मध्य प्रदेश में भी भगवान श्री राम को 50 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ना पड़ी, तब जाकर जमीन मिली

Updesh Awasthee
इंदौर, 6 अप्रैल 2026
: भगवान श्री राम की कुंडली में संपत्ति विवाद जरूर लिखें परंतु अंत में जीत उन्हीं की होती है। अयोध्या की तरह मध्य प्रदेश के नलखेड़ा में भी भगवान श्री राम के प्राचीन मंदिर की जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद उपस्थित हो गया था। यहां कोई और नहीं बल्कि मंदिर का पुजारी ही भगवान की जमीन हड़प गया था। इस खेल में प्रशासन भी शामिल रहा होगा। 50 साल तक चले विवाद के बाद अंततः हाईकोर्ट में भगवान श्री राम की जीत हुई। हाईकोर्ट ने उनको जमीन का स्वामी घोषित कर दिया है। 

मामले की पूरी कहानी और पृष्ठभूमि

यह कानूनी विवाद शाजापुर जिले की सुसनेर तहसील के ग्राम मोदी में स्थित कृषि भूमि (सर्वे नंबर 2563, क्षेत्रफल 2.29 आरे) को लेकर था। राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि 'मूर्ति श्री राम मंदिर, नलखेड़ा' के नाम पर दर्ज थी। प्रतिवादियों (मांगीलाल और अन्य) का दावा था कि तत्कालीन ग्वालियर रियासत के जमींदार ने यह भूमि मंदिर के पुजारी देवदास (पुत्र धूलदास) के पूर्वजों को सेवा के बदले प्रदान की थी। उनका तर्क था कि पुजारी देवदास ने यह भूमि उनके पूर्वज सीताराम को 'पट्टे' पर दी थी। इस आधार पर प्रतिवादियों ने स्वयं को 'भूमिस्वामी' घोषित करने की मांग की थी।

इससे पहले 1982 में सीताराम और करण सिंह ने एक दीवानी मुकदमे (157-A/1979) के जरिए अपने पक्ष में एक डिक्री प्राप्त कर ली थी, लेकिन उस मामले में मुख्य पक्षकार यानी 'देवता' (मूर्ति श्री राम मंदिर) को शामिल नहीं किया गया था। जब 2008 में मंदिर प्रबंधन को इस पुरानी डिक्री का पता चला, तो उन्होंने जगदीशप्रसाद के माध्यम से (Next Friend के रूप में) शीर्षक घोषणा (Declaration of Title) के लिए नया मुकदमा दायर किया।

दोनों पक्षों के वकीलों के तर्क

अपीलकर्ताओं (मांगीलाल और अन्य) के वकील - श्री हर्ष कुमार सक्सेना ने मुख्य रूप से 07.07.1982 के उस पुराने फैसले का हवाला दिया, जो सीताराम के पक्ष में सुनाया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि 'प्रांग्न्याय' (Res Judicata) के सिद्धांत के तहत यह मामला दोबारा नहीं सुना जाना चाहिए क्योंकि सीताराम का स्वामित्व पहले ही तय हो चुका था। उन्होंने यह भी दोहराया कि पुजारी द्वारा दिया गया पट्टा वैध था और वे लंबे समय से कब्जे में होने के कारण भूमिस्वामी बन चुके हैं।

प्रतिवादियों (मंदिर प्रबंधन) का पक्ष:

उनका तर्क था कि मंदिर की भूमि सार्वजनिक देवस्थान की संपत्ति है और पुजारी को उसे बेचने या पट्टे पर देने का कोई अधिकार नहीं था। 1982 की डिक्री मंदिर पर बाध्यकारी नहीं है क्योंकि उसमें मंदिर को पक्षकार नहीं बनाया गया था और तथ्यों को छुपाकर वह आदेश प्राप्त किया गया था।

न्यायालय की विशेष टिप्पणी और कानूनी विश्लेषण

न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी ने अपने निर्णय में ग्वालियर रियासत के पुराने कानूनों (Kawaid Maufidaran और Qanoon Mal) का विस्तार से उल्लेख किया:
पुजारी की स्थिति: अदालत ने स्पष्ट किया कि पुजारी केवल एक प्रबंधक होता है जो सरकारी नियंत्रण (Aukaf Department) के तहत काम करता है। वह मंदिर की आय से पूजा-पाठ और रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए भूमि जोत सकता है, लेकिन वह उस भूमि का मालिक या स्वतंत्र किरायेदार नहीं हो सकता।
देवता एक कानूनी व्यक्ति (Juristic Person): न्यायालय ने टिप्पणी की कि स्वामित्व के कॉलम में केवल देवता का नाम होना चाहिए, और पुजारी का नाम केवल 'कैफियत' (Remarks) के कॉलम में दर्ज किया जा सकता है।
अवैध पट्टा: अदालत ने कहा कि पुजारी द्वारा दिया गया कोई भी पट्टा शून्य (Invalid) है और इससे सीताराम या उनके उत्तराधिकारियों को कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता।

न्यायालय का निर्णय

उच्च न्यायालय ने निचली अदालतों के उन निष्कर्षों को सही ठहराया जिनमें माना गया था कि, विवादित भूमि का वास्तविक स्वामी 'देवस्थान' (मूर्ति श्री राम मंदिर) ही है। पुजारी देवदास के पास सीताराम को पट्टा देने का कोई अधिकार नहीं था, इसलिए प्रतिवादी इस जमीन पर केवल अतिक्रमणकारी (Trespassers) हैं। 1982 की पिछली डिक्री देवता पर बाध्यकारी नहीं है।

अंतिम फैसला:

न्यायालय ने अपीलकर्ताओं की द्वितीय अपील (Second Appeal) को खारिज कर दिया और माना कि इस मामले में कानून का कोई ठोस प्रश्न शामिल नहीं है। मंदिर की भूमि पर देवता का मालिकाना हक बरकरार रखा गया।
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!