मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET-Teacher Eligibility Test) को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा मंत्री श्री राव उदय प्रताप सिंह को तो लगता है, शिक्षा विभाग से कोई लेना-देना ही नहीं है,उन्हें तो सिर्फ विवादित बयान ही देने होते हैं। अब तो हाल इतना बेहाल है कि जिन अभ्यर्थियों ने TET क्वालिफाइड किया हुआ है, उनके पास सरकारी नौकरी नहीं है और जो टीचर्स सरकारी नौकरी कर रहे हैं, उनके पास TET क्वालिफिकेशन ही नहीं है। कहीं ज्ञापन, तो कहीं धरना प्रदर्शन कुल मिलाकर एक सरकारी नौकरी पाने के लिए और उस सरकारी नौकरी में बने रहने के लिए न जाने क्या-क्या करना पड़ रहा है।
आंदोलन ही आंदोलन है, सॉल्यूशन का पता नहीं
MPESB द्वारा अचानक शिक्षक भर्ती के लिए दो परीक्षाओं (शिक्षक पात्रता परीक्षा एवं शिक्षक चयन परीक्षा) का आयोजन किया जाने लगा। इसके बाद कई अभ्यर्थी सिलेक्ट भी हुए। तो उनको नियुक्ति नहीं दी। इधर पद रिक्त पड़े हुए हैं उधर कैंडिडेट वेटिंग लिस्ट में पड़े हुए हैं। कोई कान पकड़ रहा है कोई नाक रगड़ रहा है। लोग नियमों का पालन करवाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। अब अचानक से फिर से सिर्फ एक परीक्षा ही आयोजित की जाएगी, तो ऐसे में उन अभ्यर्थियों की क्या गलती है जिन्होंने एक परीक्षा (शिक्षक पात्रता परीक्षा,TET) पास कर रखी है, परंतु उनके पास अभी तक कोई नौकरी नहीं है। एक वेटिंग लिस्ट पूरी तरह से खत्म नहीं होती और अगली परीक्षा करवा ली जाती है और परीक्षा की मोटी फीस भी अभ्यर्थियों से बार-बार वसूली जाती है, कहीं पर भी नियमों में समानता नहीं है।
इसी के चलते कहीं वर्ग एक के वेटिंग लिस्ट वाले, अभ्यर्थी कहीं वर्ग दो, कहीं वर्ग तीन के अभ्यर्थी धरना प्रदर्शन करने को मजबूर है इस तरह नियमों की मनमानी कब तक चलेगी!
MPESB & DPI के बीच तालमेल की कमी!
जब अभ्यर्थी मजबूर होकर मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) का दरवाजा खटखटाते हैं तो उन्हें कह दिया जाता है कि यह तो विभागीय आदेश है, इसमें हम कुछ नहीं कर सकते और जब अभ्यर्थी संबंधित विभाग का दरवाजा खटखटाते हैं, तो उन्हें किसी और बहाने से टाल दिया जाता है, कुल मिलाकर या तो कर्मचारी चयन मंडल और संबंधित विभागों के बीच कोई तालमेल नहीं है या फिर कुछ ज्यादा ही आपसी तालमेल है!
पत्र लेखक: हायर सेकेंडरी, ग्रेजुएशन, पात्रता परीक्षा और चयन परीक्षा पास करने के बाद भी आंदोलन को मजबूर समस्त अभ्यर्थी।
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