जैसे राज्य के मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय होना, इतनी हल्की बात भी नहीं है। जंगली भैंसा को 2000 किलोमीटर दूर से लाया गया है। करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं तो इसके पीछे कोई तो कारण होगा। मैं बिल्कुल सरल शब्दों में बताता हूं कि क्या कारण है, जंगली भैंसा मध्य प्रदेश की जनता के लिए क्यों जरूरी है। 

दरअसल, जंगली भैंसा (Wild Water Buffalo या Wild Buffalo), को फॉरेस्ट इकोसिस्टम का इंजीनियर कहा जाता है। यह जंगल में भारी मात्रा में घास चरता है। इसके कारण घास की ऊंचाई नियंत्रित हो जाती है और नई, कोमल घास उगती है, जो छोटे हिरणों और खरगोशों के लिए भोजन का काम करती है। इसका मतलब हुआ कि छोटे हिरण और खरगोशों के जीवन के लिए जंगली भैंसा सबसे जरूरी है। लेकिन बात सिर्फ इतनी सी नहीं है इससे कहीं ज्यादा है। चलिए पॉइंट टू पॉइंट बताता हूं:- 

1. यदि जंगल में जंगली भैंस नहीं होगा तो घास की ऊंचाई बढ़ जाएगी और वह सख्त हो जाएगी। इसे 'अंडरग्रोथ' कहते हैं। इसके कारण छोटे शाकाहारी जानवरों का जीवन खतरे में तो पड़ ही जाएगा लेकिन यदि जंगल में आग लगी तो पूरा जंगल राख हो जाएगा। हरे पेड़ भी कोयला बन जाएंगे। जरा जरा सोचिए और यदि नहीं सोच सकते तो सर्च कीजिए, यदि नेशनल पार्क जैसे जंगल में आग लग गई और पूरा जंगल खत्म हो गया तो उसके आसपास रहने वाले इंसानों की लाइफ का क्या होगा। जंगली भैंस, ऐसी घास को खत्म कर देता है। तब यदि जंगल में आग लगे तो सिर्फ एक छोटे से हिस्से में आज लगकर खत्म हो जाती है। ऐसी आग को कंट्रोल करना आसान होता है। अब समझ में आया? और समझिए:- 

2. जंगली भैंसों को कीचड़ में लेटना (Wallowing) पसंद है। उनके भारी शरीर और इस आदत की वजह से जमीन पर बड़े गड्ढे बन जाते हैं जिनमें बारिश का पानी जमा होता है। ये छोटे गड्ढे गर्मियों में अन्य पक्षियों, सरीसृपों (Reptiles) और छोटे जानवरों के लिए पानी के स्रोत बनते हैं। इसके अलावा जंगल की रेन वाटर हार्वेस्टिंग हो जाती है। इन छोटे-छोटे गड्डों में जो पानी भरता है। इसके कारण जंगल हरा भरा रहता है। हरा भरा जंगल ही भीषण गर्मी और पर्यावरण में मौजूद जहरीली गैसों को खत्म करने का काम करता है। जिसके कारण आपके शहर का ऑक्सीजन लेवल डाउन नहीं होता है और आप बिना डॉक्टर की जीवित रहते हैं। 

यदि जंगल में जंगली भैंस नहीं होगा तो इतने सारे गड्ढे बनाने में सरकार को हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ेंगे, और आप तो जानते ही हो, सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर भी दे तो क्या होगा। केवल एक जंगली भैंस ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो कागजों पर गड्ढे नहीं बनाएगा। 

3. भैंसें एक जगह चरती हैं और दूसरी जगह गोबर करती हैं। इससे मिट्टी को प्राकृतिक खाद मिलती है। साथ ही, कई पौधों के बीज उनके पेट के जरिए या उनके शरीर पर चिपक कर दूर-दूर तक फैलते हैं। यदि जंगली भैंस नहीं होगा तो मिट्टी की उर्वरता यानी फर्टिलिटी काम हो जाएगी और कुछ खास प्रकार की जड़ी बूटियां, या प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पौधे पैदा होना ही बंद हो जाएंगे। फिर आयुर्वेद की किताब में कुछ भी लिखा हो, जब जड़ी बूटी ही नहीं मिलेगी तो किताब क्या कर लेगी। 

