शिवपुरी, 14 मार्च 2026 : ब्राह्मण विरोध की पॉलिटिक्स भी बड़ी अजीब हो गई है। किसने कितने ब्राह्मण का शिकार किया, इसके आधार पर उसको ब्राह्मण विरोधियों का बड़ा नेता माना जाता है। सबसे ज्यादा ब्राह्मणों का शिकार करने के जुनून में पिछोर के विधायक ने 129 किलोमीटर दूर पोहरी विधानसभा के शिक्षक को सस्पेंड करवा दिया। जबकि पार्टी के अनुशासन के हिसाब से, यह दूसरे कार्यकर्ता के क्षेत्राधिकार में घुसपैठ का मामला है।
यह मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले का है। पोहरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत के शासकीय प्राथमिक विद्यालय आदिवासी मोहल्ला के सेमरखेडी बैराड़ मे पदस्थ प्राथमिक शिक्षक साकेत पुरोहित ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की नकल करते हुए एक वीडियो अपने फेसबुक अकाउंट से पोस्ट कर दी थी। इस वीडियो को पिछोर विधानसभा के विधायक प्रीतम लोधी ने आपत्तिजनक माना और 3 मार्च 2026 को शिक्षक की शिकायत अपने लेटर पेड पर जिला शिक्षा अधिकारी को कर दी थी।
पिछोर के विधायक का बैराड़ के शिक्षक पर अध्ययन देखिए
इस शिकायत में विधायक महोदय ने यह भी लिखा कि उक्त प्राथमिक शिक्षक साकेत पुरोहित द्वारा कांग्रेस पार्टी के प्रति अपनी सक्रियता को दिखाकर आनेको बार समाज में गलत संदेश, एवं समाज को भड़काने एवं क्षेत्र में अशांति फैलाने का कार्य किया गया है जो कि शिक्षक, शासकीय सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन करता है। इसलिए इस प्रकरण की जांच कर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्यवाही की जाए।
चापलूस जिला शिक्षा अधिकारी ने नियम विरुद्ध सस्पेंड कर दिया
इस शिकायत के बाद, नेताओं के दबाव में काम करने वाले जिला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने 13 मार्च की देर शाम को शिक्षक साकेत पुरोहित को सस्पेंड कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने आदेश में लिखा है कि श्री साकेत पुरोहित प्राथमिक शिक्षक शा.प्रा.वि.आदिवासी मोहल्ला सेमरखेडी संकुल केन्द्र बैराड विकासखण्ड पोहरी के द्वारा सोशल मीडिया में आपत्तिजनक एवं अशांति फैलाने के उद्देश्य से वीडियो पोस्ट किया गया। जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई। इससे प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि श्री पुरोहित प्राथमिक शिक्षक के द्वारा मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उपनियम (1) (2) एवं (3) "क एवं ग" के अंतर्गत प्रतिकूल कार्य किया गया।
अंत: श्री पुरोहित के द्वारा की गई उक्त अनुशासनहीनता को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के अन्तर्गत श्री साकेत पुरोहित प्राथमिक शिक्षक शा.प्रा.वि.आदिवासी मोहल्ला सेमरखेडी संकुल केन्द्र वैराड विकासखण्ड पोहरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाकर मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी बदरवास नियत किया जाता है।
विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने क्या गलत किया
