भोपाल, 3 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल द्वारा आयोजित कक्षा 10 हाई स्कूल एवं कक्षा 12 हायर सेकेंडरी स्कूल बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन का काम लगभग खत्म हो चुका है। रिजल्ट को फुल प्रूफ करने के लिए क्रॉस चेकिंग चल रही है। एमपी बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि, इस साल बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट 15 अप्रैल से पहले जारी कर दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि, स्कूल शिक्षा मंत्री ने 7 अप्रैल मंगलवार और 12 अप्रैल शनिवार की तारीख दी है। 7 अप्रैल मंगलवार को कैबिनेट मीटिंग होने के कारण सभी भोपाल में रहेंगे।
MP Board 10th, 12th Result Date Finalised After Evaluation Process Ends
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं और रिजल्ट पूरी तरह त्रुटिरहित जारी किया जाएगा। इस बार करीब 16 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए हैं, ऐसे में समय पर परिणाम घोषित कर छात्रों को आगे की पढ़ाई में कोई देरी न हो, यह विभाग की प्राथमिकता है। इस वर्ष प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में करीब 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए हैं। इनमें लगभग 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी 10वीं और करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में बैठे। परीक्षा संचालन के लिए प्रदेशभर में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह का बयान
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। विभाग हर स्तर पर जांच कर रहा है ताकि किसी भी तरह की गलती न रह जाए। उन्होंने कहा कि रिजल्ट पूरी तरह “फुलप्रूफ” होना चाहिए, जिससे छात्रों को कोई परेशानी न हो। संभावना है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
रिजल्ट का ट्रेंड: उतार-चढ़ाव का पैटर्न
- 2017 में 10वीं का रिजल्ट 49.9% और 12वीं का 67.8% रहा।
- 2018 में 10वीं 66.54% और 12वीं 68.08% पहुंचा।
- 2019 में 12वीं का रिजल्ट 72.37% तक गया।
- 2021-22 में कोरोना के कारण दोनों कक्षाओं का रिजल्ट 100% रहा।
- 2023 में 12वीं का रिजल्ट गिरकर 55.28% पर आ गया।
- 2025 में सुधार दिखा, जहां 10वीं में 76.22% और 12वीं में 74.28% छात्र पास हुए।
- 2026 डिपार्टमेंट के लिए चुनौती पूर्ण है। दसवीं में 80% और 12वीं में 79% से अधिक होना चाहिए।
सिर्फ विद्यार्थियों का नहीं डिपार्टमेंट का भी रिजल्ट है
यह रिजल्ट सिर्फ विद्यार्थियों का नहीं बल्कि डिपार्टमेंट का भी होता है। स्टूडेंट के मामले में पर्सनल परसेंटेज देखा जाता है और डिपार्टमेंट के मामले में पासिंग परसेंटेज देखा जाता है। यदि इस साल कक्षा 10 और कक्षा 12 के पासिंग परसेंटेज में 5% की भी वृद्धि नहीं हुई तो, यह स्कूल शिक्षा विभाग के लिए शर्मनाक होगा और यदि 10वीं में 76.22% और 12वीं में 74.28% से कम विद्यार्थी पास हुए तो, मीडिया ट्रायल में यह माना जाएगा की स्कूल शिक्षा मंत्री और डिपार्टमेंट के सभी प्रमुख अधिकारी फेल हो गए हैं।

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