भोपाल, 16 जुलाई 2026: जैसे पेट्रोल में एथेनॉल को लेकर भयंकर प्रेशर दिखाई दे रहा है। कोई कुछ कहे तो मानहानि का नोटिस आ जाता है। मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस को लेकर भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। शिक्षक यदि आपस में भी बात कर रहे हैं तो उनको कारण बताओं नोटिस दिया जा रहा है।
MP E-Attendance Row: Teachers Face Notices for Talking to Each Other, Sparks Fresh Controversy
जमाना बदल गया है डिजिटल हो गया है। लोग आपस में बात करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बना रहे हैं। यह सार्वजनिक प्लेटफॉर्म नहीं होते हैं, इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं होते और कोई भी व्हाट्सएप ग्रुप में होने वाली बातचीत को पढ़ नहीं सकता है। मतलब यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा लोगों का एक समूह आपस में बातचीत करने के लिए एकत्रित हुआ है, और सभी अपने-अपने विचार प्रस्तुत कर रहे हैं। यह इस समूह का सामूहिक मामला है, सार्वजनिक मामला नहीं। शिवपुरी में जिला शिक्षा अधिकारी श्री आकाश सिंह यादव ने एक शिक्षक श्री धर्मेंद्र रघुवंशी को नोटिस दिया है। नोटिस में जिला शिक्षा अधिकारी ने लिखा है कि आपने ई-अटेंडेंस की विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में आलोचना की है। यह कार्य कदाचरण की श्रेणी में आता है। नोटिस में जिला शिक्षा अधिकारी ने कोई तथ्य नहीं दिया है लेकिन शिक्षक को चेतावनी दी है कि वह समक्ष उपस्थित होकर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें, अन्यथा एक पक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस में ई-अटेंडेंस को शासन की महत्वपूर्ण योजना बताया गया है। जबकि यह व्यवस्था है। कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो तीन पैराग्राफ के नोटिस में 5 से ज्यादा गलतियां हैं। इस प्रकार का बचकाना नोटिस जारी करने के लिए, जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओं नोटिस जारी किया जा सकता है। लेकिन एक बात स्पष्ट है, स्कूल शिक्षा विभाग में ई-अटेंडेंस को स्वीकार करवाने के लिए अब कानूनी डंडे का उपयोग किया जाने लगा है। कोई भी शिक्षक यदि इस व्यवस्था को लेकर अपनी परेशानी अपने विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर करता है। अपने साथी कर्मचारियों के साथ चर्चा करता है और व्यवस्था की आलोचना करता है तो इसको स्कूल शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार कदाचरण माना जा रहा है। कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।

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