इंदौर, 23 फरवरी 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उप आंचलिक कार्यालय ने वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मेसर्स रुचि ग्लोबल लिमिटेड (जो अब मेसर्स एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड के नाम से जानी जाती है) की करोड़ों की संपत्ति जब्त की है।
ED Conducts Major Action in Ruchi Global Financial Fraud Case
17 फरवरी 2026 को की गई इस कार्रवाई में ईडी ने 5.13 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह संपत्ति श्रीमती नीता शहरा (उमेश शाहरा की पत्नी) के नाम पर दर्ज भूमि के रूप में है। यह पूरी कार्यवाही धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत अंजाम दी गई है।
घोटाले की जड़ें
इस मामले की शुरुआत सीबीआई (भोपाल) द्वारा दर्ज की गई उस प्राथमिकी (FIR) से हुई, जिसमें कंपनी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं, जैसे आपराधिक साजिश (120-बी) और धोखाधड़ी (420) के तहत आरोप लगाए गए थे। जांच के अनुसार, कंपनी ने बैंक ऑफ बड़ौदा (पूर्ववर्ती देना बैंक) के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह को 188.35 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान पहुँचाया है।
धोखाधड़ी का तरीका
ईडी की जांच में धन की हेराफेरी के लिए अपनाए गए एक जटिल तंत्र का खुलासा हुआ है:
• कंपनी ने बिना किसी वास्तविक लेन-देन के, केवल कागजों पर जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से ऋण सुविधाएं और साख पत्र (Letters of Credit) प्राप्त किए।
• अवैध रूप से प्राप्त इस धनराशि को एक ही स्वामित्व वाली कई परस्पर जुड़ी कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया।
• धन को कई स्तरों (layering) में बांटकर वापस उसी कंपनी में भेजा गया और बाद में इस पैसे का उपयोग विभिन्न व्यक्तिगत संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया।
अब तक की प्रगति और आगे क्या होगा
जांच एजेंसी इस मामले में काफी समय से सक्रिय है। इससे पहले दिसंबर 2025 में ईडी ने मुख्य आरोपी उमेश शाहरा और अन्य संबंधित व्यक्तियों के परिसरों की सघन तलाशी ली थी। विभाग ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि मामले की आगे की जांच अभी भी जारी है, जिससे भविष्य में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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