भोपाल, 30 मार्च 2026: बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा और भुवन बर्मन ने भोपाल समाचार को बताया है कि बरगी जलाशय में मत्स्य उत्पादन की भारी गिरावट के कारण घंसौर विकास खंड बीजासेन, कुदवारी, चमरवाह,गाङाघाट, बसुरिया आदि गांवों के सैकड़ों मछुआरे रोजगार के लिए पलायन कर गए हैं। मछुआरा काम की तलाश में नवरात्र के बाद दो पिकअप गाड़ी से बाणसागर जलाशय शहडोल, माचागोरा जलाशय छिंदवाड़ा और भीमगढ़ जलाशय सिवनी निकल गया है।
Bargi Dam Fishermen Migrating to Other Dams, Livelihood Crisis Deepens
बरगी जलाशय के 16 हजार हेक्टेयर में मत्स्याखेट कार्य किया जाता है।इस जलाशय में सिवनी, मंडला और जबलपुर जिले के 54 प्राथमिक मछुआरा सहकारी समिति मत्स्याखेट कार्य करती है जिसमें सिवनी जिले के 18 मछुआरा सहकारी समिति शामिल है।मध्यप्रदेश राज्य मत्स्य महासंघ द्वारा 7 बङे और 19 मझौले मिलाकर कुल 26 जलाशयों का नियंत्रण किया जाता है। जिसका कुल क्षेत्रफल 2.29 लाख हेक्टेयर है। 90 के दशक में तत्कालीन सरकार ने राज्य मत्स्य विकास निगम को समाप्त कर "राज्य मत्स्य महासंघ" के माध्यम से कार्य का संचालन शुरू किया था। जिसका उद्देश्य था कि जलाशय और मछुआरा विकास के लिए स्थानीय सक्रिय मछुआरा प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए समस्त गतिविधियां उनके अनुसार संचालित की जाए।
विगत कुछ वर्षों से जलाशय में मत्स्य उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही है। जिसके कारण मछुआरा रोजगार के लिए बाहर पलायन को बाध्य है।इस हेतु सरकार से वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाने की लिखित मांग मछुआरों द्वारा किया जा रहा है। परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हो रहा है। ज्ञात हो कि नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध से 162 गांव विस्थापित एवं प्रभावित हुआ है। जिसमें मछुआरा समाज की अच्छी संख्या है। जिनकी आजिविका इसी जलाशय पर निर्भर है। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ ने सरकार से मांग किया है कि जलाशय में घटते मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए दीर्घकालीन योजना बनाए। राज्य मत्स्य महासंघ केवल जलाशय का ठेका कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है।उसे जलाशय विकास और मछुआरा विकास के प्रति जवाबदेह और जलाशयों में सही मात्रा और पारदर्शी बीज संचय व्यवस्था बनाया जाए।

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