सारी दुनिया में लोग पैसों के लिए संघर्ष करते हैं। अपन सब अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार जितना ज्यादा हो सकता है, उतना पैसा बनाने की कोशिश करते हैं। प्रॉब्लम यह नहीं है कि हम लोग मेहनत नहीं करते, बल्कि प्रॉब्लम यह है कि हमको किसी ने, इन्वेस्टमेंट के नियम, टैक्स की बारीकियां, लोन का फायदा कब और कैसे उठाना चाहिए इत्यादि महत्वपूर्ण बातें किसी ने नहीं सिखाई। यही कारण है कि हम अपने कमाए पैसे को कंट्रोल नहीं कर पाते, लेकिन गुड न्यूज़ यह है कि, सही जानकारी प्राप्त करके हम इस स्थिति को बदल सकते हैं।
लोन के ऑफर को लपकना नहीं है
लाइफ में कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी होता है। जब भी कोई लोन का ऑफर मिलता है तो जल्दबाजी में कोई डिसीजन ना बनाएं। यदि लोन की जरूरत भी है तब भी, लोन की सबसे आसान प्रक्रिया के स्थान पर सभी विकल्पों की धैर्य पूर्वक तुलना करें और ब्याज के अंतर को ठीक प्रकार से कैलकुलेट करें। कई बार ऐसा भी होता है कि लोन की प्रक्रिया बहुत आसान होती है लेकिन उसकी शर्तों बहुत कठोर होती है। इसलिए लोन की शर्तों को ध्यानपूर्वक पढ़ें। यह भी याद रखिए कि आपके लिए जितना अधिकतम लोन उपलब्ध है, उतना लेने की जरूरत नहीं है बल्कि जितना आपके लिए बहुत जरूरी है, केवल उतना लोन लिया जाना चाहिए। हमेशा याद रखिए की लोन को ब्याज सहित वापस करना है। इसलिए लोन लेने से पहले आप जो एक्सरसाइज करेंगे, वह आपका फ्यूचर के लिए लाभदायक और आरामदायक होगी।
ऐसा लोन जब भी मिले लपक लेना चाहिए
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि बहुत कम ब्याज दर पर होम लोन मिल जाता है। यदि ऐसा होता है तो उसे लंबे समय के लिए, और अधिकतम उपलब्धता पर लेना चाहिए। यदि कुछ पैसा बच जाता है तो उसे ऐसी जगह इन्वेस्ट कर सकते हैं जहां से होम लोन की तुलना में अधिक ब्याज दर प्राप्त हो रही है। सामान्य तौर पर ऐसा ऑफर नहीं मिलता लेकिन कभी-कभी मौका मिल जाता है और यदि मिल जाए तो छोड़ना नहीं चाहिए।
म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट से पहले इस बिंदु को जरूर ध्यान दें
यदि आप कहीं पर भी इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं तो उसके लिए फीस के गणित को समझना बहुत जरूरी है। खास तौर पर म्यूचुअल फंड और इस प्रकार की निवेश योजनाओं में फीस का बहुत छोटा अंतर लॉन्ग टर्म में आपका रिटर्न को बहुत अधिक स्तर पर प्रभावित कर देता है। इसलिए हमेशा इस प्रकार के फंड चुनना चाहिए जहां पर प्रोसेसिंग फीस या किसी भी दूसरे प्रकार की फीस बहुत कम लगती हो।
रिटायरमेंट के बाद इन्वेस्टमेंट की स्ट्रेटजी भी बदलना चाहिए
सरकारी कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद भी बिल्कुल वैसे ही इन्वेस्टमेंट करते हैं, जैसे वह नौकरी के दौरान कर रहे थे। जबकि रिटायरमेंट के बाद काफी अच्छे टैक्स बेनिफिट मिल जाते हैं। इसलिए अपने टैक्स बेनिफिट को समझें और उनका ध्यान में रखते हुए अच्छा इन्वेस्टमेंट करें। कुछ इन्वेस्टमेंट योजनाएं ऐसी होती है जो आपको टैक्स से छूट दिलाता है और कुछ योजनाएं ऐसी होती है जहां टैक्स से छूट नहीं मिलती लेकिन रिटर्न काफी अच्छा मिलता है।
TAX से डरने की जरूरत नहीं है
टैक्स छूट के लालच में बहुत कम रिटर्न देने वाली योजना का चुनाव करने से बेहतर है कि टैक्स का भुगतान करते हुए अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जाए। यह सब कुछ आपके कैलकुलेशन पर डिपेंड करता है। बस केवल एक फंडामेंटल क्लियर रखिए, आपको कैलकुलेट करना है कि अंत में आपके हाथ में कितना पैसा आएगा। टैक्स के डर को अपने दिमाग से हटा दीजिए।
rule of money, और फिक्स फार्मूला के चक्कर में मत पड़िए
आपको ऐसे बहुत सारे आर्टिकल मिल जाएंगे जो आपको इन्वेस्टमेंट के बारे में कुछ नियम और फार्मूले समझने की कोशिश करेंगे। उदाहरण के लिए:
- 50/30/20 rule of money
- 50 30 20 rule of salary
- पैसे के लिए 70-10-10-10 नियम
- 75-15-10 rule
इन सब के चक्कर में पढ़ने की जरूरत नहीं है। हर आदमी की अपनी जरूरत होती है, उसके अपने खर्च होते हैं और उसकी बचत करने की क्षमता भी अपनी ही होती है। आपको अपना फार्मूला खुद बनाना है और बाजार एवं उम्र के साथ उसमें संशोधन भी करना है।
इस मामले में लापरवाही, हानिकारक होती है
यह छोटी-मोटी बातें आपका भविष्य बदल देती है। हम में से बहुत सारे तो ऐसे भी होते हैं जो इतने लापरवाह होते हैं कि, सैलानी की साल भर की सेविंग, सैलरी अकाउंट में ही पड़ी रहती है। हम उसका फिक्स डिपाजिट तक नहीं बनाते। जबकि हम सब जानते हैं कि सेविंग अकाउंट की तुलना में फिक्स डिपॉजिट में डबल ब्याज मिल जाता है। यदि बीच में जरूरत पड़ी तो फिक्स डिपाजिट को तत्काल ब्रेक किया जा सकता है, ऐसा करने से कोई नुकसान नहीं होता और ना ही इज्जत खराब होती है।
तो कुल मिलाकर बात सिर्फ इतनी सी है कि, पैसा कमाने के साथ-साथ उसका सही उपयोग करना भी सीखना पड़ेगा। यह व्हाट्सएप पर मिलने वाले मनोरंजन और अन्य प्रकार के मैसेज की तरह आसान नहीं है लेकिन यदि आपने केलकुलेटर उठा लिया तो यकीन मानिए मुश्किल भी नहीं है।

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