central government employees news GPF - अप्रैल से जून 2026 का ब्याज घोषित, कर्मचारी निराश

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2026
: भारत सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के GPF के लिए नवीन ब्याज दर की घोषणा कर दी है। यह ब्याज अप्रैल से जून 2026 के 3 महीना के लिए होगा। इस घोषणा से कर्मचारियों में हर्ष का माहौल नहीं है। उनको उम्मीद थी कि महंगाई बढ़ रही है, रेपो रेट भी बढ़ेगी और जनरल प्रोविडेंट फंड पर ब्याज दर भी बढ़ जाएगी। 

PPF और अन्य सरकारी सेविंग स्कीम्स में भी कोई बदलाव नहीं

सरकार ने सिर्फ GPF ही नहीं बल्कि PPF की ब्याज दर भी 7.1% पर स्थिर रखी है। इसके अलावा सुकन्या समृद्धि योजना, सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट जैसी छोटी बचत योजनाओं में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। सामान्य तौर पर सभी सरकारी जमा योजनाओं की ब्याज दर एक समान ही रहती है।

किन-किन फंड्स पर लागू होगी यह दर

सरकार की ओर से तय की गई यह 7.1% ब्याज दर सिर्फ GPF तक सीमित नहीं है बल्कि कई अन्य प्रोविडेंट फंड्स पर भी लागू होगी। इनमें सेंट्रल सर्विसेज GPF, ऑल इंडिया सर्विसेज प्रोविडेंट फंड, रेलवे और डिफेंस से जुड़े फंड शामिल हैं। इसका मतलब है कि अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे लाखों कर्मचारियों को इसी दर से ब्याज मिलेगा।

लगातार कई तिमाहियों से स्थिर है ब्याज

GPF की ब्याज दर पिछले कई क्वार्टर से 7.1% पर ही बनी हुई है। सरकार ने इस बार भी इसमें कोई बदलाव नहीं किया जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

क्या है GPF और क्यों है खास

जनरल प्रोविडेंट फंड एक सुरक्षित बचत योजना है जो सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए होती है। इसमें कर्मचारी हर महीने अपनी सैलरी का एक हिस्सा जमा करते हैं। जितना पैसा सरकारी कर्मचारी जमा करते हैं उतना ही पैसा सरकार की तरफ से जमा किया जाता है। यानी की डेट ऑफ डिपाजिट पर सरकारी कर्मचारी का पैसा दुगना हो जाता है। फिर टोटल जमा रकम पर ब्याज दिया जाता है और हर 3 महीने में ब्याज जोड़कर टोटल रकम पर ब्याज दिया जाता है। यानी चक्रवर्ती ब्याज मिलता है। इसके कारण रिटायरमेंट के समय एक बड़ी रकम प्राप्त हो जाती है। यही वजह है कि इसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश विकल्प माना जाता है।

EPF पर मिल रहा ज्यादा ब्याज

अगर EPF की बात करें तो इस पर फिलहाल 8.25% ब्याज मिल रहा है। यह दर पहले से तय है और इसमें भी कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को GPF के मुकाबले थोड़ा ज्यादा रिटर्न मिल रहा है।
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