भोपाल, 2 मार्च 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा में 16 से 27 फरवरी तक चले बजट सत्र में कई बड़ी बातों का पता चला। इनमें से एक मामला ग्वालियर संभाग के चार शहरों का है। यहां के भ्रष्ट अधिकारियों ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना ही बंद कर दी और विडंबना देखिए, सरकार कुछ नहीं कर पाई।
Kanyadaan Scheme Stopped in Bhind, Morena, Gwalior and Shivpuri; Corruption Allegations Surface
ग्वालियर के विधायक डॉ. सतीश सिकरवार और मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के बीच 'मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना' को लेकर तीखी बहस हुई। डॉ. सतीश सिकरवार ने सवाल उठाया कि ग्वालियर संभाग (भिंड, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी) के किसी भी नगरीय निकाय में बसंत पंचमी के अवसर पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत शादियां क्यों नहीं हुईं?
क्योंकि हमने पॉलिसी बदल दी: मंत्री ने स्वीकार किया
मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने जवाब दिया कि योजना में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए गरीबी रेखा (BPL) कार्ड को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में इस योजना में काफी धांधली और 'दोबारा शादियों' की शिकायतें मिली थीं।
विधानसभा में सरकार के इस जवाब का मतलब यह हुआ कि सरकार ने पॉलिसी बदल दी, योजना में भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई, इसलिए भिंड, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी जिलों में भ्रष्ट अधिकारियों ने योजना का संचालन ही बंद कर दिया। योजना का प्रचार प्रसार बंद कर दिया गया। रजिस्ट्रेशन की सूचना ही बंद कर दी गई। कितनी चतुराई के साथ भ्रष्ट अधिकारी, कल्याणकारी योजना को डकार गए और इन चारों क्षेत्र के विधायकों ने कुछ नहीं किया।
चलते-चलते आपको याद दिला देते हैं, जब परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार की बात चल रही थी तो परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने विधानसभा में कहा है, हम और अधिक कार्रवाई नहीं कर सकते क्योंकि अब हमारे पास डिपार्टमेंट का काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है। इसका सीधा सरल मतलब यह हुआ कि, मंत्री ने सरकारी रिकॉर्ड में यह कह दिया है कि, चाहे आप कितने भी सबूत ले आओ, भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे।

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