4. जंगली भैंसा, बाघ (Tiger) जैसे बड़े शिकारियों के लिए मुख्य भोजन का स्रोत हैं। एक जंगली भैंस का शिकार एक बाघ के कुनबे को कई दिनों तक भोजन दे सकता है। यदि टाइगर भूखा रहा तो छोटे जानवरों का रोज शिकार करेगा और जब छोटे जानवर खत्म हो जाएंगे तो इंसानों का शिकार करने लगेगा। थोड़ा फ्लैशबैक में जाइए, मध्य प्रदेश की जिन नेशनल पार्क में जंगली भैंस नहीं है, क्या वहां के टाइगर छोटे जानवर और इंसानों का शिकार कर रहे हैं? 

तो कुल मिलाकर बात ऐसी है कि, जंगली भैंस के बिना जंगल अपनी जैव-विविधता (Biodiversity) खोने लगता है। वह केवल एक जानवर नहीं है, बल्कि एक पूरी व्यवस्था है जो जंगल को स्वस्थ और संतुलित रखने में मदद करती है। 

आजकल मौसम संबंधी खबरें तो आप पढ़ी ही रहे होंगे। दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों की लिस्ट में भारत के 92 शहरों का नाम आ गया है, लेकिन इसमें से एक भी शहर मध्य प्रदेश का नहीं है। यह सब कुछ इसलिए हुआ क्योंकि मध्य प्रदेश में आज भी घने जंगल मौजूद हैं और सरकार उनकी चिंता कर रही है। 

यह सब तो ठीक है लेकिन मुख्यमंत्री को जाने की क्या जरूरत थी 

अब कोई विद्वान यह भी कह सकता है कि, यह सब तो ठीक है लेकिन मुख्यमंत्री को जाने की क्या जरूरत थी। इस काम के लिए प्रभारी मंत्री, लोकल का विधायक और DFO काफी थे। लेकिन फिर भी मुख्यमंत्री गए क्योंकि, मुख्यमंत्री के जाने के कारण फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ग्राउंड स्टाफ पर एक प्रेशर क्रिएट होता है। वह जंगली भैंसे का ख्याल रखेंगे और चिंता करेंगे कि 100 साल बाद एक बार फिर जंगली भैंसा, न केवल सरवाइव कर जाए बल्कि उसकी संख्या बढ़ती चली जाए। यह केवल किसी एक नेशनल पार्क का मामला नहीं है बल्कि जंगली भैंसे का यह परिवार भविष्य में मध्य प्रदेश के पूरे जंगल को हरा भरा बनाए रखेगा, और जब क्लाइमेट चेंज के कारण पूरी दुनिया आग का गोला बनी होगी, आपका मध्य प्रदेश रहने के लिए सबसे अच्छा स्थान होगा।

अब समझ में आया? मध्य प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को क्या पड़ी थी जो 2000 किलोमीटर दूर से करोड़ों रुपए खर्च करके जंगली भैंसा ले और फिर उनकी पुनर्स्थापना के लिए बालाघाट तक गए। जबकि इसके बदले में एक भी वोट नहीं मिलने वाला।

यहां तक पढ़ लिया तो बात समझ में आ ही गई होगी और यदि आ गई है तो कृपया इस आर्टिकल को सोशल मीडिया पर अधिक से अधिक शेयर कीजिए। ताकि सबको पता चल सके, जंगल मध्य प्रदेश के लिए कितने जरूरी हैं और फॉरेस्ट इकोसिस्टम हमारे अपने जीवन के लिए कितना जरूरी है। 🙏 उपदेश अवस्थी।
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