भोपाल, 19 मार्च 2026: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए आयोजित विशेष पात्रता परीक्षा के मामले में शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल के स्कूल शिक्षा मंत्री से मुलाकात के बाद लोक शिक्षण संचालनालय का एक आदेश वायरल हुआ। भोपाल समाचार ने जब यह खुलासा किया कि आदेश पर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है, तो स्थिति को स्पष्ट करने के लिए पत्रकारों और कर्मचारी नेताओं ने लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों से स्पष्टीकरण की मांग की परंतु DPI की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
वायरल आदेश में क्या लिखा है
वायरल आदेश में 2 मार्च को जारी आदेश का हवाला देते हुए प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षाकर्मी वर्ग-1 से अध्यापक बने शिक्षकों के लिए भी पात्रता परीक्षा आयोजित करने की बात कही गई है। इसमें दावा किया गया है कि 1998 के बाद नियुक्त वर्ग-1, 2 और 3 के शिक्षाकर्मियों सहित 2001, 2003, 2005, 2008, 2011 और 2013-14 तक नियुक्त संविदा शिक्षकों को इस परीक्षा में शामिल होना होगा। आदेश में यह भी उल्लेख है कि परीक्षा के लिए आवेदन 1 अप्रैल से MP Online के माध्यम से भरे जाएंगे और स्कूलों को 25 मार्च तक शिक्षकों की जानकारी का सत्यापन करना होगा।
भोपाल समाचार में सवाल उठाया तो दूसरा पेज भी वायरल हो गया
भोपाल समाचार ने इस मामले में 19 मार्च 2026 को सुबह 11:00 बजे अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें खुलासा किया गया कि, विशेष अनिवार्य आदेश में किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है। ना ही कोई आवक जावक का नंबर है। इसके बाद सोशल मीडिया पर आदेश का दूसरा पेज भी वायरल हो गया जिस पर अपर संचालक के हस्ताक्षर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन स्पष्ट पता चल रहा है कि दूसरा पेज हड़बड़ी में लगाया गया है। क्योंकि पहले पेज में प्रतिलिपि दर्ज है। इसका मतलब हुआ कि आदेश पूरा हुआ और इसका कोई दूसरा पेज नहीं है।
DPI वाले अफवाहों को बढ़ने देते हैं
मध्य प्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा अफवाहों को बढ़ने दिया जाता है। स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जाता। इस मामले में भी लोक शिक्षण आयुक्त शिल्पा गुप्ता और संचालक स्कूल शिक्षा केके द्विवेदी सहित अन्य अधिकारियों ने स्थिति को स्पष्ट नहीं किया और पूरे दिन शिक्षकों में हड़कंप मचा रहा। माना कि आज सरकारी छुट्टी है लेकिन दोपहर के बाद स्थिति को स्पष्ट किया जा सकता था। जब छुट्टी के दिन मीटिंग हो सकती है तो छुट्टी के दिन स्थिति को स्पष्ट क्यों नहीं किया जाता।
शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी
शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल और मप्र अध्यापक-शिक्षक संघ अध्यक्ष भरत पटेल ने कहा कि इस तरह के फर्जी आदेश से शिक्षकों में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मामले की जांच कराई जाए और स्पष्ट किया जाए कि ऐसी कोई परीक्षा प्रस्तावित है या नहीं।

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