Bajaj Allianz ने क्लेम एक्सेप्ट किया लेकिन पेमेंट नहीं किया, 5 साल से परेशान कर रहे हैं

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 11 फरवरी 2026
: कोई भी व्यक्ति इंश्योरेंस इसलिए लेता है ताकि जब वह इस दुनिया में ना रहे तो उसके परिवार को जीवन के लिए संघर्ष न करना पड़े। जब तक वह अपने पैरों पर खड़े हो तब तक के लिए उन्हें आर्थिक मदद मिल जाए लेकिन Bajaj Allianz जैसी कंपनियां इस पूरे कांसेप्ट को ही बिगाड़ रही है। एग्रीमेंट में 15 दिन के भीतर क्लेम सेटल करने का प्रावधान है लेकिन 5 साल से परेशान कर रहे हैं। कंज्यूमर फोरम ने आदेश कर दिया है, लेकिन अब तक पेमेंट नहीं किया है। 

ट्रैवल इंश्योरेंस लिया था और रेलवे की गलती से एक्सीडेंट हुआ

मुरैना जिले के रवि कुमार शर्मा ने 19 अक्टूबर 2020 को मुरैना से निजामुद्दीन जाने के लिए भोपाल एक्सप्रेस का ऑनलाइन टिकट बुक किया था। टिकट के साथ ट्रेवल इंश्योरेंस भी लिया था। 21 अक्टूबर 2020 की रात करीब 3:20 बजे मुरैना रेलवे स्टेशन पर तेज बारिश और अंधेरे के बीच बिजली गुल थी। प्लेटफॉर्म पर कोच नंबर बताने वाला डिस्प्ले बोर्ड भी बंद था। जब रवि कुमार शर्मा अपने आवंटित डी-1 कोच तक पहुंचे तो गेट बंद मिला। वे दरवाजा खोलने के लिए आवाज लगा ही रहे थे कि ट्रेन अचानक चल पड़ी। पायदान पर चढ़ चुके रवि कुमार शर्मा का पैर फिसल गया। वे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच गिर पड़े।

बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस ने क्लेम देने से मना कर दिया

इसके बाद उन्हें 108 एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पत्नी मनीषा शर्मा ने आईआरसीटीसी को घटना की सूचना दी। निर्देश मिलने पर उन्होंने बीमा कंपनी बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस में अगस्त 2021 में सभी दस्तावेजों के साथ क्लेम किया। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं किया। कंपनी यह कहकर मामला टालती रही कि दस्तावेज पूरे नहीं हैं। जनवरी 2022 में भी दस्तावेज दोबारा दिए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार, मामला भोपाल उपभोक्ता आयोग पहुंचा।

भोपाल उपभोक्ता आयोग के आदेश का पालन भी नहीं किया

सुनवाई के बाद कमीशन ने इंश्योरेंस कंपनी को शिकायत की तारीख से 7 परसेंट सालाना ब्याज के साथ 10 लाख देने का आदेश दिया। साथ ही इंश्योरेंस कंपनी को 2 महीने के अंदर मानसिक, शारीरिक और फाइनेंशियल नुकसान के लिए अलग से 10 हजार और मुकदमे के खर्च के तौर पर 5 हजार देने का भी आदेश दिया। तय समय में पेमेंट न करने पर 9 परसेंट ब्याज लगेगा। इसके बाद भी कंपनी ने क्लेम नहीं दिया।

बीमा राशि न मिलने से परेशान होकर मनीषा शर्मा ने 30 सितंबर 2022 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल की बेंच-2 में परिवाद दायर किया। परिवाद में कहा गया कि यात्रा के दौरान दुर्घटना हुई, बीमा लिया गया था। इसके बावजूद भुगतान न करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है। यह फैसला आयोग की बैंच 2 की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह सदस्य अंजुम फिरोज ने सुनाया।

आयोग ने क्या माना

  • रवि कुमार शर्मा के पास वैध रेल टिकट और ट्रेवल इंश्योरेंस था।
  • दुर्घटना यात्रा के दौरान हुई।
  • पोस्टमॉर्टम, मृत्यु प्रमाण पत्र, FIR और अन्य सभी जरूरी दस्तावेज बीमा कंपनी को दिए जा चुके थे।
  • बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि कोई अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए थे।
  • आयोग ने यह भी माना कि IRCTC की भूमिका टिकट बुकिंग तक सीमित थी।
  • बीमा भुगतान की जिम्मेदारी पूरी तरह बीमा कंपनी की थी।

एग्रीमेंट में 15 दिन में क्लेम सेटल करने का प्रावधान है

आयोग ने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी ने समय पर क्लेम का निराकरण नहीं किया, जबकि आईआरसीटीसी और बीमा कंपनी के बीच हुए अनुबंध में 15 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है। इसके बावजूद दो साल तक भुगतान न करना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है।

आयोग का स्पष्ट आदेश

भोपाल उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह 10 लाख रुपए की बीमा राशि परिवाद दायर करने की तारीख से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दे। इसके अलावा मानसिक, शारीरिक और आर्थिक क्षति के लिए अलग से 10 हजार रुपए। लिटिगेशन एक्सपेंस के रूप में 5 हजार रुपए 2 माह के भीतर भुगतान करे। तय समय में भुगतान न होने पर ब्याज दर 9 प्रतिशत होगी।

मृतक की पत्नी मनीषा शर्मा ने कहा कि 
पति की मौत के बाद जीवन पूरी तरह बदल गया। घर में दो बेटियां, एक बेटा और सास-ससुर हैं। वह सिलाई का काम कर किसी तरह घर चला रही हैं। मनीषा शर्मा का कहना है कि इस हादसे के लिए रेलवे की लापरवाही जिम्मेदार है और आयोग के फैसले से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।

खबर का सबक 
रेलवे टिकट बुक करते समय ट्रैवल इंश्योरेंस हर कोई ले लेता है लेकिन एक्सीडेंट के समय इंश्योरेंस क्लेम नहीं करता। इसके कारण बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस जैसी कंपनी यहां खुलेआम एग्रीमेंट के नियमों का उल्लंघन करती है। जो क्लेम 15 दिन में मिलना चाहिए था, उसके लिए 5 साल लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी और पेमेंट अभी भी नहीं मिला है। इसलिए सभी रेल यात्रियों को इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए ताकि प्रेशर बना रहे।
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