भोपाल, 25 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग 400 रेजिडेंशियल सोसायटी सक्रिय हैं। इनमें आए दिन कोई ना कोई विवाद होता रहता है। रेजिडेंशियल सोसायटी के विवाद को सामान्य तौर पर आपस का मामला समझा जाता है लेकिन शंकराचार्य नगर कॉलोनी का मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया। कॉलोनी की रेजिडेंट, डॉक्टर अंजली मिश्रा ने मामला उठाया है।
Bhopal’s Shankaracharya Nagar Colony Row Reaches High Court
शंकराचार्य नगर कॉलोनी, भोपाल शहर के बाग सेवनिया थाने के अंतर्गत आता है। यहां रेजिडेंशियल सोसायटी के पदाधिकारी के साथ कॉलोनी में रहने वाली डॉक्टर अंजली मिश्रा का विवाद हुआ था। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा छोटे-मोटे मामलों में ई-एफआईआर की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। मतलब मामला दर्ज करवाने के लिए आपको थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप अपने कंप्यूटर या लैपटॉप से घर बैठे मामला दर्ज कर सकते हैं। इसके आधार पर पुलिस इन्वेस्टिगेशन शुरू कर देगी। डॉक्टर अंजली मिश्रा ने भी ई-एफआईआर दर्ज की थी।
हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करके डॉक्टर अंजली मिश्रा ने बताया कि, उनके द्वारा दर्ज की गई ई-एफआईआर में छेड़छाड़ की गई है। याचिका में आरोप है कि उनकी ई-एफआईआर में सभी आरोपियों के नाम थे, लेकिन पुलिस ने चुनिंदा लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। एफआईआर की मूल सामग्री के अनुसार केस दर्ज नहीं कर आरोप कमजोर किए गए। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद अली और अधिवक्ता अमित रायजादा ने दलील दी कि धारा 161 सीआरपीसी के तहत बयान भी दर्ज नहीं हुआ है।
कुल मिलाकर पुलिस ने ई-एफआईआर को एक ऑनलाइन आवेदन की तरह ट्रीट किया है। जबकि ई-एफआईआर के आधार पर इन्वेस्टिगेशन शुरू करनी थी। हाई कोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने एक मामले में पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राज्य शासन से जवाब मांगा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ दर्ज किया जाए।
किस तरह के मामलों में सामान्य तौर पर कहा जाता है कि, रेजिडेंशियल सोसायटी के पदाधिकारियों द्वारा लोकल पुलिस के साथ मिलकर मामले को मैनिपुलेट कर दिया गया। यदि ऐसा हुआ है तो हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद रेजिडेंशियल सोसायटी के पदाधिकारियों की समस्या बढ़ गई है।

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