भोपाल समाचार, 4 फरवरी 2026: ऑनलाइन गेम खेलने की लत बिल्कुल अलग होती है। भोपाल में 14 साल की एक बच्चों को मोबाइल में गेम खेलने की लत लग गई और इसी के चलते उसने खुद को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
घर वाले 13वीं में गए थे, अकेले बालक ने आत्महत्या कर ली
पिपलानी पुलिस थाना क्षेत्र में रहने वाला अंश साहू, कक्षा आठवीं का छात्र और अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसके माता-पिता निजी स्कूल में शिक्षक हैं। घटना के वक्त घर पर कोई नहीं था। स्वजन पास ही रहने वाले रिश्तेदार की तेरहवीं कार्यक्रम में गए हुए थे। जब वे घर लौटे तो अंश को फंदे से लटका देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे तत्काल इंद्रपुरी स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन छात्र का मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया है। उसके पैटर्न लॉक को खुलवाने का प्रयास किया जा रहा है।
गेमिंग एडिक्शन रोकने के उपाय
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इसे एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या मानता है, जो दिमाग के रिवार्ड सिस्टम को प्रभावित करती है।WHO द्वारा माता-पिता, बच्चे और किशोरों के लिए यहां प्रभावी उपाय बताए गए हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, APA जैसे विशेषज्ञ द्वारा भी मोबाइल गेम की लत छोड़ने के लिए कई प्रकार के टिप्स दिए गए हैं लेकिन यदि स्थिति गंभीर हो जाती है। गेम छोड़ने पर बच्चा गुस्सा हो जाता है। गेम के लिए पढ़ाई और खाना छोड़ देता है, यहां तक की उसकी नींद भी पूरी नहीं होती तो CBT (कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी) सबसे प्रभावी – NIMHANS या लोकल साइकॉलजिस्ट से संपर्क करें। भारत में हेल्पलाइन: TeleMANAS (14416) या SAMHSA जैसी संस्थाओं से संपर्क करें।

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