भोपाल, 18 मार्च 2026 : विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल वाले देखते रह गए, उनके द्वारा पकड़ा गया गौ मांस का कथित माफिया असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा भोपाल की सेशन कोर्ट से मात्र 35000 के Bail Bond पर जमानत पाकर रिहा हो गया। कोर्ट को इसलिए जमानत मंजूर करनी पड़ी क्योंकि पुलिस की इन्वेस्टीगेशन में कई टेक्निकल गड़बड़ियां थी।
वकील की दलील: जानवर गाय है या बेल, वेरीफाई करना डॉक्टर का काम है
गौ मांस की तस्करी के आरोपी असलम चमड़ा की ओर से एडवोकेट जगदीश गुप्ता ने बहस की थी। उन्होंने असलम को निर्दोष बताते हुए पुलिस की जांच विवेचनाओं की खामियां बताई थीं। साथ ही हैदराबाद की रिपोर्ट न आने का हवाला दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि कंटेनर में भरा माल उनका नहीं था। वह आगरा की एक कंपनी का माल था। एडवोकेट गुप्ता ने बताया कि जिस जानवर की स्लॉट्रिग की जाती है, उसे डॉक्टर के परीक्षण के बाद ही कत्लखाने के अंदर लाया जाता है। डॉक्टर जानवर का फिजिकल वेरिफिवकेशन करता है।
फरियादू भानु हिंदू की आपत्ति कुछ नहीं कर पाई
वहीं भानू हिंदू ने असलम की जमानत पर आपत्ती लगाई थी, लेकिन अभय पक्षों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार जैन की कोर्ट ने बुधवार शाम को 35 हजार रुपए के Bail Bond पर जमानत आदेश पारित कर दिए। बता दें कि असलम को लोअर कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उसके एडवोकेट ने सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई। जिस पर बुधवार दोपहर को सुनवाई हुई।
26 टन गो मांस से भरा कंटेनर पकड़ा था
17 दिसंबर 2025 जहांगीराबाद के पास एक कंटेनर पकड़ा था। कंटेनर में करीब 26 टन मांस मुंबई भेजा जा रहा था। आरोप था कि स्लॉटर हाउस में गोवंश का अवैध कत्ल कर चोरी-छिपे मांस बाहर भेजा जा रहा था। पुलिस ने मांस के सैंपल लेकर जांच के लिए मथुरा फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी भेजे थे। रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि होने के बाद 8 जनवरी को जहांगीराबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने स्लॉटर हाउस संचालक असलम कुरैशी और उसके ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
500 पेज के चालान में वजन तो था लेकिन दम नहीं था
मामले में पुलिस की एसआईटी ने जांच पूरी करने के बाद 6 मार्च को आरोपी असलम कुरैशी और उसके ड्राइवर शोएब के खिलाफ करीब 500 पेज का चालान न्यायालय में पेश किया था। कहा जा रहा है कि पुलिस की केस डायरी में 500 पेज का वजन तथा लेकिन दम नहीं था। सेशन कोर्ट में एडवोकेट जगदीश गुप्ता की दलीलों के सामने सरकारी वकील टिक नहीं पाए क्योंकि पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए चालान में ऐसा कुछ भी नहीं था जो असलम कुरैशी हो अपराधी साबित करता हो।

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