मध्य प्रदेश विधानसभा में सरकारी कालेजों के मामले, मंत्री गोलमोल जवाब देते रहे

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 23 फरवरी 2026
: मध्य प्रदेश विधानसभा में आज सरकारी कालेजों में शिक्षकों की कमी से लेकर कई प्रकार की व्यवस्थाओं और गड़बड़ियों का मामले विधानसभा में उठाए गए। कई कॉलेजों को प्वाइंट आउट किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विधायकों की ज्यादातर सवालों का गोलमोल जवाब देते रहे। 

Government College Matters Spark Heated Exchange in MP Assembly

विधानसभा पटल पर वार्षिक प्रतिवेदन कार्यवाही के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के वार्षिक प्रतिवेदन सदन के पटल पर रखे। इनमें महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (छतरपुर), देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (इंदौर), जीवाजी विश्वविद्यालय (ग्वालियर), और अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय (भोपाल) जैसे प्रमुख संस्थानों के वर्ष 2023-24 और 2024-25 के प्रतिवेदन शामिल थे। 

• श्री भूपेंद्र सिंह ने पूछा कि खुरई कॉलेज में 2077 छात्र होने के बावजूद कोई स्टेडियम क्यों नहीं है? उन्होंने मालथौन और बांदरी कॉलेजों में भी शिक्षकों के आधे से अधिक पद रिक्त होने पर चिंता जताई और नए पीजी (स्नातकोत्तर) कोर्स शुरू करने की मांग की।
मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि खुरई कॉलेज में स्टेडियम के लिए तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए अतिथि विद्वानों की व्यवस्था की गई है और लोक सेवा आयोग (2022) के माध्यम से 2053 पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन है।

• श्री बृजेंद्र प्रताप सिंह (पन्ना) ने पन्ना और अजयगढ़ कॉलेजों में शैक्षणिक स्टाफ की कमी और पीजी कक्षाओं की अनुपलब्धता पर सवाल किए। उन्होंने पूछा कि पन्ना कॉलेज में 72 पदों में से 32 पद खाली क्यों हैं और खोरा कॉलेज में केवल एक ही अतिथि विद्वान क्यों है?
मंत्री ने आश्वासन दिया कि अजयगढ़ और पन्ना के कॉलेजों में आगामी सत्र (जुलाई 2026) से पीजी कक्षाएं और नई व्यवस्थाएं शुरू कर दी जाएंगी।

• विधायकों ने खुरई और पन्ना में शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ करने की मांग की।
• मंत्री परमार ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 13 अगस्त 2025 से अगले तीन वर्षों तक नए विधि महाविद्यालय या पाठ्यक्रम खोलने पर 'मोरटोरियम' (रोक) लगा रखी है। यह रोक हटने के बाद ही सरकार जिला स्तर पर विधि महाविद्यालय खोलने पर विचार करेगी।

अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों की शिक्षा और छात्रवृत्ति 

• विधायक श्रीमती रीति पाठक ने पिछड़े वर्ग के छात्रों की उच्च शिक्षा को लेकर सवाल पूछे। क्या सरकार एससी/एसटी छात्रों की छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने या उनके लिए अलग पीजी कॉलेज खोलने की योजना बना रही है?
जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में छात्रवृत्ति बढ़ाने या पृथक कॉलेज खोलने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, उन्होंने बताया कि 'आकांक्षा योजना' के तहत इन छात्रों को JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग दी जा रही है।

गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना 

• विधायक श्री राजन मंडलोई ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले एससी/एसटी छात्रों के साथ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना होती है, जिसके कारण आत्महत्या जैसी घटनाएं होती हैं। (यह प्रश्न MBBS फर्स्ट ईयर स्टूडेंट रोशनी कलेश की आत्महत्या से संबंधित है।)
राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इन आरोपों से असहमति जताई। उन्होंने अपने स्वयं के इंजीनियरिंग जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनौतियों का सामना मेहनत से किया जाना चाहिए और संस्थानों में सभी वर्गों को समान स्नेह मिलता है।
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