नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी के स्थान पर विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी राम-जी) से संबंधित सबसे बड़े सवाल का जवाब मिल गया है। मजदूर का केवल एक सवाल था कि इस नए कानून के तहत उसकी कितनी मजदूरी मिलेगी।
अधिनियम में मजदूरी निर्धारण करने का अधिकार केंद्र के पास
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि, केंद्र सरकार, विकसित भारत-रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी राम-जी) अधिनियम, 2025 की धारा 10 के अनुसार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए मजदूरी दर विनिर्दिष्ट कर सकती है, जो इस योजना के तहत प्रदान किए गए श्रम कार्य पर लागू होगी। इस प्रकार अधिसूचित मजदूरी दर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की धारा 6 के तहत अधिसूचित प्रचलित मजदूरी दर से कम नहीं होगी।
यदि केंद्र ने मजदूरी की दर घोषित नहीं की तो
इस अधिनियम में यह भी प्रावधान किया गया है कि जब तक अधिनियम की धारा 10 के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा किसी मजदूरी दर को अधिसूचित नहीं किया जाता है, तब तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की धारा 6 के तहत अधिसूचित मजदूरी दरें इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर लागू रहेंगी।
G Ram Ji के तहत टाइम पर मजदूरी नहीं मिली तो क्या होगा
इस अधिनियम की धारा 4 की उप-धारा (3) में प्रावधान है कि किसी कार्य के किए जाने की तारीख के बाद, साप्ताहिक आधार पर या किसी भी मामले में अधिकतम एक पखवाड़े के भीतर दैनिक मजदूरी का संवितरण करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, इस अधिनियम की अनुसूची-II के पैरा 6 के अनुसार, यदि मस्टर रोल बंद होने की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है, तो मजदूरी की मांग करने वाले व्यक्ति विलंब के बदले मुआवजे का भुगतान प्राप्त करने के हकदार होंगे।

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