भोपाल, 3 अप्रैल 2026 : दतिया के विधायक राजेंद्र भारती को बैंक के डॉक्यूमेंट में गड़बड़ी के अपराध में 3 साल जेल की सजा हुई। इसी के साथ उनकी विधानसभा से सदस्यता समाप्त कर दी गई। जीतू पटवारी ने विधानसभा सचिवालय के इस काम को गलत और मंत्री विश्वास सारंग ने सही बताया है। क्या आप बता सकते हैं कि इन दोनों में से, कौन सही बोल रहा है?
सबसे पहले दोनों नेताओं के बयान सुनिए
— Adhiraj Awasthi (@AdhirajOnline) April 3, 2026
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इस मामले में आपके पास जो भी अध्ययन है अथवा जो भी आपके विचार हैं, इस न्यूज़ की लिंक के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कीजिए। यह एक ऐसा विषय है, इसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होती। इसलिए नेता लोग फायदा उठा लेते हैं। जनता की भावनाओं का और उनकी तत्काल जजमेंट करने की आदत का फायदा उठा लेते हैं।
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का मामला क्या है
यह मामला दतिया से कांग्रेस के विधायक श्री राजेंद्र भारती का है। 25 साल पहले श्री राजेंद्र भारती दतिया जिला सहकारी कृषि ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष थे। इस दौरान उन्होंने अपनी मां स्वर्गीय सावित्री देवी के नाम पर 1998 में 10.50 लाख रुपये की FD 3 साल के लिए कराई थी। ब्याज दर 13.50% थी। निर्धारित से अधिक ब्याज पाने के लिए उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया। यह फिक्स डिपाजिट 2001 में मैच्योर होने वाला था लेकिन श्री राजेंद्र भारती ने डॉक्यूमेंट में छेड़छाड़ करके फिक्स डिपाजिट को 2004 तक के लिए बढ़ा दिया और 2004 में फिर से छेड़छाड़ की गई, और फिक्स डिपाजिट की अवधि 10 साल बढ़ा दी गई। यह सब कुछ अधिक ब्याज प्राप्त करने के लिए किया गया। जिसके लिए रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ हुई।
बैंक के कर्मचारी श्री नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में यह मामला लगाया था। कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोप सही पाए गए। इसलिए कोर्ट ने विधायक श्री राजेंद्र भारती और बैंक के अन्य कर्मचारी श्री रघुवर प्रसाद प्रजापति को 3-3 साल जेल की सजा सुनाई। यदि विधायक श्री राजेंद्र भारती को सजा स्वीकार नहीं है और उनको लगता है कि न्यायालय ने गलत निर्णय दिया है तो 60 दिन के अंदर वह हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं।
मंत्री विश्वास सारंग के बयान का मतलब क्या है
विधायक श्री राजेंद्र भारती को 2 साल से अधिक की सजा मिली है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 8(3) के तहत यदि किसी जनप्रतिनिधि (संसद अथवा विधायक) को किसी भी अपराध (धारा 8(1) या 8(2) में उल्लिखित विशेष अपराधों को छोड़कर) के 2 वर्ष या उससे अधिक की कैद की सजा सुनाई जाती है, तो वह दोषसिद्धि (conviction) की तारीख से ही अयोग्य हो जाता है। सदस्यता तत्काल समाप्त हो जाती है। सजा की पूरी अवधि + रिहाई के बाद अगले 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने या सदस्य बने रहने के लिए अयोग्य घोषित हो जाता है।

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