आज मैं आपको सेविंग एंड इन्वेस्टमेंट के सब्जेक्ट पर 48 घंटे के नियम के बारे में बताने जा रहा हूं। यदि आप इसके बारे में जानते हैं तो पढ़िए, अपडेट हो जाएंगे और आपका रिवीजन भी हो जाएगा। यदि नहीं जानते हैं तो ध्यान से पढ़िए, क्योंकि ऐसा करने से बिना कोई फीस दिए, आपको लाखों रुपए का मुनाफा होगा। और इसमें कोई रिस्क नहीं है। दुनिया में सबसे ज्यादा पैसा खर्च करने वाले अमेरिकंस के बीच में यह नियम काफी लोकप्रिय होता जा रहा है।
पृष्ठभूमि: 48 घंटे के नियम की जरूरत क्यों पड़ी
पिछले 10 सालों में बाजार पूरी तरह से बदल गया है। पहले दुकानदार से आपका एक रिश्ता होता था और यदि आपको ही गलत चीज खरीद रहे हैं तो दुकानदार रोक देता था। कभी-कभी ऐसा भी होता था कि दुकानदार आपको अपना शिकार बना लेता था। फिर शॉपिंग मॉल का जमाना आया। यहां शॉपिंग की आजादी थी। जो पसंद आए खरीदिए नहीं तो मत खरीदिए, कोई सेल्समैन आपको सामान खरीदने के लिए प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा।
इसके बाद ई-कॉमर्स ने दुनिया भर के बाजार को आपके लैपटॉप और मोबाइल में लाकर रख दिया। इसके कारण आपके पास लाखों विकल्प आ गए और लोग ज्यादा शॉपिंग करने लगे लेकिन यहां पर भी एक आजादी थी। आप अपनी मर्जी के हिसाब से शॉपिंग करते थे परंतु पिछले दो सालों में बात बिल्कुल बदल गई है। इंस्टाग्राम पर, फेसबुक पर यहां तक की व्हाट्सएप पर भी, कोई ना कोई कुछ ना कुछ खरीदने के लिए प्रेरित करता रहता है। बड़ी कंपनियां कई बार अपना स्टॉक क्लियर करने के लिए लिमिटेड टाइम ऑफर जारी करती है। इसको आवेगपूर्ण खरीदारी (impulse shopping) कहते हैं। कॉरपोरेट कंपनियां इस बात को जानती हैं और वह बड़ी आसानी से लोगों को आवेगपूर्ण खरीदारी (impulse shopping) का शिकार बना देती है। Impulse Shopping के कारण केवल आर्थिक हानि ही नहीं होती बल्कि एक पछतावा भी होता है। इसी मानसिक स्थिति ने 48 घंटे के नियम को जन्म दिया।
48 घंटे का नियम क्या है
यह नियम बिल्कुल सरल है। अपनी नियमित मासिक खरीदारी के अलावा, आप अपने लिए कुछ भी चीज खरीदने का मन बनाते हैं तो उसको अपने Cart में डाल कर रख लीजिए, लेकिन पेमेंट मत कीजिए। 48 घंटे बाद Cart को फिर से चेक कीजिए। यदि अभी भी आपको लगता है की शॉपिंग कर लेना चाहिए तो आप पेमेंट कर सकते हैं। ऑनलाइन मार्केट में किसी भी चीज को खरीदने का ऑर्डर देने से पहले 48 घंटे का विचार करना चाहिए। इस टाइम लिमिट के भीतर आपको समझ में आ जाता है कि यह चीज मेरे लिए उपयोगी है या नहीं। आप अपने फाइनल डिसीजन तक पहुंच पाते हैं कि, यदि कोई ऑफर कितना भी अच्छा है लेकिन वह चीज आपके लिए उपयोगी है या नहीं।
48 घंटे के नियम का मुख्य उद्देश्य शॉपिंग के लिए भावनात्मक फसलों को रोकना और intentional spending तर्कसंगत एवं सचेत खरीदारी को बढ़ावा देना है।
48 घंटे के नियम का साइंस क्या है
जब खरीदारी की शुरुआती उत्तेजना कम हो जाती है, तो आपको स्वयं से कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछने चाहिए:
क्या आपके पास पहले से ही ऐसी कोई मिलती-जुलती चीज़ है?
क्या आप वास्तव में इसका उपयोग करेंगे, या यह बस अलमारी के किसी कोने में पड़ी रहेगी?
यदि दो दिनों के बाद भी आप उस वस्तु के बारे में सोच रहे हैं और वह आपको व्यावहारिक लगती है, तो आप उसे बिना किसी अपराधबोध (guilt-free) के खरीद सकते हैं।
वास्तविक लाभ और परिणाम
इस नियम का अभ्यास करने वाले बताते हैं कि अधिकांश समय, वे 48 घंटों के भीतर उन वस्तुओं के बारे में भूल जाते हैं या अपना मन बदल लेते हैं। अमेरिका में एक सामान्य मीडिया स्टडी में सामने आया कि लोगों ने इस नियम का पालन करते हुए हर महीने लगभग 300 डॉलर की बचत की है। यह एक औसत है लेकिन लगभग ₹30000 की बचत कर लेना काफी होता है।
Try the 48-Hour Rule, Earn Big
जब महीने भर में इस प्रकार से बचाए गए पैसों को आप एक पेपर पर नोट करना शुरू करते हैं और जितने भी पैसों की बचत हो गई है उनको किसी भी चीज में इन्वेस्ट कर देते हैं। तो ऐसे निवेश में आपको अक्सर हाई रिटर्न भी मिलते हैं। यानी कि एक तरफ पैसों की बचत हो जाती है और दूसरी तरफ बचाया गया पैसा आपके लिए एक्स्ट्रा इनकम का माध्यम बन जाता है। आपको पता ही नहीं चलता कि, साल भर में आपने एक बड़ी बचत कर ली है और सिर्फ 5 साल में इस प्रकार की बचत के कारण आपको किसी भी प्रकार के पेंशन प्लान की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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