श्यामला ज्योतिष पीठ, भोपाल, 19 मार्च 2026 : भारतीय नव वर्ष विक्रम संवत 2083 के पहले भोपाल में नवरात्रि के अवसर पर घरों में, दुकान एवं ऑफिस में घट स्थापना की जाती है। कुछ लोग अखंड ज्योति भी जलाते हैं। इसके लिए मुहूर्त की गणना स्थानीय स्तर पर की जाती है। यानी कि भोपाल और नेपाल में घट स्थापना का मुहूर्त अलग-अलग होगा। हम यहां पर भोपाल में घट स्थापना एवं नवरात्रि की पहली पूजा का मुहूर्त बता रहे हैं। यह मुहूर्त भोपाल के 250 किलोमीटर की परिधि में मान्य किया जा सकता है।
नवरात्रि घट स्थापना, अखंड ज्योति, पूजा मुहूर्त
- 卐 गुरुवार, 19 मार्च 2026 | Bhopal, Madhya Pradesh, IN
- भोपाल में घटस्थापना का मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट के बीच अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं।
- राहुकाल - 01:49:36 PM से 03:20:16 PM
भारतीय ज्योतिष के अनुसार एक अशुभ समय अवधि को राहुकाल कहा जाता है। यह हर दिन लगभग 90 मिनट (डेढ़ घंटे) का होता है। इस समय में शुभ कार्यों को वर्जित कर दिया गया है। हालांकि प्रारंभ हो चुकी पूजा को राहुकाल में कंटिन्यू कर सकते हैं या नहीं इसके बारे में स्पष्ट निर्देश नहीं है लेकिन हमारा परामर्श है कि, घटस्थापना से लेकर अखंड ज्योति और आरती तक पूरी विधि दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट के बीच अभिजीत मुहूर्त में संपन्न करें।
अखंड ज्योति प्रज्वलन की विधि
अखंड ज्योति (दीप) को घट स्थापना के साथ ही प्रज्वलित करना सर्वोत्तम होता है। दीपक 9 दिनों तक लगातार जलना चाहिए। घी का दीपक अधिक शुभ माना जाता है।
- दीपक को दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में रखें।
- अखंड ज्योति का दीपक पीतल का होना चाहिए। इसके अलावा चांदी या मिट्टी का बड़ा दीपक भी उपयोग कर सकते हैं। अन्य किसी धातु का दीपक नहीं होना चाहिए।
- अखंड दीपक के लिए देसी गाय का घी सर्वोत्तम कहा गया है। इसके अतिरिक्त गाय का की विकल्प होता है और यदि ना हो तो तिल सरसों के तेल से भी अखंड दीपक का विधान है।
- बाती: रुई की मोटी लंबी बाती या कलावा (रक्षासूत्र/मौली) से बनी सवा हाथ (लगभग 1.5 फुट) लंबी बाती (सिंथेटिक नहीं, प्राकृतिक कपास की)।
- लाल कपड़ा, अष्टदल के लिए हल्दी/अक्षत/चावल/गुलाल।
- अखंड दीपक के लिए चौकी या पटरा।
- पूजा स्थल पर चौकी रखें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर हल्दी/अक्षत से अष्टदल कमल (8 पंखुड़ियों वाला कमल) बनाएं।
- अखंड ज्योति को अष्टदल के बीच में रखें।
दिशा: आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) या पूर्व दिशा सबसे शुभ। घी का दीपक मां के दाईं ओर, तेल का बाईं ओर रखें। ज्योति का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो।
संकल्प लें:
मन में संकल्प लें: "हे मां दुर्गे, मैं नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाकर आपकी आराधना करूंगा/करूंगी, मेरी मनोकामना पूर्ण करें।"
मां से प्रार्थना करें कि ज्योति अखंड रहे और रक्षा करें।
मुख्य मंत्र जपें:
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कृपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
दीपज्योति: परब्रह्म दीपज्योति जनार्दन:।
दीपो हरति मे पापं संध्यादीपं नमोऽस्तुते॥
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तु ते॥
अखंड ज्योति प्रज्वलित करने की प्रक्रिया के दौरान अगर बीच में ज्योति बुझ जाए तो तुरंत जलाएं, इसको अशुभ नहीं माना जाता। यदि दूसरी बार भी ऐसा कुछ हो तो दीपक की बाती बदलें।
दशमी के दिन अखंड दीपक को फूंक या मुंह से न बुझाएं; चम्मच/हाथ से दबाकर या स्वयं बुझने दें।
पूजा स्थान स्वच्छ रखें, ज्योति के सामने रोज आरती/पाठ करें।
जमीन पर कभी न रखें; हमेशा ऊंचाई पर (चौकी पर)।
लाभ: अखंड ज्योति से घर में प्रकाश, शांति, स्वास्थ्य, धन और शत्रु नाश होता है। जप/पाठ का फल हजार गुना मिलता है।
घट स्थापना की विधि
चैत्र नवरात्रि में घट स्थापना (कलश स्थापना) देवी पूजा का मूल आधार है। नीचे विधि को शास्त्रीय क्रम और व्यावहारिक तरीके से स्पष्ट किया गया है:
- घट स्थापना के लिए स्थान का चयन घर की पूर्व उत्तर दिशा होनी चाहिए।
- पूजा स्थल साफ-सफाई करें।
- एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- मिट्टी का पात्र लें। उसमें बिना कंकड़ पत्थर वाली मिट्टी डालें।
- कलश के अंदर गंगाजल या शुद्ध जल, सुपारी, तांबे का सिक्का, अक्षत (चावल) एवं दुर्वा (यदि उपलब्ध) समर्पित करें।
- कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें।
- कलश के ऊपर लाल कपड़े में लपेटकर श्रीफल नारियल रखें।
- नारियल का मुख ऊपर की ओर होना चाहिए।
- कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और मौली बांधें।
मुख्य चरण देवी का आह्वान
- पुष्प इत्यादि से पूजा स्थल को सजाएं।
- अब हाथ में अक्षत और फूल लेकर संकल्प करें:
- “मैं (अपना नाम) श्रद्धा भाव से माँ दुर्गा की स्थापना कर रहा/रही हूँ, हे मां, कृपया पधारें और मेरे घर में निवास करें।”
- फूल, रोली, अक्षत चढ़ाएं।
- इसके बाद: माता दुर्गा का ध्यान करें
- मंत्र जप करें (जैसे “ॐ दुं दुर्गायै नमः”)
- दुर्गा सप्तशती/ देवी कवच/ अर्गला का पाठ / मंत्र पाठ / जो भी अपने संकल्प लिया है वह पाठ करें।
- आरती करें। जय अम्बे गौरी (यदि आरती याद नहीं है तो माता के नाम से ॐ जय जगदीश हरे)
माता आपकी मनोकामना पूर्ण करें, यही मेरी शुभकामनाएं और आशीर्वाद। आचार्य कमलांश।

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