जबलपुर, 6 अप्रैल 2026: सत्ता का नशा अक्सर लोगों को अहंकारी बना देता है और फिर यदि सत्ता के साथ हजारों करोड़ों की संपत्ति और कारोबार भी हो तो फिर कहना ही क्या। भाजपा विधायक संजय पाठक की कहानी कुछ ऐसी ही है। पावर का नशा ऐसा था कि ठसक में जज को फोन लगा बैठे। फिर जब कोर्ट ने कलम चलाई, तो विधायक महोदय माफी मांगते हुए नजर आए।
भाजपा विधायक संजय पाठक के अवैध खनन मामले में हाईकोर्ट जस्टिस को फोन लगाने के आपराधिक अवमानना मामले में चीफ जस्टिस की कोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है। सोमवार को इस मामले में सुनवाई हुई और अदालत ने संजय पाठक को तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि 21 अप्रैल को विधायक संजय पाठक हाजिर होकर जवाब देंगे। हालांकि, संजय पाठक ने फोन लगाने को लेकर लिखित में मांफी मांगते हुए कहा है कि जस्टिस विशाल मिश्रा को गलती से कॉल लग गया था। (विधायक महोदय शायद अभी भी नहीं समझ पा रहे हैं कि यह विधानसभा नहीं हाईकोर्ट है। यदि गलती से फोन लग गया है तो गलती का आभास होते ही क्षमा मांग कर डिस्कनेक्ट कर देना चाहिए था। आप यदि किसी पार्टिकुलर मैटर पर बात करेंगे तो, उसकी गलती से कॉल लगा कैसे कह सकते हैं।) अब इस मामले में 21 अप्रैल को सुनवाई होगी, जिसमें कि सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी संजय पाठक की और से कोर्ट में पैरवी करेंगे।
1 सितंबर को जस्टिस विशाल मिश्रा से की बात
संजय पाठक परिवार से जुड़ी खदानों की सुनवाई जस्टिस मिश्रा की अदालत में लंबित थी। 1 सितंबर 2025 को एमपी हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा ने ऑर्डर में लिखा था कि- बीजेपी विधायक संजय पाठक ने मुझे एक पर्टिकुलर मैटर (पाठक परिवार की खनन कंपनियों) पर चर्चा करने की कोशिश की है, इसलिए मैं इस रिट याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं हूं।
हाईकोर्ट ने FIR के निर्देश दिए हैं
हाईकोर्ट ने जस्टिस से संपर्क मामले में चार दिन पहले बीते गुरुवार को विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा कि आपके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित की याचिका पर सुनवाई की थी। याचिका में आरोप था कि विधायक संजय पाठक ने जस्टिस विशाल मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता था।

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