मुंबई, 9 फरवरी 2026: राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने एक बयान के साथ उन सभी बुद्धिजीवियों का मुंह बंद कर दिया जो भारतीय व्यवस्था का प्रायोजित विरोध कर रहे हैं। डॉ भागवत ने कहा कि, सरसंघचालक का पद किसी भी जाति के लिए आरक्षित नहीं है। यदि अनुसूचित जाति और जनजाति का व्यक्ति योग्य होगा तो वह भी सरसंघचालक बन सकता है। RSS में चयन का आधार योग्यता है, जाति नहीं।
RSS में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होता
मोहन भागवत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह के मौके पर मुंबई में आयोजित एक व्याख्यान माला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, "संघ का सरसंघचालक कौन बने तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र सरसंघचालक नहीं बन सकता। जो हिंदू है वही बनेगा। जो एससी/एसटी है वह भी सरसंघचालक बन सकता है और कुछ है तो भी बन सकता है। हमारे यहां इस तरह से कार्यकर्ता नियुक्त नहीं होते कि कौन किस जाति का है। जो काम करेगा वह होगा।"
संघ को ब्राह्मणों ने विस्तार दिया लेकिन ब्राह्मणवादी नहीं बनाया
संघ प्रमुख ने कहा, "जब संघ की शुरुआत हुई थी तो यह छोटा था। एक छोटी सी बस्ती में संघ का काम शुरू हुआ और वह ब्राह्मण बस्ती थी। तो पहले संघ से सभी पदाधिकारी ब्राह्मण ही रहते थे। लोग कहते थे कि संघ ब्राह्मणों का ही है और आज भी कहते हैं क्योंकि लोग यही देखते हैं कि अपने कितने हैं? लेकिन ऐसा नहीं है।"
RSS का विस्तार जाति के आधार पर नहीं होता
मोहन भागवत ने आगे कहा, "हम जाति में विभाजित करके विस्तार नहीं करते। हम भौगौलिक क्षेत्र में बढ़ाते हैं। 10-10 हजार की बस्ती होती है, शहरों में और हर बस्ती में काम होना चाहिए। 10-10, 12-12 गांव का ग्रुप होता है मंडल में और हर मंडल में काम होना चाहिए। भौगौलिक रूप से बढ़ते हैं तो सभी बस्तियां संपर्क में आती हैं। सभी जाति के लोग आते हैं।"

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