छोटे कर्मचारी पर कार्रवाई बाकी को राहत, प्रशासन कटघरे में, Alirajpur एकलव्य विद्यालय का मामला

Updesh Awasthee
नवीन निश्चल सेन, भोपाल समाचार, आलीराजपुर
। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय आंबुआ में लगभग तीन सौ विद्यार्थियों के द्वारा 2 दिन चले आंदोलन के बाद आखिरकार प्रशासन को कदम उठाने ही पड़े। प्राचार्य अर्चना श्रीवास्तव सहित पांच शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से हटाकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच कर दिया गया है जबकि छात्रावास वार्डन को निलंबित कर दिया है। 

11 फरवरी को प्रदर्शन हुआ और 12 को शिकायत

जांच के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में दल गठित हुआ है और वरिष्ठ शिक्षक संदीप पुनिया को विद्यालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। 11 फरवरी की सुबह लगभग तीन सौ छात्र-छात्राओं ने पैदल चलकर रैली निकालकर अपनी मांगों को जिला कलेक्टर नीता माथुर से मिलकर अवगत कराया। 12 फरवरी को विद्यार्थियों द्वारा लिखित शिकायत एसडीएम वीरेंद्र से बघेल को दी गई जिसमें केवल मेस की अव्यवस्था तक सीमित नहीं थे बल्कि भोजन की गुणवत्ता, ड्रेस और स्टेशनरी की कमी, सफाई की बदहाल स्थिति, अपमानजनक व्यवहार एवं जाति सूचक शब्दों का प्रयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो मामला सिर्फ अनुशासन या प्रशासनिक गड़बड़ी के साथ ही यह संवेदनशीलता और जवाबदेही की कसौटी भी बन जाएगा।

प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्राचार्य अर्चना श्रीवास्तव के साथ ही पीजीटी निवेंद्र कुमार हिंदी, टीजीटी सौरभ सोमवंशी हिंदी, टीजीटी एकता गवले अंग्रेजी, एवं टीजीटी अंकुर जैन संस्कृत को आगामी आदेश तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न किया गया है।

एसडीएम वीरेंद्र सिंह बघेल ने शिकायतों को गंभीर प्रकृति का मानते हुए दोनों हॉस्टल में तीन-तीन सदस्यीय मेस समिति गठित की गई, शिकायत पेटी लगाने का निर्देश भी दिया जिसे 7 दिनों में खोला जाएगा।

एकलव्य विद्यालयों की अवधारणा दूर दराज के आदिवासी अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित आवासीय शिक्षा देना है। जब वही छात्र या छात्राएं सड़क पर उतरने को मजबूर हो तो यह केवल एक संस्थान का संकट नहीं बल्कि व्यवस्था के आत्म मंथन का क्षण होता है। 

कार्रवाई हो चुकी है लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है 

न्याय की पारदर्शिता की और उसे भरोसे की जिस पर विद्यार्थियों का भविष्य टिका है। कार्रवाई से तत्काल राहत जरूर मिली है लेकिन ग्रामीण और अभिभावकों के मन में कुछ प्रश्न घूम रहे हैं: 
१ क्या सिर्फ अटैच करना पर्याप्त है ?
२ जिम्मेदारी तय होगी या मामला फाइलों में धीमा पड़कर दब जाएगा ?
३ क्या छोटे कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई और बाकी पर नरमी वाला पैटर्न चलेगा ?
उपरोक्त मामले पर जोबट विधायक सेना महेश पटेल से पूछने पर उन्होंने कहा कि जांच समिति गठित की गई है जो भी दोषी होगा सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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