दुनिया के रहस्य - चूना पत्थर की गुफा में मिले गोल्डन ट्री स्नेक सहित कई नई प्रजातियां

Updesh Awasthee
ज्ञान विज्ञान न्यूज डेस्क, 24 मार्च 2026
: कंबोडिया की चूना पत्थर गुफाओं में विशेषज्ञों की एक टीम को वन्यजीवों की ऐसी प्रजातियां मिली है, जिनको हम मनुष्य ने आज से पहले कभी नहीं देखा था। अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण चैरिटी 'फौना एंड फ्लोरा' (Fauna & Flora) ने कंबोडिया के पर्यावरण मंत्रालय और क्षेत्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर पश्चिमी कंबोडिया के बटमबांग (Battambang) प्रांत में एक व्यापक सर्वेक्षण किया। इसमें कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई। 

World Mysteries: Golden Tree Snake Among New Species Found in Limestone Cave

सर्वेक्षण करने निकली टीम ने 10 पहाड़ियों में फैली हुई 60 से अधिक गुफाओं में जाकर जांच पड़ताल की। इस टीम का उद्देश्य था, गुफाओं में रहने वाले वन्यजीवों का डॉक्यूमेंटेशन करना। इस पूरे क्षेत्र में चूना पत्थर की पहाड़ियां हैं, जिनके अंदर गुफाएं भी हैं। इस इलाके को Karst Landscape कहा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि, चट्टानों के घुलने से यहाँ गुफाओं के झरने, सिंकहोल (sinkholes) और डूबती हुई धाराएँ जैसी अनूठी भौगोलिक विशेषताएँ विकसित हुई हैं, जो विशिष्ट जीवों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं।

खोजे गए प्रमुख जीव: नई और दुर्लभ प्रजातियों की पहचान

पिट वाइपर (Pit Viper): 
सर्वेक्षण में पिट वाइपर की एक शानदार नई प्रजाति मिली है। ये सांप अत्यधिक विषैले होते हैं और अपने नथुनों के पीछे स्थित गर्मी-संवेदनशील छिद्रों (heat-sensitive pits) का उपयोग करके गर्म रक्त वाले शिकार को ट्रैक करते हैं।

ऑर्नेट फ्लाइंग स्नेक (Chrysopelea ornata): 
इसे 'गोल्डन ट्री स्नेक' के नाम से भी जाना जाता है। यह सांप अपने पसलियों के पिंजरे को चपटा करके और हवा में लहराते हुए एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर उड़ने (glide) की क्षमता रखता है।

reticulated python - दुनिया का सबसे लंबा अजगर
बट्टमबैंग प्रांत के फ्नोम प्रीक में यह अजगर मिला है। जो मूल रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया का रहने वाला है। यह दुनिया का सबसे लंबा सांप है। इसकी लंबाई 7 मीटर और इससे अधिक भी होती है।

गेको (Gecko) की प्रजातियां:
बटमबांग लीफ-टोएड गेको (Dixonius noctivagus): इसका अर्थ 'रात का मुसाफिर' है और इसका शरीर तेंदुए जैसे छोटे धब्बों से ढका होता है।

इसके अलावा और भी बहुत सारी प्रजातियों की खोज की गई है। जिसमें छिपकली और इल्ली जैसी दिखाई देने वाले प्राणी भी शामिल है। इस प्रकार की खोज के कारण वैज्ञानिक अध्ययन कर पाते हैं कि किन परिस्थितियों में, किस प्रकार के जीव जंतु जीवित रह सकते हैं और इस अध्ययन के आधार पर यह योजना बनाई जाती है कि मनुष्य, विषम से विषम परिस्थिति में कैसे जीवित रह सकता है।
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