पिछोर के विधायक श्री प्रीतम सिंह लोधी ने अपनी विधानसभा क्षेत्र के बाहर और बहुत दूर पोहरी विधानसभा के बैराड़ क्षेत्र में काम करने वाले शिक्षक की शिकायत की है। संविधान उनको शिकायत करने का अधिकार देता है परंतु पार्टी पॉलिसी रहती है कि विधायक को अपने विधानसभा क्षेत्र में ही काम करना चाहिए। पोहरी विधानसभा में हजारों कार्यकर्ताओं और सैकड़ो नेता सक्रिय हैं, मजबूत स्थिति में है और श्रीमंत महाराज साहब गड़बड़ी नहीं करते तो पोहरी से विधायक भी उनकी पार्टी का होता। ऐसी स्थिति में जब पोहरी विधानसभा में संगठन इतना मजबूत है तो पिछोर के विधायक को पोहरी के मामलों में दखल देने की क्या जरूरत है। यदि पिछोर के विधायक को कोई जानकारी मिल भी गई थी तो उन्हें अपनी पार्टी के जिला अध्यक्ष माध्यम से पोहरी संगठन के अध्यक्ष को यह सूचना देनी चाहिए थी। सर्जिकल स्ट्राइक करने की जरूरत थी।
क्या पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी ब्राह्मण विरोधी है
यह सवाल जब हमने पॉलीटिकल एनालिस्ट AI Grok से पूछा तो उसने बताया कि, 17 अगस्त 2022 को वीरांगना अवंती बाई लोधी के जन्मदिन कार्यक्रम में उन्होंने ब्राह्मण समाज, पंडितों और कथावाचकों पर अमर्यादित टिप्पणियाँ की थीं। उन्होंने कहा था कि पंडित/कथावाचक लोगों को "पागल बनाते हैं", पैसा लूटते हैं, और सुंदर महिलाओं पर "गंदी नजर" रखते हैं। ब्राह्मण समाज द्वारा देश भर में इसका विरोध किया गया था। भाजपा ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
श्री प्रीतम सिंह लोधी ने पार्टी और ब्राह्मण समाज से माफी मांगी थी। सार्वजनिक रूप से बयान दिए थे। 2023 में उमा भारती के प्रयास और ज्योतिरादित्य सिंधिया की पॉलिटिक्स के चलते उन्हें भाजपा में वापस लिया गया। विधायक बनने के बाद श्री प्रीतम सिंह लोधी फिर से ब्राह्मण विरोधी गतिविधियों में सक्रिय हो गए। उनके कुछ समर्थकों द्वारा ब्राह्मणों के खिलाफ अपशब्द कहने के वीडियो भी वायरल हुए, जिससे विवाद बढ़ा। यहां उल्लेख करना जरूरी है कि भाजपा से निष्कासित होने और भाजपा में वापस आने के बीच में श्री प्रीतम सिंह लोधी उत्तर प्रदेश के जातिवादी संगठनों के संपर्क में थे।
जिला शिक्षा अधिकारी का आदेश नियम विरुद्ध क्यों है
शिकायत स्वीकार करना जिला शिक्षा अधिकारी श्री विवेक श्रीवास्तव की जिम्मेदारी है। शिकायत में पिछोर के विधायक ने कहा है कि मामले की जांच करवाएं। श्री विवेक श्रीवास्तव ने मामले की कोई जांच नहीं करवाई। शिक्षक श्री साकेत पुरोहित को कोई नोटिस नहीं दिया। अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। जो कि एक कर्मचारी का संविधान एक अधिकार है। श्री विवेक श्रीवास्तव द्वारा जारी किए गए निलंबन आदेश में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है। संविधान का उल्लंघन करते हुए श्री विवेक श्रीवास्तव ने एक शिक्षक को सिर्फ इसलिए सस्पेंड कर दिया क्योंकि, एक ऐसे विधायक ने प्रेशर क्रिएट कर दिया था जो खुद को शिवपुरी जिले का सबसे बड़ा नेता मानता है।
जिला शिक्षा अधिकारी को क्या करना चाहिए था
शिवपुरी के जिला शिक्षा अधिकारी को वही करना चाहिए था जो विदिशा की जिला शिक्षा अधिकारी ने किया। विदिशा में शिक्षक ने फेसबुक पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के विरुद्ध अभद्र और अश्वनीय टिप्पणी की। विदिशा के जिले शिक्षा अधिकारी का नाम श्री ए पी सिंह जाटव है। सामान्य तौर पर यह मान लिया जाता है कि श्री ए पी सिंह जाटव जैसे अधिकारी, स्वाभाविक ब्राह्मण विरोधी होते हैं, लेकिन विदिशा के जिला शिक्षा अधिकारी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया बल्कि सिविल सेवा के नियमों का पालन करते हुए शिक्षक को कारण बताओं नोटिस दिया है। डायरेक्ट सस्पेंड नहीं किया।

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