इंदौर, 9 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित राज्य अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा 2025 को लेकर उम्मीदवारों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हाल ही में अजय प्यासी नामक एक अभ्यर्थी ने आयोग के सचिव को पत्र लिखकर विज्ञापन और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में दिख रही विसंगतियों पर स्पष्टीकरण की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
मुख्य विवाद सिविल इंजीनियरिंग स्ट्रीम की रिक्तियों को लेकर है। आधिकारिक विज्ञापन के अनुसार, सिविल इंजीनियरिंग में कुल 21 रिक्तियां दिखाई गई हैं, जो पूरी तरह से PWD (दिव्यांग) कोटे के अंतर्गत आरक्षित प्रतीत होती हैं। हालांकि, जब अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर रहे हैं, तो पोर्टल में ऐसे विकल्प मौजूद हैं जो बिना दिव्यांगता वाले अनारक्षित (UR) वर्ग के उम्मीदवारों को भी आवेदन करने की अनुमति दे रहे हैं।
उम्मीदवारों की मुख्य चिंताएं: अजय प्यासी ने अपने पत्र में आयोग के सामने कुछ गंभीर सवाल रखे हैं:
• क्या बिना दिव्यांगता वाले UR श्रेणी के उम्मीदवार इन पदों के लिए वास्तव में पात्र हैं?
• यदि सामान्य उम्मीदवार पात्र नहीं हैं, तो आवेदन प्रणाली उन्हें प्रक्रिया में आगे बढ़ने की अनुमति क्यों दे रही है?
• स्पष्टता के अभाव में उम्मीदवारों को डर है कि कहीं उनका आवेदन शुल्क और कीमती समय व्यर्थ न चला जाए।
जल्द स्पष्टीकरण की मांग:
पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि रिक्तियों की स्थिति स्पष्ट न होने से उम्मीदवारों में भ्रम फैल रहा है। अभ्यर्थियों ने आयोग से अनुरोध किया है कि इस मामले में जल्द से जल्द एक आधिकारिक और स्पष्ट बयान जारी किया जाए, ताकि वे अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन करने का सही निर्णय ले सकें।
अब देखना यह होगा कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग इस तकनीकी विसंगति या नीतिगत स्पष्टता पर कब तक अपनी प्रतिक्रिया देता है।

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