दवा सूंघते ही मिर्गी का मरीज ठीक हो जाएगा, भोपाल का यूनानी मेडिकल कॉलेज और DIPSAR की रिसर्च

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 15 मार्च 2026
: मेडिकल के मामले में भोपाल कई बड़े रिकॉर्ड बना रहा है। केवल एलोपैथी नहीं बल्कि आयुर्वेद के क्षेत्र में भी कई बड़े रिसर्च हो चुके हैं और अब भोपाल का यूनानी मेडिकल कॉलेज Delhi Pharmaceutical Sciences and Research University के साथ मिलकर एक ऐसी दवाई बना रहा है जिसको सूंघते ही मिर्गी का मरीज ठीक हो जाएगा। इसके अलावा एक दर्जन से ज्यादा मानसिक बीमारियों का इलाज होगा। 

New Research by Bhopal Unani College and DIPSAR Looks at Smell-Based Treatment for Epilepsy

यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल के एसोसिएट प्रोफेसर सैयद मोहम्मद अब्बास जैदी बताते हैं कि "यूनानी, आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में मरीजों को दवाओं के खिलाने के अलावा दवाओं के लेप और धुंए के माध्यम से भी दिए जाने का उल्लेख है। यूनानी चिकित्सा पद्धति में मिर्गी जैसे कई दूसरे मानसिक रोगों के लिए परंपरागत तरीकों से कई दवाओं का उपयोग किया जाता रहा है। इसमें कुछ दवाएं ऐसी भी हैं, जिनको धुंए के रूप में मरीज को दिए जाने का पुस्तिकों में उल्लेख है। इससे पता चलता है कि सांस के माध्यम से अंदर जाने वाली दवा भी असरकारक है। इसी को देखते हुए यूनानी चिकित्सा की 3 दवाओं का नैनो इमल्शन तैयार किया जा रहा है।

डॉ सैयद मोहम्मद अब्बास जैदी बताते हैं कि:- 

हब्बे बलसा यानी बलसा के सीड - जो शरीर को आंतरिक रूप से मजबूती देता है और इंटरनल हीलिंग का काम करता है।
उस्ताखुद्दूस या फ्रेंच लैवेंडर - जो सिरदर्द, माइक्रेन, जोड़ों के दर्द, सांस संबंधी समस्याओं आदि में फायदेमंद है। खासतौर से यह दिमांग को शांत करता है और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
जदवार - जो यह तनाव कम करने, दिमागी कमजोरी, मिर्गी जैसे रोगों में फायदेमंद है। 
इन तीनों दवाइयां को मिलाकर एक नैनो इमल्शन तैयार किया जा रहा है। उपरोक्त तीनों दवाइयां से मिलकर बनने वाली नई दवाई का डोज कुछ इस तरीके से रेडी किया जा रहा है कि इसका मोड ऑफ एक्शन काफी तेजी से हो। यह दवाई ना तो खिलाई पिलाई जाएगी और ना ही इंजेक्शन से लगाई जाएगी बल्कि मरीज को सुंघाया जाएगा और इस दवा का डोज सीधे दिमाग तक पहुंचकर तत्काल असर दिखाएगा। 

ड्रग ट्रायल की तैयारी

इस अध्ययन में डॉक्टर अब्बास जैदी के साथ दिल्ली फार्मास्युअकल साइंस एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गौरव कुमार जैन भी इस अध्ययन को कर रहे हैं। डॉक्टर अब्बास जैदी बताते हैं कि "इस दवा को लेकर 2 चरण पूरे हो चुके हैं, जल्द ही इसका ड्रग ट्राइल शुरू किया जाएगा। नैनो इमल्शन बनाए जाने के बाद यह कितनी प्रभावी है, इनका कोई दुष्प्रभाव तो नहीं हैं, इस पर रिसर्च चल रही है। यह पता लगाए जाने के बाद जल्द ही इसका उपयोग मिनिस्ट्री ऑफ आयुष की मदद से पेशेंट के ऊपर ट्रायल किया जाएगा। बेहतर रिजल्ट आने पर इसका उपयोग मरीजों पर किया जाएगा। 

भोपाल में यूनानी चिकित्सा का प्राचीन इतिहास

भोपाल में यूनानी चिकित्सा का बड़ा प्राचीन इतिहास रहा है। जब भोपाल आदिवासी राजाओं के संरक्षण में था तब यहां पर मुस्लिम समाज के बुजुर्गों द्वारा यूनानी चिकित्सा के चुनौती पूर्ण इलाज और बड़े प्रयोग किए जाते थे। बाद में दोस्त मोहम्मद खान के खानदान ने भोपाल को विलायती रंग में रंग दिया। आजादी के बाद भी यूनानी चिकित्सा को प्रोत्साहन नहीं मिला लेकिन संरक्षण मिला जिसके कारण भोपाल में आज भी यूनानी चिकित्सा और भोपाल के लोगों में यूनानी विशेषज्ञ का डीएनए मौजूद है।
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