भोपाल समाचार, 14 फरवरी 2026: भोपाल के केरवा डैम क्षेत्र में आज प्रशासन का भारी पीला पंजा चला। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त रुख के बाद, जिला प्रशासन ने शनिवार को केरवा डैम के कैचमेंट एरिया में करीब 30 एकड़ जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया है। पत्रकारों को कार्रवाई के फोटो वीडियो उपलब्ध करवाए गए ताकि सबको पता चले की कार्रवाई हो गई है लेकिन मजे की बात देखिए, इसके खिलाफ कार्रवाई हुई शिकायत से लेकर आदेश तक और कार्रवाई करने वाले कलेक्टर के डॉक्यूमेंट में उसका नाम ही नहीं है।
क्या है यह पूरा मामला?
यह पूरा विवाद पर्यावरण कार्यकर्ता रशीद नूर खान द्वारा एनजीटी में दायर याचिका (OA 49/2025) से शुरू हुआ। याचिका में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया था कि भू-माफियाओं ने महुआखेड़ा क्षेत्र में डैम के 'फुल टैंक लेवल' (FTL) के भीतर 2000 से अधिक डंपरों के जरिए मिट्टी, कोपरा और मुरम भरकर जमीन को समतल कर दिया था। इसका मुख्य उद्देश्य जलाशय के जलग्रहण क्षेत्र को पाटकर वहां अवैध कॉलोनियां काटना था।
10 फीट ऊंची मिट्टी की परत बिछाई गई थी
एनजीटी द्वारा गठित संयुक्त समिति की जांच में पाया गया कि कई स्थानों पर 10 फीट ऊंची मिट्टी की परत बिछाई गई थी, जिससे जलाशय की जल भंडारण क्षमता और पारिस्थितिकी को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसी रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी की भोपाल बेंच ने 21 जुलाई 2025 को आदेश जारी कर अवैध भराव को तुरंत हटाने और दोषियों पर पर्यावरणीय मुआवजा (Environmental Compensation) लगाने के निर्देश दिए थे।
प्रशासन ने मानसून के बहाने कार्रवाई को टाल दिया था
4 अगस्त 2025 को जब प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की टीम ने स्थल निरीक्षण किया, तो बारिश के कारण रास्ते अत्यंत कीचड़ भरे और दुर्गम पाए गए थे। अधिकारियों ने रिपोर्ट में बताया था कि भारी मशीनें जैसे पोकलेन और डंपर वहां नहीं पहुंच पा रहे हैं और मलबे को हटाने से जलाशय में गंदा पानी (muddy runoff) मिलने का खतरा है। इसी कारण MPPCB ने सुझाव दिया था कि पूर्ण अनुपालन मानसून के बाद ही संभव हो सकेगा।
एनजीटी ने भविष्य के लिए व्यापक निर्देश दिए हैं:
• जल संसाधन विभाग को महीने में कम से कम दो बार क्षेत्र की गश्त करनी होगी।
• राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को दो महीने के भीतर प्रभाव क्षेत्र का सीमांकन करना होगा और 33 मीटर के बफर जोन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा।
• कलेक्टर को कैचमेंट एरिया में वृक्षारोपण और मिट्टी संरक्षण के कार्य शुरू करने का जिम्मा सौंपा गया है।
राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी:
अधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि पर्यावरण को बचाना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है। प्रशासन वित्तीय या प्रशासनिक कठिनाइयों का बहाना बनाकर इससे पल्ला नहीं झाड़ सकता, क्योंकि केरवा डैम भोपाल के लिए पेयजल का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है।
पार्टी बहुत पावरफुल है
इस मामले में दोषी पार्टी काफी पावरफुल है। उसकी पावर का पता इस प्रकार चलता है कि 2025 में शिकायत हुई। शिकायत करने वाले ने पार्टी का नाम नहीं लिया। तमाम सर्वे इत्यादि हुए, लेकिन किसी ने पार्टी का नाम नहीं लिया। यहां तक कि NGT की टीम ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की लेकिन उनकी रिपोर्ट में भी पार्टी का नाम नहीं है। मामले का फैसला हो गया है लेकिन दोषी पार्टी की पहचान की प्रक्रिया अभी भी जारी है:-
सरकारी डॉक्यूमेंट के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जिला कलेक्टर, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) और नगर निगम को उन व्यक्तियों की पहचान करने (Trace out) का सख्त निर्देश दिया है जिन्होंने नियमों का उल्लंघन कर वहां मिट्टी और कोपरा डाला है।
एसडीएम हुजूर द्वारा एक टीम गठित की गई है, जिसका एक मुख्य कार्य एफटीएल (FTL) क्षेत्र में अवैध डंपिंग के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करना (Identify) है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संबंधित विभागों को पत्र लिखकर उन निजी भूमि स्वामियों की जानकारी (खसरा विवरण सहित) मांगी है, जिनकी जमीन पर यह कोपरा डंप किया गया है, ताकि उनके खिलाफ नामजद कार्रवाई की जा सके।
पार्टी का नाम सबको पता है। थाने के सिपाही को बोलोगे तो वह भी पता करके ला देगा लेकिन कलेक्टर से लेकर पूरा जिला प्रशासन पार्टी के नाम का खुलासा नहीं कर रहा है। NGT का फैसला आ गया, पार्टी पर जुर्माना लगाना है, लेकिन भोपाल कलेक्टर पार्टी का नाम नहीं बता रहे।
जमीन प्राइवेट है तो फिर जमीन के मालिक को पार्टी क्यों नहीं बनाया
इस केस में एक और खास बात दिखाई देती है। जिस जमीन पर कार्रवाई हुई वह सरकारी नहीं बल्कि प्राइवेट है। NGT को यह बात मामले की शुरुआत में ही पता चल गई थी परंतु फिर भी जमीन के मालिक को पार्टी नहीं बनाया गया। पर्यावरण की सुरक्षा के नाम पर आदेश जारी कर दिया है, पीला पंजा भी चल गया है परंतु जमीन के मालिक की अनुपस्थिति में इस प्रकार की कार्रवाई, कानूनी तौर पर अवैध मानी जाती है। जिस मामले में जमीन का मालिक पार्टी ही नहीं था, उस मामले में फैसला कैसे हो सकता है।

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