मध्य प्रदेश ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 पर हाई कोर्ट की रोक

Updesh Awasthee
जबलपुर, 23 फरवरी 2026
: हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश से बड़ी खबर मिल रही है। मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय ने ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका 2025 के पालन पर रोक लगा दिए। इसका मतलब हुआ कि एक बार फिर पंचायत विभाग के बड़े अधिकारी, गांव में काम करने वाले कर्मचारियों से हार गए। 

High Court Stays Madhya Pradesh Gram Rozgar Sahayak Guidelines 2025

अधिवक्ता गोपेश तिवारी ने बताया कि हाईकोर्ट ने सरकार की मार्गदर्शिका के क्रियान्वयन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह आदेश मनरेगा कमिश्नर, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, वल्लभ भवन और हर जिले के कलेक्टर को भेजा जा रहा है, ताकि कहीं भी रोजगार सहायक का ट्रांसफर ना हो सके। अधिवक्ता श्री तिवारी के मुताबिक राज्य सरकार ने एक नई मार्गदर्शिका जारी कर रोजगार सहायकों के टर्मिनेशन और ट्रांसफर नीति निर्धारित की थी। हालांकि, इस नीति का क्रियान्वयन अभी तक प्रारंभ नहीं हुआ है।

इसी बीच रोजगार सहायकों ने हाईकोर्ट में स्थानांतरण नीति और सेवा समाप्ति से संबंधित शर्तों को चुनौती दी थी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने याचिका में सुनवाई की और मार्गदर्शिका 2025 पर रोक लगा दी।

मनरेगा के लिए हुई थी रोजगार सहायकों की भर्ती

दरअसल, देश में रोजगार गारंटी योजना लागू होने के बाद ग्रामीण स्तर पर कार्यों की मॉनिटरिंग और मजदूरों का रिकॉर्ड रखने के लिए रोजगार सहायकों की भर्ती की गई। मध्य प्रदेश में उस वक्त शिवराज सिंह चौहान की सरकार थी। राज्य में लगभग 25 हजार पदों पर भर्ती की गई। प्रारंभिक चरण में रोजगार सहायकों को प्रतिमाह 9 हजार रुपए मानदेय निर्धारित किया गया था। बाद में सरकार ने यह महसूस किया कि निर्धारित मानदेय कार्य की तुलना में कम है। इसके बाद दो अन्य मदों के माध्यम से अतिरिक्त 9 हजार रुपए जोड़ दिए गए।

रोजगार सहायकों को 18 हजार रुपए मानदेय

इस तरह रोजगार सहायकों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया गया। अधिकांश रोजगार सहायकों की नियुक्ति उनके पैतृक या निवास ग्राम में ही की गई थी। भर्ती प्रक्रिया में कंप्यूटर संबंधी योग्यता को प्राथमिकता दी गई थी। चयन के लिए 12वीं कक्षा के प्राप्तांक और पीजीडीसीए जैसी कंप्यूटर डिग्री को आधार बनाया गया था। वर्तमान में भी अधिकांश रोजगार सहायक उसी ग्राम पंचायत में कार्यरत हैं, जहां उनकी नियुक्ति हुई थी। ग्रामीण स्तर पर कई ग्राम सचिवों को कंप्यूटर संचालन का अनुभव सीमित होने के कारण पंचायतों में डिजिटल कार्यों और ऑनलाइन प्रविष्टियों की जिम्मेदारी रोजगार सहायक ही निभा रहे हैं। 

कुल मिलाकर रोजगार सहायक की नियुक्ति लोकल लेवल पर हुई है, लोकल को ध्यान में रखते हुए हुई है। इसका मतलब हुआ कि उसका ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
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