भोपाल समाचार, 14 फरवरी 2026: सिस्टम में बैठे हुए कुछ लोगों को, गरीब ब्राह्मण को प्रताड़ित करने में आनंद आता है। गरीब ब्राह्मण विद्यार्थी अथर्व चतुर्वेदी ने NEET क्लियर कर लिया था परंतु एडमिशन नहीं दिया। अथर्व ने हार नहीं मानी, वह किसी परशुसेना के पास भी नहीं गया। उसने संविधान उठाया, अपने अधिकार पढ़े और अपना कैसे खुद लड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने भी विशेष अधिकार का उपयोग करते हुए उसको न्याय दिया। यह ऐतिहासिक मामला है, जो हमेशा याद रखा जाएगा।
जबलपुर के निर्धन ब्राह्मण विद्यार्थी अथर्व चतुर्वेदी की कहानी
तो कहानी कुछ ऐसी है कि, मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में रहने वाला अथर्व चतुर्वेदी एक निर्धन ब्राह्मण विद्यार्थी है परंतु पढ़ाई में हमेशा आगे रहा। साल 2024 में उसने NEET क्वालीफाई किया। उसको 530 नंबर मिले। EWS कोटा में उसका एडमिशन हो जाना चाहिए था, लेकिन जैसा कि हमने बताया, सिस्टम में बैठे हुए लोगों को, गरीब और मिडिल क्लास को तंग करने में मजा आता है। उन्होंने सरकारी मेडिकल कॉलेज में तो EWS कोटा लागू किया लेकिन प्राइवेट कालेजों में लागू नहीं किया। इसके कारण अथर्व और उसके जैसे सैकड़ो मेरिट होल्डर गरीब विद्यार्थियों को प्राइवेट कालेजों में एडमिशन नहीं मिला। बाकी सब ने इसको अपनी किस्मत मान लिया लेकिन अथर्व ने वह रास्ता चुना, जिसने उसे इतिहास में दर्ज कर दिया।
अथर्व ने पॉलिटिक्स नहीं की, कोई धरना प्रदर्शन नहीं, किसी नेता के सामने झोली नहीं फैलाई, किसी परशु सेना से मदद नहीं मांगी। उसने मेडिकल की किताबें बंद की और संविधान उठाया। अपने अधिकारों का अध्ययन किया और फिर शुरू हुई एक कानूनी लड़ाई, जो किसी व्यक्ति से नहीं बल्कि सिस्टम से थी। सिस्टम यानी नेशनल मेडिकल काउंसिल। हाई कोर्ट ने अथर्व की याचिका खारिज कर दी। एक बार सिस्टम को कहा कि सिस्टम बनाइए। सिस्टम ने कहा, हां बना देंगे, और पिटीशन क्लोज हो गई। अथर्व को उसका अधिकार नहीं दिया गया। अथर्व सुप्रीम कोर्ट गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की भीड़ में वह जो कहना चाहता था उसको सुना ही नहीं गया। फिर भी अथर्व ने हार नहीं मानी।
सबसे आखरी में अथर्व चतुर्वेदी ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। निर्धन ब्राह्मण है, सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को फीस देने के लिए पैसा नहीं है। इसलिए अथर्व ने खुद अपना केस लड़ने का फैसला किया। सिस्टम की तरफ से बड़े अनुभवी वकील आए थे। 10 फरवरी को चीफ जस्टिस का बर्थडे था। इसी दिन अथर्व की तारीख लग गई। बेंच उठने वाली थी, इस बार भी याचिका खारिज होते हुए दिखाई दे रही थी, लेकिन अथर्व ने बड़ी ही विनम्रता पूर्वक सिर्फ 10 मिनट मांगे। इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया।
सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 का उपयोग करते हुए अथर्व के पक्ष में फैसला सुनाया। आर्टिकल 142 सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामलों में न्याय करने का विशेष अधिकार देता है, जिसमें कोई नियम नहीं बना है। नेशनल मेडिकल काउंसिल ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में EWS एडमिशन के लिए कोई नियम नहीं बनाया। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 के तहत फैसला दिया। अब केवल अथर्व को नहीं बल्कि देश भर के तमाम अथर्वों को प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में इस केस के आधार पर एडमिशन मिलेगा। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (पत्रकार एवं विधि सलाहकार)

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