मध्य प्रदेश के पांचवी आठवीं रिजल्ट में जातिवाद की राजनीति का असर

Updesh Awasthee
भोपाल, 25 मार्च 2026
: मध्य प्रदेश में कक्षा 5 और कक्षा 8 के रिजल्ट में जातिवाद की राजनीति का असर साफ दिखाई दिया। अनारक्षित, ओबीसी यहां तक की आदिवासी वर्ग के विद्यार्थियों ने काफी अच्छी पढ़ाई की लेकिन अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों ने इतना ध्यान नहीं दिया। रिजल्ट में एक पैटर्न साफ दिखाई देता है और यह भी संकेत मिलता है कि जातिवाद की राजनीति के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर डिस्टरबेंस आया है। अभी यह प्रारंभ है, यदि कंट्रोल नहीं किया तो यह बीमारी बढ़ती जाएगी। 

Caste Politics Impact in MP School Results? Questions Rise Over Class 5 & 8 Performance

मध्य प्रदेश के इतिहास में ऐसा कभी भी नहीं हुआ है। 1999 से लेकर 2003 तक बहुजन समाज पार्टी ने काफी कोशिश की, उसको जातिवाद की वोट भी मिले लेकिन मध्य प्रदेश के सामाजिक जीवन में जातिवाद दिखाई नहीं दिया था। लोग आरक्षण के समर्थन में कितनी भी कहानी बता दें लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां पर आम जनता अपने आदिवासी, अनुसूचित जाति और ओबीसी राजा की छत्रछाया में सुखपूर्वक जीवन यापन करती थी। (मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा राजवंश ओबीसी है) यहां जाति के आधार पर भेदभाव का कोई प्रश्न ही नहीं था। लेकिन पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश के समाज जीवन में जातिवाद दिखाई देने लगा है। जातिवाद की राजनीति करने वाले कुछ नेता सफल होते हुए दिखाई दे रहे हैं। बच्चों के मन में यह विश्वास जगाया जा रहा है कि आरक्षण तुम्हारा अधिकार है और यह अनंत काल तक मिलता रहेगा। इसका असर यह हो रहा है कि, बच्चों को लग रहा है कि उन्हें ज्यादा पढ़ने की जरूरत नहीं है। वह काम पढ़ाई करेंगे तो भी उनको उनकी रिजर्व सीट पर नौकरी मिल ही जाएगी। 

कक्षा 5 और कक्षा 8 के रिजल्ट में जातिवाद की पॉलिटिक्स का पैटर्न

कक्षा 5 में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों का रिजल्ट 93.74% रहा। कक्षा 8 में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों का रिजल्ट 92.21% रहा। यहां नोट करना जरूरी है कि, यह उन बच्चों का रिजल्ट है जो निश्चित रूप से निर्धन है और CBSE एफिलिएटिड प्राइवेट स्कूल की फीस भरने के लिए सक्षम नहीं है। इसका मतलब हुआ कि यह विद्यार्थी अनुसूचित जाति वर्ग की निर्धन श्रेणी से आते हैं। कक्षा 5 और कक्षा 8 दोनों ही कक्षाओं में अनुसूचित जाति के विद्यार्थी, अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों से पीछे रहे। दोनों कक्षाओं में एक जैसी स्थिति बन जाना, यह स्पष्ट करता है कि समाज के जीवन में, विद्यार्थियों के परिवार में, कुछ परिवर्तन हुआ है। बाबा साहब अंबेडकर जो चाहते थे, वह नहीं हो रहा है। आरक्षण की गारंटी के कारण बच्चे पढ़ाई के प्रति गंभीर नहीं है। यह भी अध्ययन करना चाहिए कि क्या, यह स्थिति जातिवाद की राजनीति करने वाले नेताओं के कारण हो रही है?
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