आचार्य कमलांश, 2 मार्च 2026: होलिका दहन की डेट और मुहूर्त टाइम को लेकर कुछ विद्वानों ने कंफ्यूजन क्रिएट कर दिया है परंतु आपको कंफ्यूज होने की जरूरत नहीं है। मैं आपको बिल्कुल सटीक, सही और तार्किक जानकारी दूंगा। ताकि आप आनंदपूर्वक, शुभ और कल्याण के लिए होलिका पूजन एवं दहन कर सकें:-
2 मार्च को पूर्णिमा फिर होलिका दहन का मुहूर्त क्यों नहीं
दरअसल, सारा कंफ्यूजन इसलिए क्रिएट हुआ है क्योंकि पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को प्रारंभ हो जाएगी और 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 05:07 बजे समाप्त हो जाएगी। होलिका दहन रात्रि के समय में किया जाता है। इसलिए कुछ विद्वान 2 मार्च को होलिका दहन का परामर्श दे रहे हैं। कृपया यहां नोट कीजिए कि 2 मार्च को भद्रा का मुख होने की वजह से होलिका दहन करना हानिकारक होगा। धर्मसिंधु के अनुसार:-
भद्रायां होलिकां दहेद् ग्रामनाशः प्रजाक्षयः।
राजभेदो भवेद् दुःखं तस्माद् भद्रां विवर्जयेत्॥
अर्थात: भद्रा में होलिका दहन करने से ग्रामनाश (समाज/गांव को हानि), प्रजाक्षय (जनहानि), राजभेद (राजनीतिक/शासनिक संकट) जैसे अशुभ फल प्राप्त होते हैं। इसलिए भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है और भद्रा समाप्ति के बाद दहन करने का विधान है।
No Confusion Over Holika Dahan Date and Muhurat, Know Grahan, Sutak and Bhadra Rules
अब अपने पास शेष 3 मार्च की तारीख बचती है लेकिन 3 मार्च को तो चंद्र ग्रहण है। यहां कृपया नोट कीजिए। 3 मार्च को होने वाले चंद्र ग्रहण की वजह से सुबह 09:39 बजे से सूतक काल लग जाएगा। सूतक के दौरान मंदिरों में पूजा-पाठ नहीं होती, लेकिन होली की तैयारी कर सकते हैं। ग्रहण शाम को 06:46 बजे समाप्त होगा, जिसके बाद ही शुद्धिकरण करके होलिका पूजन करेंगे।
यहां ध्यान रखिए कि किसी भी स्थिति में भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जाता है। भद्रा काल में होलिका दहन स्पष्ट रूप से वर्जित बताया गया है। होलिका दहन के लिए भद्रा विचार ही किया जाता है, ग्रहण के विचार का कोई विधान भी नहीं है। इसलिए कोई कंफ्यूजन नहीं है, होलिका दहन 3 मार्च को ही होगा।
होलिका दहन 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
- होलिका दहन की तारीख 3 मार्च 2026
- होलिका दहन मुहूर्त शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक
- कुल अवधि 02 घंटे 28 मिनट
- भद्रा पूंछरात 01:25 बजे से 02:35 बजे तक (4 मार्च)
होलिका की पूजा कैसे करें, होलिका की पूजा कैसे करते हैं
- सबसे पहले, पूजा करने की जगह को गाय के गोबर से साफ़ करें।
- श्री गणेश जी का ध्यान करें।
- होलिका पर जल, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, और मिठाई अर्पित करें।
- होलिका की सात बार परिक्रमा करें।
- कच्चा सूत हाथ में लेकर होलिका पर सात बार लपेटें।
- होलिका पर गाय के गोबर से बनाए गए उपलों की माला चढ़ाएं।
- मंत्रों के उच्चारण के साथ होलिका में अग्नि प्रज्वलित करें।
- होलिका दहन के समय 'ॐ होलिकायै नमः', 'ॐ प्रह्लादाय नमः', और 'ॐ नृसिंहाय नमः' मंत्रों का जाप करें।
- होलिका की अग्नि में नारियल, गोमती चक्र, और मिठाई चढ़ाएं।
- होलिका राख ठंडी होने पर घर ले आएं और माथे पर लगाएं।
- होलिका दहन के बाद अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मनोकामना करें।
होलिका दहन में क्या-क्या डालना चाहिए?
श्रीफल अर्थात नारियल अर्पित करना अनिवार्य और शुभ माना जाता है इसके अतिरिक्त होलिका के चारों ओर जल की लक्ष्मण रेखा बनाएं। हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, और मिठाई अर्पित करें।
होलिका पूजन का सही तरीका क्या है?
होली का पूजन का सही तरीका, निश्चित मुहूर्त में, निर्धारित विधि के अनुसार पूजा करना चाहिए।
होलिका में क्या चढ़ाना चाहिए?
श्रीफल अर्थात नारियल अर्पित करना अनिवार्य और शुभ माना जाता है इसके अतिरिक्त होलिका के चारों ओर जल की लक्ष्मण रेखा बनाएं। हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, और मिठाई अर्पित करें।
डिस्क्लेमर: यह मार्गदर्शन केवल श्री हरि नारायण में आस्था और ज्योतिष में विश्वास रखने वालों के लिए है। आधुनिक विज्ञान के पास मौसम का पूर्वानुमान की तकनीक तो है परंतु शुभ अशुभ पूर्वानुमान की कोई तकनीक नहीं है।

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