भोपाल, 23 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' वर्तमान में प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रमुख आधार बनी हुई है। इसके कारण मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी लेकिन सब जानते हैं कि, यह एक अस्थाई व्यवस्था है और इस योजना को एक न एक दिन बंद हो जाना है। आज विधानसभा में इस योजना को लेकर काफी गंभीर डिस्कशन हुए।
Ladli Behna Yojana New Registrations, Raised in MP Assembly, CM Responds
मार्च 2023 में शुरू हुई 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और स्वावलंबी बनाना है। जून 2023 से इस योजना के तहत सीधे लाभार्थियों के खातों में राशि का अंतरण शुरू किया गया था। पंजीकरण और लाभार्थी आँकड़े योजना के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इसकी शुरुआत से अब तक कुल 1,31,06,525 महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। वर्तमान में, इनमें से 1,25,29,051 रजिस्ट्रेशन सक्रिय हैं, जिन्हें नियमित रूप से मासिक सहायता प्राप्त हो रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक सरकार इस योजना पर 18,528 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी है।
बढ़ती सहायता राशि और भविष्य का लक्ष्य
योजना की शुरुआत ₹1000 प्रतिमाह की सहायता राशि से हुई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹1500 प्रतिमाह कर दिया गया है। सरकार ने रक्षाबंधन जैसे विशेष अवसरों पर ₹250 की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य इस राशि को वर्ष 2028 तक बढ़ाकर ₹3000 प्रतिमाह करना है।
पात्रता और नियम
योजना के वर्तमान नियमों के अनुसार, 21 से 60 वर्ष की आयु सीमा वाली विवाहित महिलाएं इसकी पात्र हैं। जैसे ही कोई लाभार्थी महिला 60 वर्ष की आयु पूर्ण करती है, उसे इस योजना से बाहर कर दिया जाता है, जिसके बाद वह पात्रता अनुसार वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ ले सकती है। इसके अतिरिक्त, मृत्यु होने या अन्य अपात्रता पाए जाने पर भी नाम काटे जाने का प्रावधान है।
विधानसभा में चर्चा और विवाद
23 फरवरी 2026 की विधानसभा कार्यवाही के दौरान यह योजना गहन चर्चा का विषय रही। विपक्ष ने नवीन पंजीकरण (New Registrations) के पोर्टल के बंद होने पर कड़ा विरोध जताया। विपक्षी सदस्यों का दावा है कि प्रदेश की लगभग 25 लाख महिलाएं, जो अब 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी हैं, पोर्टल बंद होने के कारण इस लाभ से वंचित हैं। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके परिणामस्वरूप विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन (Walkout) भी किया।
25 लाख महिलाएं लाड़ली बहना योजना के लाभ से वंचित
कांग्रेस के विधायक महेश परमार ने सवाल उठाया कि योजना लागू होने के बाद जो बहनें निर्धारित आयु (21 वर्ष) पूर्ण कर चुकी हैं, उनके लिए पोर्टल कब खोला जाएगा? उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की लगभग 25 लाख महिलाएं, जो अब 21 वर्ष की हो चुकी हैं, पोर्टल बंद होने के कारण पंजीकरण से वंचित हैं और यह सामािजक न्याय की भावना के विपरीत है।
श्री परमार ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय ₹3000 प्रतिमाह देने का वादा किया गया था, लेकिन अभी भी कई बहनें इस राशि का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने इसे "बहनों के साथ धोखा" करार दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बहनों का उपयोग केवल वोट लेने और सरकारी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए कर रही है।
कांग्रेस पार्टी का विधानसभा से Walkout
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से बार-बार पूछा कि नए पंजीकरण कब शुरू होंगे। जब सरकार ने कोई निश्चित तिथि नहीं बताई, तो असंतोष व्यक्त करते हुए कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।
सरकार का जवाब (सुश्री निर्मला भूरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री)
मंत्री निर्मला भूरैया ने बताया कि योजना की शुरुआत से अब तक कुल 1,31,06,525 महिलाओं का पंजीकरण हुआ है, जिनमें से 1,25,29,051 पंजीकरण वर्तमान में सक्रिय हैं। अपात्रता के कारण केवल 40 पंजीकरण निरस्त किए गए हैं।
सरकार ने वर्ष 2025-26 में अब तक 18,528 करोड़ रुपये का भुगतान लाड़ली बहनों के खातों में किया है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार बहनों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सहायता राशि को ₹1000 से बढ़ाकर ₹1500 प्रतिमाह किया जा चुका है और रक्षाबंधन जैसे अवसरों पर ₹250 की अतिरिक्त राशि भी दी गई है। ₹3000 किए जाने के वादे पर उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाली महिलाओं को योजना से बाहर किया जाता है, लेकिन वे पात्रता अनुसार वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले सकती हैं।
सुश्री निर्मला भूरिया, मंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री ने सदन में लिखित उत्तर दिया कि वर्तमान में नवीन पंजीकरण संबंधी कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक दोहे के माध्यम से जवाब दिया
2028 तक का लक्ष्य: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जो लोग कहते थे कि यह योजना केवल चुनाव तक है, उन्हें आज ढाई साल बाद जवाब मिल गया है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार अपने संकल्प पत्र के अनुसार वर्ष 2028 तक राशि को बढ़ाकर ₹3000 प्रतिमाह करेगी। नए पंजीकरण के सवाल पर मुख्यमंत्री ने एक दोहे के माध्यम से धैर्य रखने की सलाह दी "धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय"। उन्होंने आश्वस्त किया कि समय आने पर सब कुछ होगा।
जमीनी प्रभाव
योजना का लाभ ले रही महिलाओं ने इस राशि का उपयोग अपने बच्चों की शिक्षा, बेहतर पोषण और अन्य आवश्यक घरेलू जरूरतों को पूरा करने में किया है। सरकार इस योजना को सुशासन (Good Governance) के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में पेश कर रही है, जो महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्तर में सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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