भोपाल, 30 मार्च 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में "इकबाल मैदान" के नाम को लेकर हाई प्रोफाइल पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य श्री प्रियंका कानूनगो द्वारा नाम बदलने की मांग की गई है। जबकि ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी इसका विरोध कर रही है। आईए जानते हैं कि, इस हाई प्रोफाइल पॉलिटिक्स के पीछे का कारण क्या है:-
इकबाल मैदान का नाम बदलकर पूर्वजों को श्रद्धांजलि देंगे: प्रियंक कानूनगो
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने एक्स पर एक वीडियो अपलोड किया था। इसमें वे इकबाल की फोटो पोस्ट करते हुए कह रहे हैं कि क्या पाकिस्तान के नाम का प्रस्ताव रखने वाले इकबाल के नाम पर भोपाल में कोई मैदान होना चाहिए। यह हमारे माथे पर कलंक है। एक्स पर वीडियो पोस्ट करने के साथ कानूनगो ने यह भी ट्वीट किया है कि पाकिस्तान बनाये जाने का प्रस्ताव लिखने वाले इकबाल के नाम पर हमारे भोपाल में इकबाल मैदान होना हमारे माथे पर कलंक है। भोपाल का नवाब भोपाल की गरीब जनता का हमारे पूर्वजों का खून चूस-चूस कर इस इकबाल को उसके ऐशो आराम के लिए हजारों रुपया वजीफा में देता था। हम इस कलंक को मिटाकर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देंगे।
ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने मैदान में प्रदर्शन किया
प्रियंक कानूनगो के बयान के विरोध में सोमवार को ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने मैदान में प्रदर्शन किया और बयान को भड़काऊ बताया। समिति के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि इस तरह के बयान देश में तनाव का माहौल पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि अल्लामा मुहम्मद इकबाल विश्व प्रसिद्ध शायर रहे हैं, जिन्होंने “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा” जैसा तराना लिखा, जिसे आज भी देशभर में गर्व के साथ गाया जाता है। ऐसे में उनके नाम पर बने मैदान को लेकर इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. दानिश खान ने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश बताते हुए कहा कि इस तरह के मुद्दे समाज के लिए खतरा बन सकते हैं।
1930 में इकबाल ने रखा था अलग मुस्लिम राज्य का विचार
अल्लामा मुहम्मद इकबाल ने सबसे पहले भारत के उत्तर-पश्चिम में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों को मिलाकर एक अलग मुस्लिम राज्य का विचार प्रस्तुत किया था। उन्होंने 1930 में मुस्लिम लीग के इलाहाबाद अधिवेशन में अध्यक्षीय भाषण में इस अलग राष्ट्र की अवधारणा (कांसेप्ट) रखी थी। इकबाल ने अपने प्रसिद्ध इलाहाबाद भाषण में सांप्रदायिक तनाव के समाधान के रूप में अलग मुस्लिम मातृभूमि का विचार दिया।
उन्होंने पंजाब, उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत, सिंध और बलूचिस्तान को एक स्वायत्त मुस्लिम राज्य के रूप में संगठित करने की पैरवी की थी। भले ही 1940 में औपचारिक 'लाहौर प्रस्ताव' आया, लेकिन पाकिस्तान आंदोलन की वैचारिक नींव इकबाल के 1930 के भाषण को ही माना जाता है।
पाकिस्तान शब्द का इस्तेमाल बाद में चौधरी रहमत अली ने 1933 में अपने पत्र में पहली बार किया था, लेकिन इस अलगाववादी राष्ट्र की परिकल्पना इकबाल की थी। लाहौर प्रस्ताव (1940), जिसे बाद में 'पाकिस्तान प्रस्ताव' कहा गया, मुस्लिम लीग द्वारा 23 मार्च 1940 को पारित किया गया था, जो अंततः देश विभाजन का आधार बना।
इकबाल का भोपाल से क्या रिश्ता है
रिपोर्ट के अनुसार शायर अल्लामा इकबाल चार बार भोपाल आए थे और यहां लगभग छह महीने बिताए थे, इस दौरान उन्होंने अपनी प्रसिद्ध शायरी की रचना की थी। उनकी याद में भोपाल में इकबाल मैदान है, जहां की दीवारों पर उनकी शायरी अंकित है। यह मैदान नवाबों के दौर की याद दिलाता है और एक समय यह सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था।

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