नई दिल्ली, 26 मार्च 2026: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना की चर्चाएं अभी समाप्त नहीं हुई है कि मिलावटी दूध का तांडव दिखाई देने लग गया है। अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 'सुओ मोटो' (suo motu) कार्रवाई शुरू कर दी है।
Breaking: Adulterated Milk Tragedy Leaves 16 Dead, National Human Rights Commission of India Takes Strict Action
यह घटना आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी (East Godavari) जिले के लालचेरुवु (Lalacheruvu), चौडेश्वरनगर (Chowdeshwarannagar) और स्वरूपनगर (Swarupnagar) क्षेत्रों में हुई है। अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि कई लोग अस्पताल में भर्ती है। रिपोर्टों के अनुसार, दूध में 'एथिलीन ग्लाइकॉल' (ethylene glycol) नामक एक अत्यधिक जहरीला पदार्थ मिलाया गया था। इसके सेवन से पीड़ितों को मल्टी-ऑर्गन फेल्योर (multi-organ failure) का सामना करना पड़ा।
Investigation and Suspected Source
बीमार पड़ने वाले लोगों में पेट दर्द (abdominal pain), उल्टी (vomiting), एनुरिया (anuria - पेशाब न आना) और एक्यूट रीनल डिसफंक्शन (acute renal dysfunction) जैसे गंभीर लक्षण देखे गए। इस जहरीले दूध का सबसे बुरा असर बुजुर्गों और छोटे बच्चों पर पड़ा है। शुरुआती जांच में संक्रमण का संदिग्ध स्रोत नरसापुरम (Narsapuram) गांव में स्थित एक डेयरी को माना जा रहा है। यह डेयरी इलाके के 100 से अधिक घरों में दूध की सप्लाई कर रही थी।
NHRC Intervention
मानवाधिकार आयोग ने इस घटना को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन (violation of human rights) माना है। आयोग ने आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
इस रिपोर्ट में आयोग ने निम्नलिखित जानकारियां मांगी हैं:
- वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और जांच की प्रगति।
- दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई।
- मृतकों के परिजनों (next of kin) को दिए गए मुआवजे (compensation) का विवरण।
PIB दिल्ली द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह मामला 23 मार्च 2026 को मीडिया में आने के बाद प्रकाश में आया था। प्रशासन अब इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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