भोपाल समाचार, 25 मार्च 2026: स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह के कारण 2 घंटे देरी से जारी हुए मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा कक्षा 5 और कक्षा 8 के रिजल्ट में, कक्षा 5 में दमोह और कक्षा आठ में सतना के शिक्षक फेल हो गए। इन दोनों जिलों का रिजल्ट सबसे खराब रहा है। यह रिजल्ट दोनों जिलों के विद्यार्थियों का नहीं बल्कि दोनों जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों का है। दोनों जिलों के शिक्षकों की गर्मी की छुट्टियां रद्द करके, उनके लिए विशेष प्रशिक्षण कैंप आयोजित किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ नरसिंहपुर एक ऐसा जिला है जिसे दोनों परीक्षाओं में टॉप किया है। इस जिले के शिक्षकों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए।
कक्षा 8 में इन जिलों का रिजल्ट सबसे खराब रहा
कक्षा 8 के रिजल्ट में सबसे कमजोर जिला सतना रहा, जिसका परिणाम 83.79% है, यानी सतना टॉप जिले से करीब 15.59% पीछे है। इसी तरह दमोह (85.16%) 14.22% और जबलपुर (87.09%) करीब 12.29% पीछे रहा। निचले जिलों में सिवनी (88.45%), विदिशा (89.16%) और ग्वालियर (90.39%) भी 9% से 11% तक पीछे हैं, जो चिंता का विषय है। खास बात यह है कि इन जिलों में A और A+ ग्रेड पाने वाले छात्रों का प्रतिशत कुछ मामलों में बेहतर है, लेकिन कुल पास प्रतिशत कम होने से समग्र प्रदर्शन प्रभावित हुआ है।
कक्षा 5 की परीक्षा में फेल होने वाले जिले
दमोह जिले का परिणाम 87.12% है, यानी टॉप जिले से करीब 12.58% पीछे। इसी तरह जबलपुर (87.79%) भी 11.91% और सतना (89.35%) करीब 10.35% पीछे रहा। इससे साफ है कि नीचे के जिलों में परिणाम का गैप काफी बड़ा है, जो शिक्षा की गुणवत्ता और तैयारी में अंतर को दर्शाता है। साफ है कि टॉप और बॉटम जिलों के बीच 6% से 12% तक का बड़ा अंतर है। वहीं, इस सूची में इंदौर 96 प्रतिशत पास स्टूडेंट के साथ 26वें और भोपाल 95 प्रतिशत पास स्टूडेंट्स के साथ 34वें स्थान पर है।
90% से कम प्राप्तांक वाले शिक्षकों को गर्मी की छुट्टी में विशेष प्रशिक्षण देना चाहिए
इस रिजल्ट के बाद एक बात बहुत क्लियर है। दमोह और जबलपुर दो ऐसे जिले हैं जहां पर शिक्षा का स्तर बहुत खराब हो चुका है और तत्काल कठोर एक्शन लेने की जरूरत है। सरकार चाहे भी तो किसी जिला शिक्षा अधिकारी या शिक्षक को रिजल्ट के आधार पर सेवा समाप्त या सस्पेंड नहीं कर सकती लेकिन इतना जरूर किया जा सकता है कि, इनके लिए गर्मी की छुट्टियों में विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जाए और दोनों जिलों की शिक्षकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रखा जाए।
नरसिंहपुर के शिक्षकों को गोल्ड मेडल चाहिए
कक्षा 5 और कक्षा 8, दोनों के रिजल्ट में नरसिंहपुर में टॉप किया है। यह कोई छोटी बात नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि नरसिंहपुर के शिक्षक, स्कूल में टाइम पास नहीं करते बल्कि जिन वह काम करते हैं जिसके लिए उन्हें नियुक्त किया गया है। ऐसी कर्मठ शिक्षकों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाना चाहिए।

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