भोपाल समाचार, 31 मार्च 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 12 संगठनों की शिक्षक नेता, एकत्रित हुए और फिर DPI द्वारा अचानक घोषित कर दी गई विशेष पात्रता परीक्षा के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा भोपाल में एक बड़ी मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा का ऐलान किया गया है। इसके माध्यम से आदेश को स्थगित करने और सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन फाइल करने की मांग की जाएगी।
अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा का गठन
मध्य प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों एवं अध्यापकों के बीच सक्रिय सभी 12 प्रमुख संगठनों के नेताओं ने इस मुद्दे पर संघर्ष करने के लिए अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा का गठन किया है। शिक्षकों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि सेवा सुरक्षा और अधिकारों की है। मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि टीईटी अनिवार्यता और सेवा अवधि की गणना को लेकर सरकार पर पुनर्विचार के लिए दबाव बनाया जाएगा। इसके तहत 8 अप्रैल से प्रदेशव्यापी आंदोलन की शुरुआत होगी, जो 18 अप्रैल को भोपाल में मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा तक पहुंचेगी। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि बिना स्पष्टता के जारी आदेश ने 1.5 लाख से अधिक शिक्षकों को असमंजस में डाल दिया है।
8 से 18 अप्रैल तक आंदोलन की पूरी टाइम लाइन
- 8 अप्रैल: जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन
- 11 अप्रैल: ब्लॉक स्तर पर धरना और जनप्रतिनिधियों का ध्यानाकर्षण
- 18 अप्रैल: भोपाल में “मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा”
- रिव्यू पिटीशन और आदेश निरस्त करने की मांग
शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटीशन) दायर करे। साथ ही लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए। संगठनों का कहना है कि अन्य राज्यों ने इस मामले में पहले ही रिव्यू पिटीशन दायर कर दी है, लेकिन मध्यप्रदेश में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

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